क्या भारत अमेरिका के हटने के बाद भी इंटरनेशनल सोलर एलायंस को समर्थन देगा?
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका के हटने के बावजूद भारत का समर्थन जारी रहेगा।
- इंटरनेशनल सोलर एलायंस में लगभग 125 देश सदस्य हैं।
- जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सौर ऊर्जा का विस्तार आवश्यक है।
नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के हटने के बावजूद, भारत इंटरनेशनल सोलर एलायंस को अपना समर्थन बनाए रखेगा। यह जानकारी गुरुवार को एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा साझा की गई।
इंटरनेशनल सोलर एलायंस उन 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक है, जिनसे अमेरिका ने बाहर निकलने का निर्णय लिया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार को मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि इंटरनेशनल सोलर एलायंस उन संगठनों में शामिल है, जिनसे अमेरिका ने बाहर निकलने का फैसला किया।
वर्तमान में, इंटरनेशनल सोलर एलायंस के लगभग 125 देश सदस्य हैं।
अधिकारी ने कहा कि इंटरनेशनल सोलर एलायंस अपने उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसके तहत सदस्य देशों को सौर ऊर्जा के विस्तार में आने वाली चुनौतियों का सामूहिक समाधान प्रदान करना है, ताकि यूनिवर्सल एनर्जी तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारी ने आगे कहा कि आईएसए सदस्य देशों, विशेषकर सबसे कम विकसित देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के साथ सौर ऊर्जा के विकास, वित्त जुटाने, क्षमता निर्माण और जोखिम संबंधी धारणाओं को कम करने के लिए कार्य करना जारी रखेगा।
व्हाइट हाउस के एक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके 66 संगठनों, एजेंसियों और आयोगों के लिए अमेरिकी समर्थन को निलंबित कर दिया। यह कदम उनके प्रशासन द्वारा अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भागीदारी और फंडिंग की समीक्षा के बाद उठाया गया।
ट्रंप प्रशासन ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) और जलवायु पर केंद्रित अन्य संगठनों से खुद को अलग कर लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का पीछे हटना एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह देश दुनिया का सबसे बड़ा प्रदूषक होने के साथ-साथ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी है।