क्या हॉकी प्राचीन सभ्यता से जुड़ा ऐसा खेल है, जिसमें भारत का 'स्वर्णिम' इतिहास है?

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क्या हॉकी प्राचीन सभ्यता से जुड़ा ऐसा खेल है, जिसमें भारत का 'स्वर्णिम' इतिहास है?

सारांश

हॉकी के खेल की जड़ें प्राचीन सभ्यताओं में हैं। जानिए भारत के इस खेल के ऐतिहासिक सफर के बारे में। क्या आप जानते हैं कि भारत ने ओलंपिक में कितनी बार गोल्ड जीते हैं?

मुख्य बातें

हॉकी का प्राचीन सभ्यताओं से गहरा संबंध है।
भारत ने ओलंपिक में कई बार गोल्ड जीते हैं।
महिला हॉकी को 1980 में ओलंपिक में शामिल किया गया।
भारतीय हॉकी टीम ने हाल ही में शानदार वापसी की है।
हॉकी भारत की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। हॉकी का खेल प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ा हुआ माना जाता है, जहां मिस्र में इसके प्रमाण लगभग 4,000 वर्ष पुरानी सभ्यता के इतिहास में मिलते हैं। इसके साथ ही, इथियोपिया और ईरान से भी इस खेल की जड़ें जुड़ी हैं। रोम और यूनान में भी इस खेल के समान खेल का चलन रहा है।

आधुनिक हॉकी का आरंभ 19वीं शताब्दी के मध्य इंग्लैंड में हुआ। 1876 में यूनाइटेड किंगडम में पहले हॉकी संघ की स्थापना हुई।

लगभग 32 वर्षों बाद, 1908 में इस खेल को पहली बार आधुनिक ओलंपिक खेलों में शामिल किया गया। उस समय इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स ने इस इवेंट में भाग लिया, लेकिन 1912 के ओलंपिक से इसे हटा दिया गया। इसके बाद, 1920 में एक बार फिर ओलंपिक में इसे शामिल किया गया, लेकिन अगले ओलंपिक से इसे फिर से हटा दिया गया।

आखिरकार, चार साल बाद एफआईएच ने सुनिश्चित किया कि 1928 से हॉकी लगातार ओलंपिक खेलों का हिस्सा बनी रहे।

एम्सटर्डम में हुए 1928 ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम ने पहली बार ओलंपिक गोल्ड जीता। मेजर ध्यानचंद की हैट्रिक ने इस विश्व कप में सभी का ध्यान खींचा।

इसके बाद 1932 ओलंपिक में भारत ने फाइनल में जापान को हराकर दूसरा गोल्ड जीता। 1936 में भारत ने ओलंपिक में गोल्ड जीतने की हैट्रिक लगाई, जो मेजर ध्यानचंद के लिए एक शानदार उपहार था।

विश्व युद्ध के कारण 1940 और 1944 में ओलंपिक का आयोजन नहीं हुआ। 12 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद भारत ने 1948 लंदन ओलंपिक में गोल्ड जीता। 1952 में भारतीय हॉकी टीम ने पांचवीं बार गोल्ड जीतकर दुनिया को चौंका दिया। 1956 में आज़ाद भारत ने पहली बार ओलंपिक में गोल्ड जीतने की हैट्रिक लगाई।

1960 में फाइनल गंवाने के बाद भारत ने 1964 में फिर से गोल्ड अपने नाम किया।

इसके बाद भारत ने 1968 और 1972 में ब्रॉन्ज मेडल जीते। 1980 के मॉस्को ओलंपिक में एक बार फिर गोल्ड जीता। यहां से भारत को इस खेल में ओलंपिक पदक के लिए लगभग 4 दशकों तक इंतज़ार करना पड़ा। 2020 के टोक्यो ओलंपिक में भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इस सूखे का अंत किया। 2024 के पेरिस ओलंपिक में टीम इंडिया तीसरे पायदान पर रही।

1980 में पहली बार ओलंपिक में महिला हॉकी को भी शामिल किया गया।

हॉकी के खेल में भारत का दबदबा रहा है, लेकिन इसी देश ने ओलंपिक पदक के लिए लंबा इंतज़ार भी देखा है। पिछले 2 ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम ने इस खेल में शानदार वापसी की है, जिससे फैंस को यकीन है कि टीम इंडिया जल्द ही एक बार फिर ओलंपिक गोल्ड अपने नाम करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह मानना चाहिए कि हॉकी का खेल केवल एक खेल नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। यह खेल न केवल भारत को गर्वित करता है, बल्कि विश्व स्तर पर भी हमारी पहचान को बढ़ावा देता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हॉकी का इतिहास क्या है?
हॉकी का इतिहास प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ा हुआ है, और इसके प्रमाण लगभग 4,000 वर्ष पहले के हैं।
भारत ने ओलंपिक में कब पहला गोल्ड जीता?
भारत ने 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में पहला गोल्ड जीता।
भारतीय हॉकी टीम ने कितनी बार ओलंपिक में गोल्ड जीते हैं?
भारतीय हॉकी टीम ने कुल 8 बार ओलंपिक में गोल्ड जीते हैं।
हॉकी में भारत का क्या योगदान है?
भारत ने हॉकी में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और इस खेल में अपनी पहचान बनाई है।
महिला हॉकी कब ओलंपिक में शामिल हुई?
महिला हॉकी को 1980 में ओलंपिक में शामिल किया गया।
राष्ट्र प्रेस