क्या बांग्लादेश को गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स से दूर रहना चाहिए?

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क्या बांग्लादेश को गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स से दूर रहना चाहिए?

सारांश

बांग्लादेश की पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी ने सरकार को गाजा के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में भागीदारी से दूर रहने की सलाह दी है। समिति का कहना है कि इससे बांग्लादेश की पारंपरिक नीति कमजोर हो सकती है। जानिए इस मुद्दे की गहराई और इसके संभावित प्रभाव।

Key Takeaways

  • गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने की संभावना पर बांग्लादेश की पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी ने विरोध किया।
  • समिति का कहना है कि सैन्य हस्तक्षेप से समस्या का समाधान नहीं होगा।
  • बांग्लादेश का ऐतिहासिक रुख हमेशा से फिलिस्तीनी जनता के पक्ष में रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेश ने फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया है।
  • इस मुद्दे पर बांग्लादेश सरकार ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

ढाका, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में फिलिस्तीन के समर्थन में सक्रिय समूह ‘पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी’ ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह प्रस्तावित गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स (अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल) में किसी भी प्रकार की भागीदारी न करे। समिति का कहना है कि बांग्लादेश का ऐतिहासिक और नैतिक रुख हमेशा से फिलिस्तीनी जनता के पक्ष में रहा है और ऐसे किसी अंतरराष्ट्रीय सैन्य या सुरक्षा ढांचे में शामिल होना इस परंपरागत नीति के विपरीत होगा।

मीडिया आउटलेट ‘द डेली स्टार’ के अनुसार, ‘पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी’ ने रविवार को अंतरिम सरकार की गाजा के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने की इच्छा की कड़ी निंदा की।

समिति ने रविवार को अपने बयान में कहा कि गाजा इस समय गंभीर मानवीय संकट से गुजर रहा है, जहां आम नागरिक लगातार हिंसा, विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे हालात में किसी “स्टेबिलाइजेशन फोर्स” का गठन, जो जमीनी सच्चाई में सैन्य उपस्थिति बढ़ा सकता है, शांति के बजाय तनाव को और गहरा कर सकता है। समिति के अनुसार, फिलिस्तीन की समस्या का समाधान सैन्य हस्तक्षेप से नहीं बल्कि न्यायपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन से ही संभव है।

कमेटी के सदस्य सचिव प्रोफेसर एमडी हारुन-ओर-रशीद ने कहा कि स्टेबिलाइजेशन फोर्स की मुख्य जिम्मेदारी इजरायल की सुरक्षा पक्की करने के बहाने गाजा में आजादी के लिए लड़ने वालों से हथियार छीनना और बदले में फिलिस्तीनी लोगों के विरोध आंदोलन को पूरी तरह खत्म करना होगा।

इसमें कहा गया, “बदकिस्मती से, अंतरिम सरकार के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, खलीलुर रहमान, जो अभी अमेरिका के दौरे पर हैं, ने वाशिंगटन में अमेरिका की राजनीतिक मामलों की अवर सचिव, एलिसन हुकर, और दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री, पॉल कपूर के साथ मीटिंग में गाजा के लिए इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में हिस्सा लेने में बांग्लादेश की दिलचस्पी दिखाई है।” यह बात मुख्य सलाहाकार मोहम्मद युनूस के प्रेस विंग की ओर से जारी एक बयान का जिक्र करते हुए कही गई।

दरअसल, पाकिस्तान की तर्ज पर बांग्लादेश ने भी गाजा में अपनी सेना भेजने की इच्छा जताई है। बांग्लादेश सरकार ने गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयारी के संकेत दिए। ये बात बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) खलीलुर रहमान ने अमेरिकी मंत्री एलिसन हुकर से मुलाकात के दौरान कही थी। विरोध इसी का हो रहा है।

पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी ने यह भी याद दिलाया कि बांग्लादेश का जन्म खुद संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन के बाद हुआ था, इसलिए देश की जनता स्वाभाविक रूप से उत्पीड़न और कब्जे के खिलाफ खड़े लोगों के दर्द को समझती है।

बांग्लादेश ने अतीत में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया है और इजरायली कब्जे की आलोचना की है। समिति का मानना है कि गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होना इस नैतिक और कूटनीतिक रुख को कमजोर कर सकता है।

फिलहाल बांग्लादेश सरकार की ओर से इस अपील पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब मध्य पूर्व की स्थिति वैश्विक राजनीति का केंद्र बनी हुई है।

Point of View

किसी भी सैन्य हस्तक्षेप से बचना आवश्यक है।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

बांग्लादेश सरकार ने गाजा में भागीदारी का संकेत क्यों दिया?
बांग्लादेश सरकार के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर ने अमेरिका में बैठक के दौरान गाजा के लिए इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने की इच्छा जताई।
पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी का क्या कहना है?
पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी का कहना है कि बांग्लादेश को इस प्रस्ताव में भागीदारी से दूर रहना चाहिए क्योंकि इससे उसकी नैतिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
गाजा में वर्तमान स्थिति क्या है?
गाजा में आम नागरिक एक गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं, जिसमें हिंसा, विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की कमी शामिल है।
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