क्या कुलमान घिसिंग ने 115 दिनों बाद इस्तीफा दिया?

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क्या कुलमान घिसिंग ने 115 दिनों बाद इस्तीफा दिया?

सारांश

नेपाल के कैबिनेट मंत्री कुलमान घिसिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के दबाव में यह निर्णय लिया गया। जानिए इस इस्तीफे के पीछे की वजहें और इसके संभावित राजनीतिक असर।

Key Takeaways

  • कुलमान घिसिंग ने 115 दिनों के बाद इस्तीफा दिया।
  • प्रधानमंत्री सुशीला कार्की का दबाव मुख्य कारण रहा।
  • घिसिंग 'उज्यालो नेपाल पार्टी' के गठन में शामिल थे।
  • उनका इस्तीफा नेपाल की राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।
  • घिसिंग ने कई विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश की।

काठमांडू, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल के कैबिनेट मंत्री कुलमान घिसिंग ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह निर्णय प्रधानमंत्री सुशीला कार्की द्वारा राजनीतिक दलों से जुड़े मंत्रियों पर मंत्री पद छोड़ने के लिए दबाव डालने के बीच लिया गया है।

ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई, भौतिक अवसंरचना और परिवहन तथा शहरी विकास मंत्रालयों का प्रभार संभालने वाले घिसिंग ने 115 दिनों के कार्यकाल के बाद प्रधानमंत्री कार्की को अपना इस्तीफा सौंपा। उन्हें पिछले वर्ष 15 सितंबर को मंत्री नियुक्त किया गया था।

कहा जा रहा है कि घिसिंग ‘उज्यालो नेपाल पार्टी’ के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, जो बाद में 29 दिसंबर को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में विलीन हो गई। दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के तहत घिसिंग के आरएसपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनने की संभावना है। आरएसपी भंग हुई प्रतिनिधि सभा में चौथी सबसे बड़ी पार्टी थी।

घिसिंग के इस वर्ष 5 मार्च को प्रस्तावित संसदीय चुनाव में भाग लेने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।

इस्तीफापार्टी राजनीति में शामिल होने के आरोप उनके पद छोड़ने की एक वजह बने। हाल के दिनों में यह आलोचना बढ़ रही थी कि एक कथित रूप से गैर-राजनीतिक अंतरिम सरकार में शामिल मंत्री खुले तौर पर दलगत गतिविधियों में संलिप्त हैं।

सूत्रों के अनुसार, सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने पार्टी राजनीति में सक्रिय मंत्रियों को सरकार छोड़ने के निर्देश दिए थे।

यह उल्लेखनीय है कि सितंबर की शुरुआत में हुए जेन-जेड आंदोलन के बाद 12 सितंबर को गठित अंतरिम सरकार को व्यापक रूप से तटस्थ, निष्पक्ष और राजनीतिक बोझ से मुक्त माना जा रहा है।

इस्तीफे के बाद आयोजित एक प्रेस वार्ता में घिसिंग ने दावा किया कि वह किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं और उज्यालो नेपाल पार्टी तथा आरएसपी के बीच हुआ समझौता अभी औपचारिक रूप से लागू नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल के इतिहास में अंतरिम और चुनावी सरकारों के प्रधानमंत्री व मंत्री पद पर रहते हुए भी चुनाव लड़ते रहे हैं।

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 18 घंटे तक की बिजली कटौती (लोड शेडिंग) खत्म करने का श्रेय पाने वाले घिसिंग देश के सबसे लोकप्रिय सार्वजनिक व्यक्तियों में माने जाते हैं।

वैकल्पिक राजनीतिक शक्तियों को मजबूत करने के प्रयास में, आरएसपी ने घिसिंग और काठमांडू महानगर के मेयर बालेन शाह जैसे लोकप्रिय चेहरों को अपने साथ जोड़ा था। आरएसपी का नेतृत्व पूर्व मीडिया हस्ती रवि लामिछाने कर रहे हैं, जिन पर सहकारी संस्थाओं में धोखाधड़ी के आरोप लगे थे और जिन्हें हाल ही में अदालत के आदेश पर जेल से रिहा किया गया है।

अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान, घिसिंग ने विकास से जुड़े कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालते हुए वर्षों से लंबित परियोजनाओं को रोकने वाली निर्माण कंपनियों के सैकड़ों अनुबंध रद्द किए। उन्होंने कहा कि उन्होंने देश के ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई क्षेत्रों में सुधार, अवसंरचना विकास को आगे बढ़ाने और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के प्रयास किए।

घिसिंग के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने तीन अहम मंत्रालयों में साढ़े तीन महीने तक “सक्षम” नेतृत्व प्रदान करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

Point of View

बल्कि इससे नेपाल में राजनीतिक स्थिरता और दलगत राजनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। हमें यह समझने की जरूरत है कि ऐसे निर्णय सरकार की दिशा और जनता की अपेक्षाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
NationPress
08/01/2026

Frequently Asked Questions

कुलमान घिसिंग ने इस्तीफा क्यों दिया?
उनका इस्तीफा प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के दबाव में आया, जिन्होंने मंत्रियों को पार्टी राजनीति से दूर रहने के लिए कहा था।
कुलमान घिसिंग का कार्यकाल कितना लंबा था?
उनका कार्यकाल 115 दिनों का था।
क्या घिसिंग भविष्य में चुनाव लड़ेंगे?
हां, घिसिंग के इस वर्ष 5 मार्च को प्रस्तावित संसदीय चुनाव में भाग लेने की संभावना है।
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