क्या यूरोप को अधिकार है अमेरिकी प्रस्ताव अस्वीकार करने का?: फ्रांस

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क्या यूरोप को अधिकार है अमेरिकी प्रस्ताव अस्वीकार करने का?: फ्रांस

सारांश

फ्रांस के विदेश मंत्री ने अमेरिका के प्रस्तावों के खिलाफ यूरोप के अधिकार की बात की। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका के प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं हैं, तो यूरोप को अपनी आवाज उठाने का पूरा अधिकार है। क्या यह यूरोपीय सहयोगियों के लिए एक नया मोड़ है?

Key Takeaways

  • यूरोप को अमेरिका के प्रस्तावों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का अधिकार है।
  • फ्रांस के विदेश मंत्री की टिप्पणियाँ अमेरिकी नीतियों पर असंतोष को दर्शाती हैं।
  • ग्रीनलैंड पर ट्रंप का रुख यूरोपीय देशों को चिंतित कर रहा है।
  • बाहर के दुश्मन पुराने रिश्तों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
  • राजनीतिक ताकतों की आलोचना जो यूरोपीय विरासत से मुंह मोड़ना चाहती हैं।

पेरिस, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फ्रांस के विदेश मंत्री ने शुक्रवार को कहा कि जब अमेरिका ऐसे प्रस्ताव पेश कर रहा है जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता, तो यूरोप को अधिकार है कि वह उनके खिलाफ अपनी आवाज उठाए और उन्हें 'न' कहे।

जीन-नोएल बैरोट की यह टिप्पणी वाशिंगटन के कुछ सहयोगियों के बीच बढ़ती निराशा के बीच आई है कि कैसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" विदेश और व्यापार नीतियों ने पारंपरिक रिश्तों और गठबंधनों को खत्म कर दिया है।

फ्रांस के राजदूतों को दिए अपने सालाना भाषण में बैरोट ने कहा, "कुछ ही महीनों में, नए अमेरिकी प्रशासन ने उन रिश्तों पर फिर से सोचने का फैसला किया है जो हमें बंधते हैं। यह उनका अधिकार है। और यह हमारा भी अधिकार है कि हम किसी ऐतिहासिक सहयोगी को, चाहे वह कितना भी ऐतिहासिक क्यों न हो, अगर हमें उसका प्रस्ताव मंजूर न हो तो उसे कह दें।"

ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर रवैया यूरोपीय देशों को आगामी नीति पर विचार करने को मजबूर कर रहा है। यह बड़ा द्वीप खनिजों से भरपूर डेनिश क्षेत्र है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसकी जरूरत है।

बैरोट ने इस सम्मेलन में यूएस को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बराबर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप पर बाहर से "दुश्मन" हमला कर रहे हैं जो पुराने रिश्तों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "वे एक बार फिर हमारे बीच के मतभेद का फायदा उठाने का सपना देखते हैं, जैसा कि वे सदियों से करते आ रहे हैं। वे पहले से ही धमकियों और दबाव के जरिए हमारे यूनियन की ताकत को परखना शुरू कर रहे हैं, जैसा कि हमारे पूर्वी हिस्से पर इलाके में घुसपैठ, ट्रेड ब्लैकमेल और ग्रीनलैंड पर दावों से पता चलता है, जो बिकाऊ नहीं है।"

बैरोट जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर के दो दिन बाद बोल रहे थे, जिन्होंने बहुत ही तल्ख अंदाज में "हमारे सबसे जरूरी पार्टनर, यूएसए द्वारा मूल्यों के टूटने" की बात कही थी और कहा था कि दुनिया "लुटेरों का अड्डा बन सकती है, जहां सबसे बेईमान लोग जो चाहें ले सकते हैं।"

फ्रांस में 18 महीने से भी कम समय में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में बैरोट ने "उन राजनीतिक ताकतों" का साथ देने की कोशिशों की आलोचना की जो यूरोपीय विरासत से मुंह मोड़ना चाहती हैं।

Point of View

NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

फ्रांस के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यूरोप को अमेरिका के अस्वीकार्य प्रस्तावों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का अधिकार है।
डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का यूरोप पर क्या प्रभाव पड़ा?
ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीतियों ने पारंपरिक रिश्तों और गठबंधनों को खत्म कर दिया है।
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