होर्मुज स्ट्रेट में फिर विस्फोट: नेविगेशन बंद कर प्रतिबंधित रास्ते से निकले तेल टैंकर में बारूदी सुरंग से लगी आग
सारांश
मुख्य बातें
होर्मुज स्ट्रेट में एक और तेल टैंकर 19 अक्टूबर 2026 को समुद्री बारूदी सुरंग (माइन) की चपेट में आ गया, जिससे जहाज के इंजन रूम में आग भड़क उठी। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने सोमवार तड़के इस घटना की जानकारी दी और दावा किया कि जहाज ने जीपीएस व नेविगेशन सिस्टम बंद कर जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में एक प्रतिबंधित मार्ग से गुजरने की कोशिश की थी।
घटना का विवरण
आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार मंच 'सिपाह न्यूज' में जारी बयान के अनुसार, टैंकर ने अपने जीपीएस और अन्य नेविगेशन सिस्टम जानबूझकर बंद कर रखे थे। जहाज नियमों का पालन करने के बजाय होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी हिस्से में एक अनधिकृत और प्रतिबंधित रास्ते का उपयोग कर रहा था, जिस कारण वह बारूदी सुरंग से टकरा गया और इंजन रूम में आग लग गई।
आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाला कोई भी जहाज यदि अपने नेविगेशन या पहचान-संबंधी सिस्टम बंद करता है, तो उसके खिलाफ 'कड़ी और निर्णायक कार्रवाई' की जाएगी।
पिछले दो दिनों में दूसरी घटना
गौरतलब है कि यह महज दो दिनों में दूसरी ऐसी घटना है। इससे पहले शनिवार को भी एक सुपरटैंकर बारूदी सुरंग से टकराकर आग की चपेट में आ गया था। उस घटना में भी आईआरजीसी ने आरोप लगाया था कि सुपरटैंकर ने अपने सभी लोकेशन ट्रैकिंग और रडार सिस्टम बंद कर रखे थे और धोखे से जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश की थी। आईआरजीसी ने यह भी आरोप लगाया था कि उस जहाज को अमेरिकी सेना का समर्थन प्राप्त था — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान की सख्ती की पृष्ठभूमि
ईरान ने 28 फरवरी को इस जलडमरूमध्य पर अपनी निगरानी और नियंत्रण को और सख्त कर दिया था। यह कदम ईरानी क्षेत्र पर इजरायल और अमेरिका के कथित संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया था। इसके बाद ईरान ने इजरायल और अमेरिका से जुड़े या उनसे संबद्ध जहाजों के लिए इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही पर रोक लगा दी थी।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर बना हुआ है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्त्व
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जिससे होकर वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की एक बड़ी मात्रा की ढुलाई होती है। इस क्षेत्र में किसी भी व्यवधान का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों — जिनमें भारत भी शामिल है — की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
लगातार दो घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क हो गया है; आने वाले दिनों में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था पर वैश्विक नज़र बनी रहेगी।