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भारत समर्थित हाउसिंग प्रोजेक्ट: श्रीलंका में 60,000 घरों का लक्ष्य, बडुल्ला में 57 घरों की नींव रखी

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भारत समर्थित हाउसिंग प्रोजेक्ट: श्रीलंका में 60,000 घरों का लक्ष्य, बडुल्ला में 57 घरों की नींव रखी

सारांश

भारत सरकार की अनुदान सहायता से चल रहा इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट श्रीलंका में 60,000 घरों के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। चौथे चरण में बडुल्ला के कन्नवरेला एस्टेट में 57 घरों की नींव रखी गई। यह पहल 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का ठोस उदाहरण है और आर्थिक संकट से उबरते श्रीलंका में भारत की विकास-साझेदार भूमिका को मज़बूत करती है।

मुख्य बातें

इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट (IHP) के चौथे चरण के तहत बडुल्ला जिले के कन्नवरेला एस्टेट में 57 घरों की नींव रखी गई।
चौथे चरण का लक्ष्य श्रीलंका के छह प्रांतों में 10,000 घर बनाना है।
समग्र IHP के तहत 60,000 घर बनाने की योजना है, जिसमें 18 अरब रुपए से अधिक का निवेश होगा।
पहले दो चरणों में युद्ध-प्रभावित उत्तरी-पूर्वी प्रांतों में 46,000 घर बनाए/पुनर्निर्मित किए गए; तीसरे चरण में बागान मज़दूरों के लिए 4,000 घर ।
जुलाई 2023 में PM मोदी ने बागान क्षेत्रों के विकास के लिए 750 मिलियन रुपए के बहु-क्षेत्रीय अनुदान पैकेज की घोषणा की थी।
यह परियोजना भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का व्यावहारिक विस्तार मानी जा रही है।

भारत सरकार की अनुदान सहायता से संचालित इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट (IHP) श्रीलंका में वंचित और बागान-क्षेत्र के परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह पहल भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय विकास साझेदारी का सबसे ठोस और दीर्घकालिक स्तंभ बनती जा रही है।

बडुल्ला में चौथे चरण की शुरुआत

IHP के चौथे चरण के तहत हाल ही में बडुल्ला जिले के कन्नवरेला एस्टेट में 57 घरों की नींव रखी गई। इस समारोह में श्रीलंका के प्लांटेशन और सामुदायिक इन्फ्रास्ट्रक्चर मंत्री के.वी. सामंथा विद्यारत्ने और हंबनटोटा में भारत के कॉन्सुल जनरल हरविंदर सिंह उपस्थित रहे। दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की इस संयुक्त उपस्थिति को आपसी प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।

चौथे चरण का लक्ष्य श्रीलंका के छह प्रांतों में 10,000 घर बनाना है, जिसमें बागान क्षेत्रों में रहने वाले सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

समग्र परियोजना का दायरा

रिपोर्टों के अनुसार, IHP के तहत पूरे श्रीलंका में कुल 60,000 घर बनाने का लक्ष्य है, जिसमें 18 अरब रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। परियोजना के पहले दो चरणों में युद्ध से प्रभावित उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में 46,000 घर बनाए गए या उनका पुनर्निर्माण किया गया। तीसरे चरण में बागान क्षेत्र के मज़दूरों के लिए 4,000 घर तैयार किए गए।

यह ऐसे समय में आया है जब श्रीलंका अपने हालिया इतिहास के सबसे गंभीर वित्तीय संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है और अपने सामाजिक एवं आर्थिक ढाँचे को नए सिरे से खड़ा कर रहा है।

भारतीय मूल के तमिल समुदाय पर विशेष ध्यान

रिपोर्ट में इंडियन ओरिजिन तमिल (IOT) समुदाय के लिए इस परियोजना की विशेष अहमियत रेखांकित की गई है। यह समुदाय दो सदियों से अधिक समय से श्रीलंका की चाय और बागान अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक असमानताओं का सामना करता आया है।

गौरतलब है कि जुलाई 2023 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका में भारतीय मूल के तमिल समुदाय की उपस्थिति के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बागान क्षेत्रों के विकास के लिए 750 मिलियन रुपए के बहु-क्षेत्रीय अनुदान पैकेज की घोषणा की थी।

आम जनता पर असर

रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आवास तक पहुँच से हज़ारों कमज़ोर परिवारों की आजीविका बहाल होने, समुदायों को संगठित होने और श्रीलंका की व्यापक आर्थिक पुनर्प्राप्ति में योगदान मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के शब्दों में, यह परियोजना 'सिर्फ ईंटें और गारा बिछाने से कहीं आगे है — यह दीर्घकालिक स्थिरता बनाती है और हज़ारों परिवारों का सम्मान वापस लाती है।'

भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का व्यावहारिक रूप

यह आवास कार्यक्रम भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के अनुरूप है और अनुदान-आधारित इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं कल्याण परियोजनाओं के माध्यम से एक विकास साझेदार के रूप में भारत की निरंतर भूमिका को रेखांकित करता है। आगे चलकर इस परियोजना की सफलता भारत-श्रीलंका संबंधों की दिशा और गहराई दोनों को प्रभावित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब चीन हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर कूटनीति को तेज़ कर रहा है। हालाँकि, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि 60,000 घरों के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में से अब तक कितने वास्तव में पूर्ण हो चुके हैं और उनमें रहने वाले परिवारों की स्थिति क्या है — इसका कोई स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है। IOT समुदाय की दशकों पुरानी सामाजिक-आर्थिक उपेक्षा को केवल आवास से नहीं पाटा जा सकता; भूमि अधिकार, शिक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। इस परियोजना की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह केवल ईंट-पत्थर तक सीमित रहती है या समग्र सामुदायिक विकास की ओर बढ़ती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट (IHP) श्रीलंका क्या है?
IHP भारत सरकार की अनुदान सहायता से संचालित एक आवास कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य श्रीलंका में कुल 60,000 घर बनाना है। इसमें 18 अरब रुपए से अधिक का निवेश है और यह युद्ध-प्रभावित तथा बागान क्षेत्रों के वंचित परिवारों को लक्षित करता है।
IHP के चौथे चरण में क्या नया हुआ?
चौथे चरण के तहत बडुल्ला जिले के कन्नवरेला एस्टेट में 57 घरों की नींव रखी गई। इस चरण का लक्ष्य छह प्रांतों में 10,000 घर बनाना है, जिसमें बागान क्षेत्र के परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
पिछले चरणों में कितने घर बनाए गए?
पहले दो चरणों में उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में 46,000 घर बनाए या पुनर्निर्मित किए गए। तीसरे चरण में बागान क्षेत्र के मज़दूरों के लिए 4,000 घर तैयार किए गए।
भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
IOT समुदाय दो सदियों से श्रीलंका की बागान अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन का सामना करता रहा है। यह परियोजना उनके लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने और उनकी गरिमा बहाल करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
PM मोदी ने श्रीलंका के बागान क्षेत्र के लिए क्या घोषणा की थी?
जुलाई 2023 में श्रीलंका यात्रा के दौरान PM मोदी ने भारतीय मूल के तमिल समुदाय की उपस्थिति के 200 वर्ष पूरे होने पर बागान क्षेत्रों के विकास के लिए 750 मिलियन रुपए के बहु-क्षेत्रीय अनुदान पैकेज की घोषणा की थी।
राष्ट्र प्रेस
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