क्या भारत के ट्राई-सर्विसेज डेलीगेशन का श्रीलंका दौरा सैन्य सहयोग और सांस्कृतिक समझ को बढ़ाएगा?
सारांश
Key Takeaways
- श्रीलंका दौरा भारत और श्रीलंका के संबंधों को मजबूत करने में मदद करेगा।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।
- प्रतिनिधिमंडल में तीनों सेनाओं के 120 सदस्य शामिल थे।
- उद्घाटन समारोह में कला और संस्कृति का अद्भुत प्रदर्शन हुआ।
- भारत-श्रीलंका के बीच सैन्य अभ्यास ने सामरिक सहयोग को बढ़ाया।
नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत का ट्राई-सर्विसेज डेलीगेशन ने अपने सैन्य संबंधों को नई दिशा देते हुए श्रीलंका का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल में तीनों सेनाओं के 120 सदस्य शामिल थे। दौरे के अंतिम दिन कला और संस्कृति का अद्भुत समागम देखने को मिला।
भारतीय थल सेना के दक्षिणी कमांड ने जानकारी दी कि इंडियन ट्राई सर्विसेज की टुकड़ी ने 26-29 नवंबर 2025 तक चौथे रेसिप्रोकल मिलिट्री कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत श्रीलंका का दौरा किया, जिसमें दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव का जश्न मनाया गया। इसमें दक्षिणी कमांड के 57 लोग शामिल हुए।
श्रीलंका आर्मी ने भी बताया कि इस दौरे का मकसद सैन्य सहयोग को बढ़ाना, सांस्कृतिक समझ को गहरा करना और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को मजबूत करना है।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत भंडारनायके इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर श्रीलंका आर्मी के निदेशक जनरल वेलफेयर मेजर जनरल जी.सी.वी. फर्नांडो एनडीसी ने किया।
इस दौरे के दौरान सदस्यगण कई स्थलों पर गए, जिनमें सैन्य स्थल, सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थल और धार्मिक जगहें शामिल थीं। ट्राई सर्विसेज के सदस्यगणों को श्रीलंका की विरासत और परंपराओं से अवगत कराया गया।
इस आपसी एक्सचेंज के तहत, श्रीलंकाई सेना के 119 सदस्यों वाला प्रतिनिधिमंडल भी भारत पहुंचा। उनके दो दिन के सांस्कृतिक दौरे में आगरा और गया की ऐतिहासिक और पवित्र जगहों का दौरा शामिल था, जिससे उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अनुभव हुआ।
यह आदान-प्रदान लगातार सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए आपसी रिश्तों को मजबूत करने का काम करता है; इसमें सैन्य संबंध भी शामिल हैं।
हाल ही में कर्नाटक में दोनों देशों की सेनाओं ने युद्धाभ्यास किया था। यह अभ्यास 10 नवंबर से बेलगावी में चला था। यहां दोनों देशों की सेनाओं ने 23 नवंबर 2025 तक सैन्य अभ्यास किया, जो भारत-श्रीलंका संयुक्त सैन्य अभ्यास 'मित्र शक्ति' का 11वां संस्करण था। इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच संचालनात्मक तालमेल को सुदृढ़ करना था ताकि शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में संयुक्त अभियानों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।