विदेश मंत्रालय का स्पष्ट खंडन: भारत ने 'इस्लामाबाद पीस प्रोसेस' में शामिल होने का नहीं किया अनुरोध
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने 'इस्लामाबाद पीस प्रोसेस' में शामिल होने का कोई अनुरोध नहीं किया।
- विदेश मंत्रालय ने भ्रामक खबरों की निंदा की।
- आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को उन खबरों का दृढ़ता से खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि भारत ने तथाकथित “इस्लामाबाद पीस प्रोसेस” में पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) का दर्जा प्राप्त करने के लिए औपचारिक अनुरोध किया है। मंत्रालय ने इन दावों को एकदम फर्जी और बेबुनियाद बताया है।
विदेश मंत्रालय की फैक्ट-चेक यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लोगों से ऐसी भ्रामक खबरों पर विश्वास न करने की अपील की और केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की ओर से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इन खबरों को फर्जी करार देते हुए संवेदनशील विदेश नीति के मुद्दों पर फैल रही गलत सूचना के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।
यह दावा कुछ अप्रमाणित सोशल मीडिया पोस्ट्स से शुरू हुआ, जिनमें कहा गया था कि भारत इस्लामाबाद से जुड़े किसी शांति पहल में शामिल होना चाहता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसी अफवाहों को तुरंत खारिज करना आवश्यक है, ताकि कूटनीतिक स्तर पर किसी भी प्रकार का भ्रम न उत्पन्न हो। भारत ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वह पाकिस्तान प्रायोजित किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय शांति वार्ता में तब तक शामिल नहीं होगा जब तक कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं होती।
भारत का हमेशा यही रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। मंत्रालय ने यह भी बताया कि उसकी फैक्ट-चेक यूनिट नियमित रूप से फर्जी खबरों, दुष्प्रचार और डीपफेक जैसे मामलों की निगरानी कर उन्हें खारिज करती रहती है।
सरकार ने नागरिकों और मीडिया संगठनों से अपील की है कि विदेश नीति से संबंधित मामलों में केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। मंत्रालय ने दोहराया कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी सार्थक संवाद के लिए ईमानदारी, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और भारत की संप्रभुता का सम्मान आवश्यक है।