चीन के छाओयांग में चौथा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सम्मेलन शुरू, यूनेस्को गतिविधियों से जुड़ा
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वोत्तर चीन के लियाओनिंग प्रांत के छाओयांग शहर में 17 अक्टूबर 2026 को चौथे चीन अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण वार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इस तीन दिवसीय आयोजन में देशभर से अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के प्रतिनिधि उत्तराधिकारी, विशेषज्ञ और शोधकर्ता एकजुट हुए हैं। सम्मेलन में विरासत के संरक्षण, उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने और समकालीन संदर्भों में उसे नए स्वरूप देने के उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है।
आयोजन और संरचना
इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन चीन अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण संघ, लियाओनिंग प्रांतीय संस्कृति एवं पर्यटन विभाग और छाओयांग नगर सरकार द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत महा बाजार', विषयगत भाषण सत्र और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत नृत्य परेड जैसे विविध आयोजन शामिल हैं। इन गतिविधियों के ज़रिए न केवल संरक्षण की उपलब्धियाँ प्रदर्शित की जा रही हैं, बल्कि आम नागरिकों को भी चीन की समृद्ध परंपराओं को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर दिया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह की मुख्य बातें
उद्घाटन समारोह में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कई प्रमुख परियोजनाओं का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर 'चीन अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण वार्षिक सम्मेलन ब्रांड मूल्यांकन रिपोर्ट (2026)' और 'चीन अमूर्त सांस्कृतिक विरासत प्रसार ब्लू बुक 2026' जारी की गईं। साथ ही, 'चीनी राष्ट्रीय युवा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत उत्तराधिकारी सहायता योजना' के तहत वर्ष 2026 के लिए चयनित प्रतिभागियों की सूची भी सार्वजनिक की गई।
विशेषज्ञ की राय
चीन अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण संघ के अध्यक्ष वांग श्याओफंग ने कहा कि 2023 में अपनी शुरुआत के बाद से यह सम्मेलन देश में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का एक महत्वपूर्ण वार्षिक मंच बन चुका है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के सम्मेलन को यूनेस्को की 'अंतरराष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत दिवस' से जुड़ी गतिविधियों की श्रृंखला में शामिल किया गया है, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्त्व और भी बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और महत्त्व
गौरतलब है कि यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत दिवस के साथ इस सम्मेलन का जुड़ाव इसे वैश्विक परिदृश्य पर एक नई पहचान देता है। आलोचकों का कहना है कि अमूर्त विरासत — जिसमें लोककला, पारंपरिक शिल्प, संगीत और अनुष्ठान शामिल हैं — तेज़ी से हो रहे शहरीकरण के दौर में सबसे अधिक खतरे में है। यह ऐसे समय में आया है जब चीन अपनी सांस्कृतिक कूटनीति को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में सक्रिय है।
आगे की राह
सम्मेलन के अगले दो दिनों में विषयगत कार्यशालाओं और विशेषज्ञ संवादों के ज़रिए संरक्षण की नई रणनीतियों पर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस आयोजन का प्रचार-प्रसार भी सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है, जो भविष्य में वैश्विक सहयोग की संभावनाओं का संकेत देता है।