क्या जापान में चीनी राजदूत ने 'एक-चीन सिद्धांत और युद्ध के बाद के अंतर्राष्ट्रीय शासन' की आवश्यकता पर जोर दिया?

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क्या जापान में चीनी राजदूत ने 'एक-चीन सिद्धांत और युद्ध के बाद के अंतर्राष्ट्रीय शासन' की आवश्यकता पर जोर दिया?

सारांश

जापान में चीनी राजदूत ने एक लेख में 'एक-चीन सिद्धांत' और युद्ध के बाद के अंतर्राष्ट्रीय शासन की आवश्यकता पर जोर दिया। क्या यह जापान के लिए एक गंभीर चेतावनी है?

Key Takeaways

  • एक-चीन सिद्धांत का पालन करना आवश्यक है।
  • जापान को अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए।
  • थाईवान को चीन का एक अटूट हिस्सा माना जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान आवश्यक है।
  • चीन-जापान संबंधों की राजनीतिक नींव को मजबूत करना जरूरी है।

बीजिंग, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। जापान में चीनी राजदूत ने पीपल्स डेली में "एक-चीन सिद्धांत और युद्ध के बाद के अंतर्राष्ट्रीय शासन को पूरी तरह बनाए रखने" शीर्षक से एक लेख लिखा।

80 साल पहले, जापान के खिलाफ चीनी जन-युद्ध में महान जीत का अनुभव हुआ। जापान ने आत्मसमर्पण के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और काहिरा डिक्लेरेशन एवं पोट्सडैम प्रोक्लेमेशन जैसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी दस्तावेजों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया, जिनमें थाईवान को चीन को लौटाने की बात की गई है। थाईवान, जिसने आधी सदी तक जापानी औपनिवेशिक शासन का सामना किया, अपनी मातृभूमि की गोद में लौट आया। जापान के खिलाफ चीनी जन-युद्ध और विश्व स्तर पर एंटी-फासीवादी युद्ध की जीत की 80वीं वर्षगांठ पर, मौजूदा जापानी नेता ने थाईवान के संबंध में खुलकर भड़काऊ बातें कीं और जबरदस्ती की धमकियां दीं। आज तक, जापान अपनी गलतियों को मानने से इनकार कर रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के बुनियादी नियमों को गंभीरता से कमजोर किया जा रहा है, और चीन-जापान रिश्तों की राजनीतिक नींव को बुरी तरह प्रभावित किया जा रहा है।

थाईवान सदियों से चीन का एक अटूट हिस्सा रहा है। एक-चीन सिद्धांत का पालन करना एक राजनीतिक वादा है, जिसे जापान को सख्ती से निभाना चाहिए और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक अनिवार्य जिम्मेदारी है। 1972 के चीन-जापान जॉइंट स्टेटमेंट में, जापानी सरकार ने स्पष्ट रूप से पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार को चीन की एकमात्र कानूनी सरकार के रूप में मान्यता दी और चीनी सरकार की इस बात को पूरी तरह समझा और उसका सम्मान किया कि थाईवान चीन का एक अटूट हिस्सा है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

Point of View

यह स्पष्ट है कि जापान को अपने अतीत से सीखने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने की आवश्यकता है। यह न केवल चीन-जापान संबंधों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
30/11/2025

Frequently Asked Questions

एक-चीन सिद्धांत क्या है?
एक-चीन सिद्धांत यह कहता है कि केवल एक चीन है और थाईवान उसका हिस्सा है।
जापान ने कब आत्मसमर्पण किया?
जापान ने 80 साल पहले, 1945 में आत्मसमर्पण किया था।
क्या थाईवान चीन का हिस्सा है?
हां, थाईवान को चीन का अविभाज्य हिस्सा माना जाता है।
क्या जापान ने अपनी गलतियों को स्वीकार किया है?
नहीं, जापान अभी तक अपनी गलतियों को मानने से इनकार कर रहा है।
इस लेख का महत्व क्या है?
यह लेख जापान और चीन के बीच के संबंधों को समझने में मदद करता है।
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