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भारत-बांग्लादेश संबंध सुधरे तो घट सकती हैं आर्थिक मुश्किलें, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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भारत-बांग्लादेश संबंध सुधरे तो घट सकती हैं आर्थिक मुश्किलें, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

सारांश

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था संकट में है — जीडीपी वृद्धि 3.5% तक गिरी, महंगाई 4 साल से 8% से ऊपर, निजी ऋण 33 साल के निचले स्तर पर। एक विश्लेषण रिपोर्ट कहती है कि भारत से संबंध सुधारना — जैसा तारिक रहमान की प्रस्तावित यात्रा दर्शाती है — इस संकट से उबरने की सबसे व्यावहारिक राह हो सकती है।

मुख्य बातें

एक विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, भारत के साथ अच्छे संबंध बांग्लादेश की आर्थिक चुनौतियों को कम कर सकते हैं।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान नवंबर में भारत यात्रा की योजना बना रहे हैं।
चटगांव बंदरगाह पर पूंजीगत मशीनरी का आयात वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच 45% घटकर 12.4 लाख टन रह गया।
निजी क्षेत्र के ऋण की वृद्धि दर जून 2026 में 33 वर्षों के निचले स्तर 4.62% पर आ गई।
ADB के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में महंगाई दर 8.7% और 2026-27 में 9% रहने का अनुमान।
2020-21 में भारत की निर्बाध आपूर्ति ने बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि को संकट के बीच थामे रखा था।

भारत के साथ संबंध सामान्य करना बांग्लादेश की गहराती आर्थिक संकट से उबरने की सबसे प्रभावी रणनीतियों में से एक हो सकती है — यह निष्कर्ष एक विश्लेषण रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट में 2020-21 के दौरान भारत की ओर से आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति का हवाला देते हुए कहा गया है कि इसी सहयोग ने उस दौर में बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि को थामे रखा था।

तारिक रहमान की भारत यात्रा और उसका महत्व

एशियन न्यूज के विश्लेषण के अनुसार, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान नवंबर में भारत की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक अनुमानों में गिरावट, बढ़ती महंगाई, कारखानों के बंद होने और रोजगार के अवसरों में कमी के बीच सत्ता संभालने के बाद यह यात्रा उनके सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक निर्णयों में से एक साबित हो सकती है।

गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में प्रस्तावित है जब बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख संकेतक लगातार कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं।

आयात में भारी गिरावट और निवेश का संकट

चटगांव बंदरगाह के आंकड़ों के अनुसार, पूंजीगत मशीनरी, चिकित्सा उपकरणों, वाहनों और भारी मशीनरी का आयात वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच 45 प्रतिशत घट गया — यह 22.6 लाख टन से गिरकर 12.4 लाख टन पर आ गया। रिपोर्ट के अनुसार, पूंजीगत वस्तुओं के आयात में यह तेज़ गिरावट अगस्त 2024 के बाद निजी क्षेत्र के ऋण वितरण की वृद्धि दर में आई सुस्ती का प्रत्यक्ष परिणाम है।

जनवरी 2025 में निजी क्षेत्र के ऋण की वृद्धि दर 7.15 प्रतिशत थी, जो जून 2026 में घटकर 33 वर्षों के निचले स्तर 4.62 प्रतिशत पर आ गई — यह आँकड़ा बांग्लादेश में निजी निवेश की गहरी सुस्ती को दर्शाता है।

जीडीपी वृद्धि दर: शिखर से निचले स्तर तक का सफर

विश्व बैंक के अनुसार, आर्थिक चुनौतियों के बावजूद बांग्लादेश की जीडीपी वृद्धि दर 2022 (कैलेंडर वर्ष) में 7.1 प्रतिशत रही। शेख हसीना प्रशासन के अंतिम पूर्ण वर्ष में यह घटकर 5.8 प्रतिशत पर आ गई। 2025 में यह दर और सिकुड़कर 3.5 प्रतिशत रह गई।

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 2026 के लिए 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। हालांकि, निजी क्षेत्र के ऋण वितरण में जारी गिरावट को देखते हुए वास्तविक वृद्धि दर 2025 के स्तर से भी नीचे रह सकती है।

महंगाई का बोझ और नीतिगत जोखिम

बांग्लादेश में खुदरा महंगाई दर चार वर्षों से अधिक समय से 8 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। ADB के सितंबर 2026 के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में औसत वार्षिक महंगाई दर 8.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026-27 में 9 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि खपत बढ़ाने के उद्देश्य से ढाका सरकार की ओर से सरकारी कर्मचारियों के वेतन को दोगुना करने का प्रस्ताव महंगाई को और अधिक भड़का सकता है — जो पहले से ही नियंत्रण से बाहर जाती दिख रही है।

भारत की भूमिका और आगे की राह

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 2020-21 में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के दौरान भारत की ओर से आवश्यक वस्तुओं और औद्योगिक कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति ने बांग्लादेश की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई — और यह उकसावे वाली घटनाओं के बावजूद जारी रही। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव की भी खबरें थीं।

विश्लेषकों के अनुसार, यदि तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा सफल रहती है, तो यह व्यापार, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग के नए रास्ते खोल सकती है — जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए अभी सबसे ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कूटनीतिक अलगाव से भी तेज हुई है। तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा व्यावहारिकता की ओर कदम है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह यात्रा ठोस व्यापार और आपूर्ति समझौतों में बदलेगी। निजी क्षेत्र के ऋण का 33 साल के निचले स्तर पर पहुँचना और आयात में 45% की गिरावट बताती है कि बांग्लादेश के पास समय बहुत कम है। ढाका का वेतन दोगुना करने का प्रस्ताव महंगाई की आग में घी डाल सकता है — और यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के साथ अच्छे संबंध बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को कैसे मदद कर सकते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, 2020-21 में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के दौरान भारत ने बांग्लादेश को आवश्यक वस्तुएँ और औद्योगिक कच्चा माल निर्बाध रूप से उपलब्ध कराया, जिससे उसकी आर्थिक वृद्धि बनी रही। बेहतर संबंधों से व्यापार, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
बांग्लादेश की जीडीपी वृद्धि दर अभी कितनी है?
विश्व बैंक के अनुसार बांग्लादेश की जीडीपी वृद्धि दर 2025 में घटकर 3.5% रह गई, जो 2022 में 7.1% थी। ADB ने 2026 के लिए 3.7% का अनुमान लगाया है, लेकिन निजी क्षेत्र के ऋण में गिरावट के कारण यह और कम हो सकती है।
तारिक रहमान की भारत यात्रा कब और क्यों महत्वपूर्ण है?
एशियन न्यूज के विश्लेषण के अनुसार, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान नवंबर में भारत यात्रा की योजना बना रहे हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब बांग्लादेश महंगाई, गिरते निवेश और कारखानों के बंद होने की चुनौतियों से जूझ रहा है।
बांग्लादेश में महंगाई की स्थिति क्या है?
बांग्लादेश में खुदरा महंगाई दर चार वर्षों से अधिक समय से 8% से ऊपर बनी हुई है। ADB के सितंबर 2026 के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में यह 8.7% और 2026-27 में 9% तक पहुँच सकती है।
बांग्लादेश में पूंजीगत वस्तुओं के आयात में इतनी गिरावट क्यों आई?
चटगांव बंदरगाह के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच पूंजीगत मशीनरी और भारी उपकरणों का आयात 45% घटकर 12.4 लाख टन रह गया। यह गिरावट अगस्त 2024 के बाद निजी क्षेत्र के ऋण वितरण में आई सुस्ती और निवेश में कमी का परिणाम बताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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