भारत समर्थित हाउसिंग प्रोजेक्ट: श्रीलंका में 60,000 घरों का लक्ष्य, बडुल्ला में 57 घरों की नींव रखी
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार की अनुदान सहायता से संचालित इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट (IHP) श्रीलंका में वंचित और बागान-क्षेत्र के परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह पहल भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय विकास साझेदारी का सबसे ठोस और दीर्घकालिक स्तंभ बनती जा रही है।
बडुल्ला में चौथे चरण की शुरुआत
IHP के चौथे चरण के तहत हाल ही में बडुल्ला जिले के कन्नवरेला एस्टेट में 57 घरों की नींव रखी गई। इस समारोह में श्रीलंका के प्लांटेशन और सामुदायिक इन्फ्रास्ट्रक्चर मंत्री के.वी. सामंथा विद्यारत्ने और हंबनटोटा में भारत के कॉन्सुल जनरल हरविंदर सिंह उपस्थित रहे। दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की इस संयुक्त उपस्थिति को आपसी प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।
चौथे चरण का लक्ष्य श्रीलंका के छह प्रांतों में 10,000 घर बनाना है, जिसमें बागान क्षेत्रों में रहने वाले सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
समग्र परियोजना का दायरा
रिपोर्टों के अनुसार, IHP के तहत पूरे श्रीलंका में कुल 60,000 घर बनाने का लक्ष्य है, जिसमें 18 अरब रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। परियोजना के पहले दो चरणों में युद्ध से प्रभावित उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में 46,000 घर बनाए गए या उनका पुनर्निर्माण किया गया। तीसरे चरण में बागान क्षेत्र के मज़दूरों के लिए 4,000 घर तैयार किए गए।
यह ऐसे समय में आया है जब श्रीलंका अपने हालिया इतिहास के सबसे गंभीर वित्तीय संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है और अपने सामाजिक एवं आर्थिक ढाँचे को नए सिरे से खड़ा कर रहा है।
भारतीय मूल के तमिल समुदाय पर विशेष ध्यान
रिपोर्ट में इंडियन ओरिजिन तमिल (IOT) समुदाय के लिए इस परियोजना की विशेष अहमियत रेखांकित की गई है। यह समुदाय दो सदियों से अधिक समय से श्रीलंका की चाय और बागान अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक असमानताओं का सामना करता आया है।
गौरतलब है कि जुलाई 2023 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका में भारतीय मूल के तमिल समुदाय की उपस्थिति के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बागान क्षेत्रों के विकास के लिए 750 मिलियन रुपए के बहु-क्षेत्रीय अनुदान पैकेज की घोषणा की थी।
आम जनता पर असर
रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आवास तक पहुँच से हज़ारों कमज़ोर परिवारों की आजीविका बहाल होने, समुदायों को संगठित होने और श्रीलंका की व्यापक आर्थिक पुनर्प्राप्ति में योगदान मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के शब्दों में, यह परियोजना 'सिर्फ ईंटें और गारा बिछाने से कहीं आगे है — यह दीर्घकालिक स्थिरता बनाती है और हज़ारों परिवारों का सम्मान वापस लाती है।'
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का व्यावहारिक रूप
यह आवास कार्यक्रम भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के अनुरूप है और अनुदान-आधारित इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं कल्याण परियोजनाओं के माध्यम से एक विकास साझेदार के रूप में भारत की निरंतर भूमिका को रेखांकित करता है। आगे चलकर इस परियोजना की सफलता भारत-श्रीलंका संबंधों की दिशा और गहराई दोनों को प्रभावित कर सकती है।