क्या ममता सरकार के कार्यकाल में महिलाएं असुरक्षित हैं: अग्निमित्रा पॉल?
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
- भाजपा ने महिलाओं के मुद्दों को प्राथमिकता दी है।
- ममता बनर्जी की सरकार में महिलाओं की असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
- कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच के संबंधों पर सवाल उठाए गए हैं।
- महिलाओं की भागीदारी चुनावों में आवश्यक है।
कोलकाता, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने चुनाव, महिला मतदाताओं और विपक्षी दलों पर तीखे सवाल उठाए।
उन्होंने शनिवार को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि विधानसभा चुनाव में लगभग 90 से 100 दिन का समय बचा है और भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में है।
अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 50 प्रतिशत मतदाता महिलाएं हैं। यह भूमि मां काली और मां दुर्गा की है और यदि इसमें महिलाओं की भागीदारी नहीं होगी, तो राज्य का भविष्य कैसे तय होगा?
उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं के मुद्दों को गंभीरता से ले रही है और पार्टी पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतरने जा रही है।
भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि इस बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सत्ता में वापसी नहीं होगी। ममता बनर्जी के शासन के दौरान पश्चिम बंगाल में महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था की स्थिति ने जनता को निराश किया है, और यही कारण है कि महिलाएं अब बदलाव चाहती हैं।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पर निशाना साधते हुए अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि कांग्रेस वही पार्टी है जिसने तृणमूल कांग्रेस को जन्म दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अधीर रंजन बाबू किस प्रकार की राजनीति की बात कर रहे हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि अधीर रंजन चौधरी के चुनाव प्रचार में उनके नेता राहुल गांधी एक बार भी प्रचार के लिए नहीं आए। इसके पीछे कारण यह था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नहीं चाहती थीं कि राहुल गांधी पश्चिम बंगाल आएं।
अग्निमित्रा पॉल ने यह भी कहा कि यह पूरा मामला कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच की राजनीतिक सेटिंग को प्रदर्शित करता है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि जब नेतृत्व ही मजबूती से एकजुट नहीं है, तो जनता से किस प्रकार के समर्थन की अपेक्षा की जा सकती है।