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ब्रिटेन की शरण नीति में पाकिस्तान की स्थिति पर उठे सवाल

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ब्रिटेन की शरण नीति में पाकिस्तान की स्थिति पर उठे सवाल

सारांश

ब्रिटेन ने चार देशों के नागरिकों के वीजा पर "आपातकालीन ब्रेक" लगाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बीच, पाकिस्तान से कम डिपोर्टेशन होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानिए इस मुद्दे की गहराई।

मुख्य बातें

ब्रिटेन ने चार देशों के नागरिकों के वीजा पर "आपातकालीन ब्रेक" लगाया है।
पाकिस्तानियों की शरण मांगने की संख्या बढ़ रही है।
पाकिस्तानियों के ७०% से अधिक शरण आवेदन खारिज होते हैं।
डिपोर्टेशन दर कम है, जबकि आवेदन बढ़ रहे हैं।
शरण मांगने के लिए कानूनी रास्तों का उपयोग हो रहा है।

इस्लामाबाद, ८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में, ब्रिटेन ने कानूनी रास्तों से आने वाले व्यक्तियों द्वारा बढ़ती शरण मांगों के चलते चार देशों के नागरिकों के वीजा पर “आपातकालीन ब्रेक” लगाने का निर्णय लिया है। इस बीच, पाकिस्तान से कम संख्या में डिपोर्टेशन (वापसी) होने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन का गृह मंत्रालय अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान के नागरिकों के लिए स्पॉन्सर्ड स्टडी वीजा को समाप्त करेगा, जबकि अफगानों के लिए स्किल्ड वर्कर वीजा भी बंद किया जाएगा।

जब ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद से पूछा गया कि प्रस्तावित वीजा प्रतिबंधों में पाकिस्तान को क्यों शामिल नहीं किया गया, जबकि कानूनी वीजा पर ब्रिटेन पहुंचकर बाद में शरण मांगने वालों में पाकिस्तानियों की संख्या सबसे अधिक है, तो उन्होंने कहा कि यह हमारी कार्रवाई का अंत नहीं है।

हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या अन्य देशों के साथ संभावित वीजा प्रतिबंधों को लेकर बातचीत चल रही है।

पाकिस्तान और ब्रिटेन सरकार के सूत्रों ने बताया कि इस्लामाबाद ब्रिटिश अधिकारियों के साथ असफल शरण आवेदकों की वापसी में सहयोग कर रहा है, लेकिन छात्र वीजा पर ब्रिटेन जाने वाले कई पाकिस्तानी बाद में शरण के लिए आवेदन कर देते हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन में शरण मांगने वालों में पाकिस्तानी नागरिक सबसे बड़ा समूह हैं और कुल आवेदनों में लगभग हर दस में से एक आवेदन पाकिस्तानियों का होता है। वर्ष २०२४ में १०,६३८ पाकिस्तानियों ने शरण के लिए आवेदन किया, जो २०२३ के मुकाबले लगभग दोगुना है और एरिट्रिया, ईरान तथा अफगानिस्तान से आए आवेदकों से भी अधिक है।

शुरुआत में कई लोग छात्र, काम या विजिटर वीजा जैसे कानूनी रास्तों से ब्रिटेन पहुंचते हैं, लेकिन बाद में शरण का दावा कर देते हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तानियों के ७० प्रतिशत से अधिक शरण आवेदन खारिज कर दिए जाते हैं। हालांकि अस्वीकृति दर इतनी अधिक होने के बावजूद बहुत कम लोगों को वापस पाकिस्तान भेजा जाता है।

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष २०२५ में १०,८५३ पाकिस्तानी शरण आवेदनों को खारिज किया गया, लेकिन उसी अवधि में केवल ४४५ लोगों को ही पाकिस्तान वापस भेजा गया, जो कि खारिज आवेदनों का लगभग ४.१ प्रतिशत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पाकिस्तानियों की शरण मांगने की संख्या में वृद्धि हो रही है, जबकि उनकी डिपोर्टेशन दर कम है। यह एक जटिल स्थिति है जो दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिटेन ने किन देशों के नागरिकों के लिए वीजा पर ब्रेक लगाया है?
ब्रिटेन ने अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान के नागरिकों के लिए वीजा पर ब्रेक लगाया है।
पाकिस्तानियों के शरण आवेदन का प्रतिशत क्या है?
ब्रिटेन में शरण मांगने वालों में पाकिस्तानियों का प्रतिशत लगभग १०% है।
पाकिस्तानियों के शरण आवेदन खारिज करने की दर क्या है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तानियों के ७०% से अधिक शरण आवेदन खारिज कर दिए जाते हैं।
ब्रिटेन में शरण के लिए आवेदन करने वाले पाकिस्तानियों की संख्या में कितनी वृद्धि हुई है?
वर्ष २०२४ में १०,६३८ पाकिस्तानियों ने शरण के लिए आवेदन किया, जो २०२३ के मुकाबले लगभग दोगुना है।
ब्रिटेन से पाकिस्तानियों की डिपोर्टेशन दर कितनी है?
वर्ष २०२५ में केवल ४४५ पाकिस्तानी शरण आवेदकों को ही वापस भेजा गया, जो कि खारिज आवेदनों का ४.१% है।
राष्ट्र प्रेस
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