फुटबॉल का साझा जुनून भारत-फ्रांस संबंधों को नई ऊँचाई देता है: PM मोदी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जून 2026 को पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि फुटबॉल के प्रति साझा जुनून भारत और फ्रांस के बीच एक मज़बूत सांस्कृतिक सेतु का काम करता है। फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में मोदी ने कहा कि दोनों देशों में इस खेल के प्रति दीवानगी स्पष्ट रूप से दिखती है और यह जुड़ाव द्विपक्षीय रिश्तों को और गहरा बनाता है।
फुटबॉल: दो देशों को जोड़ने वाला सांस्कृतिक धागा
प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को विश्व कप अभियान की शानदार शुरुआत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि फ्रांस में फुटबॉल का उत्साह इस समय अपने चरम पर है और देश के हर कोने में इस खेल की लहर दिखती है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में भी फुटबॉल की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है और फ्रांसीसी टीम के प्रशंसकों की संख्या भारत में काफी अधिक है।
विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का संदर्भ
मोदी ने बताया कि इसी वर्ष भारत और फ्रांस के संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह उन्नयन दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे और वैश्विक प्रगति के लिए साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है। उनके अनुसार, ऐसे समय में जब दुनिया कई तरह की अनिश्चितताओं से गुज़र रही है, भारत-फ्रांस साझेदारी स्थिरता और सहयोग का एक ठोस आधार बन गई है।
भारतीय समुदाय की भूमिका
प्रधानमंत्री ने पेरिस में बसे भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को मज़बूत बनाने और 21वीं सदी की साझेदारी को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाई है। समुदाय के सदस्यों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद कहा कि हज़ारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी उनकी मौजूदगी ने उन्हें भारत से जुड़ा हुआ महसूस कराया।
मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'मैं कुछ समय पहले पेरिस पहुँचा, जहाँ भारतीय समुदाय ने गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया। मुझे उनके प्रयासों पर गर्व है, जो भारत और फ्रांस को और करीब ला रहे हैं। भारत-फ्रांस साझेदारी हमारे ग्रह की प्रगति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।'
यात्रा के अन्य महत्वपूर्ण पड़ाव
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोप के प्रमुख तकनीक और नवाचार सम्मेलनों में से एक 'वीवाटेक 2026' को संबोधित किया। उन्होंने एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया और कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को लगातार मज़बूत कर रहा है।