बांग्लादेश: बंगबंधु की किताब 'द अनफिनिश्ड मेमोयर्स' बेचने पर यूपीएल कर्मियों को परेशान किया गया
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 28 सितंबर 2026 को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ी एक गंभीर घटना सामने आई, जब प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान यूनिवर्सिटी प्रेस लिमिटेड (यूपीएल) के दो बिक्री कर्मचारियों को कथित तौर पर बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की आत्मकथा 'द अनफिनिश्ड मेमोयर्स' बेचने के कारण परेशान किया गया और पुलिस चौकी ले जाया गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना ने देशभर में प्रकाशन जगत और नागरिक समाज में गहरी चिंता उत्पन्न कर दी है।
घटनाक्रम: क्या हुआ उस दिन
रिपोर्टों के अनुसार, 28 सितंबर को दो युवक यूपीएल के आउटलेट पर 'द अनफिनिश्ड मेमोयर्स' खरीदने के इरादे से पहुँचे, लेकिन किताब देखते ही उन्होंने दावा किया कि यह 'प्रतिबंधित' है और इसे बेचने के लिए कर्मचारियों से सफाई माँगी। इसके बाद उन्होंने दुकान का शटर बंद कर दिया, आसपास के लोगों को इकट्ठा किया और दोनों कर्मचारियों को नज़दीकी पुलिस चौकी ले गए।
यूपीएल ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उनके कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि पुस्तक पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है, फिर भी उन दोनों व्यक्तियों ने कर्मचारियों को 'बुरी तरह परेशान' किया। प्रकाशक ने इस घटना को 'देश के लिए बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया।
पुलिस की प्रतिक्रिया
सूत्रपुर पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अधिकारी मतिउर रहमान ने बताया, 'यूपीएल लंबे समय से शेख मुजीब की किताब प्रकाशित कर रहा है। शायद उनके पास पुराने संस्करण की कुछ प्रतियाँ थीं जो पहले छपी थीं, उन्हें बेचा जा रहा था। बस इसी वजह से कुछ लोग वहाँ से दो कर्मचारियों को पुलिस के पास ले गए।' पुलिस ने यह भी बताया कि इस घटना में शामिल लोग कथित तौर पर 'स्थानीय बीएनपी कार्यकर्ता' थे, और बाद में दोनों कर्मचारियों को छोड़ दिया गया।
नागरिक समाज की निंदा और माँगें
नागरिकों के एक समूह ने मंगलवार को एक संयुक्त बयान जारी कर इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने 28 सितंबर की घटना की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की। साथ ही, उन्होंने पूरे बांग्लादेश में प्रकाशन संस्थानों और पुस्तक विक्रेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
बांग्लादेशी अखबार 'प्रोथोम आलो' के अनुसार, हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा, 'किसी भी किताब के कंटेंट से असहमत होने, उसकी आलोचना करने या उस पर बहस करने का अधिकार सभी को है। लेकिन यह अधिकार किसी और की किताब को प्रकाशित करने, बेचने या पढ़ने का अधिकार छीनने की इजाज़त नहीं देता।' उन्होंने आगे जोड़ा कि किसी पुस्तक पर प्रतिबंध का निर्णय पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए होना चाहिए, न कि किसी समूह के दबाव से।
पुस्तक का महत्त्व और व्यापक संदर्भ
'द अनफिनिश्ड मेमोयर्स' को बांग्लादेश के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण कृति माना जाता है। नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस पुस्तक का अलग-अलग दृष्टिकोण से मूल्यांकन किया जा सकता है, लेकिन मतभेदों को 'चर्चा, शोध और तर्कपूर्ण बहस' के ज़रिए व्यक्त किया जाना चाहिए, न कि पुस्तक विक्रेताओं को डरा-धमकाकर।
यह घटना ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आज़ादी को लेकर पहले से ही गहरी चिंताएँ व्यक्त की जा रही हैं। गौरतलब है कि यह देश के प्रकाशन जगत के विरुद्ध हाल के महीनों में सामने आई ऐसी घटनाओं की एक कड़ी के रूप में देखी जा रही है।
आगे क्या होगा
नागरिक संगठनों की माँग पर अधिकारियों की प्रतिक्रिया अभी सामने आनी बाकी है। यदि घटना की निष्पक्ष जाँच नहीं हुई, तो आलोचकों का कहना है कि यह बांग्लादेश में प्रकाशन और बौद्धिक स्वतंत्रता के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकती है। प्रकाशन जगत और मानवाधिकार संगठन इस मामले पर नज़र बनाए हुए हैं।