हूती हमलों के बाद खाड़ी उड़ानें बाधित: एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा की सेवाएं 24 अक्टूबर तक निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
मध्य पूर्व में हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों के चलते खाड़ी देशों के लिए हवाई सेवाएं 20 अक्टूबर 2026 तक भी बुरी तरह प्रभावित हैं। एयर इंडिया, इंडिगो और अकासा एयर सहित भारतीय एयरलाइंस ने रियाद, जेद्दा, दम्माम और मदीना के लिए अपनी उड़ानें 24 अक्टूबर 2026 तक निलंबित कर दी हैं। इन रद्दीकरणों का सबसे अधिक असर उन लाखों भारतीय यात्रियों पर पड़ रहा है जो खाड़ी देशों में काम करते हैं या वहाँ की यात्रा की योजना बना रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पिछले सप्ताह के अंत में आंशिक परिचालन फिर से शुरू हुआ था, लेकिन सुरक्षा कारणों से कई उड़ानें अभी भी रद्द की जा रही हैं। यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, ओमान और कतर के आसपास के हवाई क्षेत्र में उड़ानों को लेकर जारी अपनी चेतावनी 16 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी है।
EASA के अनुसार, मिसाइलों, ड्रोन, लड़ाकू विमानों और वायु रक्षा प्रणालियों के इस्तेमाल की आशंका के कारण संबंधित हवाई क्षेत्र में सभी ऊँचाइयों पर नागरिक विमानों के लिए जोखिम बना हुआ है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं या ईरान, इराक, इज़रायल और खाड़ी क्षेत्र के संवेदनशील हवाई क्षेत्रों से बचने के लिए उड़ान मार्ग बदल लिए हैं।
भारतीय एयरलाइंस पर असर
टाटा समूह की एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रियाद, जेद्दा और दम्माम के लिए अपनी उड़ानें 24 अक्टूबर 2026 तक निलंबित कर दी हैं। एयरलाइन ने कहा है कि वह स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और हालात सामान्य होने पर उड़ानें फिर शुरू करने का निर्णय लेगी। यात्रियों को रिफंड और री-बुकिंग के लिए एयरलाइन की ताज़ा एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है।
इंडिगो ने भी रियाद, जेद्दा, दम्माम और मदीना के लिए अपनी उड़ानें 24 अक्टूबर 2026 तक रद्द कर दी हैं। यात्रियों को एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति जाँचने की सलाह दी गई है।
अकासा एयर ने रियाद के लिए अपनी उड़ानें 24 अक्टूबर तक और जेद्दा के लिए 21 अक्टूबर 2026 तक स्थगित कर दी हैं।
आम यात्रियों पर असर
इन रद्दीकरणों का सबसे सीधा असर उन भारतीय प्रवासी कामगारों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है जो खाड़ी देशों में रोज़गार के लिए जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय कार्यरत हैं और सऊदी अरब अकेले इस संख्या के एक बड़े हिस्से का घर है। गौरतलब है कि आने-जाने की उड़ानें बंद होने से न केवल यात्राएं रुकी हैं, बल्कि आपातकालीन स्थिति में निकासी की क्षमता भी सीमित हो जाती है।
क्या होगा आगे
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एयरलाइंस रोज़ाना स्थिति की समीक्षा कर रही हैं। EASA की चेतावनी 16 नवंबर 2026 तक प्रभावी है, हालाँकि क्षेत्र में तनाव कम होने या बढ़ने के आधार पर यह स्थिति और बदल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ज़मीनी स्तर पर युद्धविराम या हवाई सुरक्षा की पुख्ता गारंटी नहीं मिलती, तब तक पूर्ण परिचालन बहाली मुश्किल है। यात्रियों को अपनी बुकिंग की नियमित जाँच करते रहने और एयरलाइन की एडवाइजरी पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।