ईरानी डेलीगेशन का नेतृत्व कर रहे गालिबाफ: जानिए उनके बारे में
सारांश
Key Takeaways
- गालिबाफ ईरानी संसद के स्पीकर हैं।
- उन्हें डोनाल्ड ट्रंप का पसंदीदा माना जा रहा है।
- उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
- गालिबाफ का राष्ट्रपति बनने का सपना अधूरा है।
- उनका जन्म १९६१ में हुआ था।
नई दिल्ली, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरानी संसद के स्पीकर इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। विदेशी मीडिया (विशेषकर अमेरिकी और यूरोपीय) ने हाल ही में उन्हें सुर्खियों में रखा है। दावा किया जा रहा है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पसंदीदा हैं, लेकिन गालिबाफ के सोशल मीडिया पोस्ट्स में उनकी आक्रामकता स्पष्ट रूप से झलकती है।
हाल ही में पॉलिटिको ने अमेरिकी सरकार के दो अधिकारियों के हवाले से जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप की सरकार चुपचाप ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबाफ को एक संभावित सहयोगी तथा भविष्य के नेता के रूप में देख रही है। एक प्रशासनिक अधिकारी ने पॉलिटिको को बताया, “वह एक मजबूत विकल्प हैं, लेकिन हमें उन्हें परखने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।”
कई किंतु-परंतु और हवाई हमलों के बाद ईरान ने संघर्ष विराम की घोषणा की। दो सप्ताह की अस्थायी रोक के बीच इस्लामाबाद में वार्ता का सिलसिला जारी है। गालिबाफ फिर से खबरों में हैं क्योंकि वे १४-१५ लोगों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं।
गालिबाफ - एक पूर्व सैन्य कमांडर हैं जो स्पष्टता से अपनी बात रखते हैं। लंबे राजनीतिक और सैन्य अनुभव के बावजूद, वे देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद 'राष्ट्रपति' के लिए चुनाव में सफल नहीं हो पाए हैं।
आईएसएनए न्यूज एजेंसी के अनुसार, १९६१ में मशहद में जन्मे गालिबाफ ने यंग एज में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) में शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत की। १९८० के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और १९८२ में खुर्रमशहर को इराकी कब्जे से मुक्त कराने वाले अभियानों में भाग लिया।
बाद के वर्षों में, गालिबाफ ने सुरक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। १९९७ में वे आईआरजीसी के एयरफोर्स कमांडर बने, जबकि २००० में उन्हें ईरान का राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया। २००५ में, वे तेहरान के मेयर चुने गए और लगभग १२ वर्षों तक इस पद पर रहे।
उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा मोड़ २०२० में आया, जब वे ईरान की संसद (मजलिस) के स्पीकर बने। उन्हें देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के पुत्र मुजतबा खामेनेई का करीबी माना जाता है, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रही हैं।
फिर भी, गालिबाफ का राष्ट्रपति बनने का सपना अधूरा है। वे तीन बार राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में शामिल हुए, लेकिन हर बार असफल रहे। २०१७ में, उन्होंने चुनाव से अपना नाम वापस लेते हुए कट्टरपंथी खेमे के उम्मीदवार इब्राहिम रईसी का समर्थन किया था।