सऊदी अरब के दो हवाई अड्डों पर हमले की भारत ने कड़ी निंदा की, 3 मृत, 36 घायल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 8 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए अलग-अलग हमलों की कड़ी निंदा की। सऊदी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई और 36 अन्य घायल हो गए। भारत ने इस संकट की घड़ी में सऊदी अरब की सरकार और जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की।
भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि आम नागरिकों से जुड़े स्थानों और बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। मंत्रालय ने उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की जिन्होंने अपने प्रियजनों को इन हमलों में खोया है, और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
मंत्रालय ने आगे कहा, 'हम इस कठिन समय में सऊदी अरब की जनता और सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।' यह बयान भारत-सऊदी अरब के बीच मज़बूत रणनीतिक और आर्थिक संबंधों की पृष्ठभूमि में आया है।
हमलों का विवरण
सऊदी जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन ने पुष्टि की कि मंगलवार और बुधवार को दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अलग-अलग हमलों में निशाना बनाया गया। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया और दोनों स्थानों पर संपत्ति को नुकसान पहुँचने की भी सूचना है।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने दावा किया कि किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई ड्रोनों से निशाना बनाया गया। साथ ही बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से अब्हा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तथा दक्षिण-पश्चिमी असीर इलाके में खामिस मुशैत के निकट स्थित किंग खालिद एयर बेस पर भी हमला किया गया।
गठबंधन की जवाबी कार्रवाई
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि उसने हूती विद्रोहियों की दो बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया — एक रियाद के उत्तर में और दूसरी खामिस मुशैत की ओर आ रही थी। इसके साथ ही सऊदी बलों ने अपने हवाई हमले भी तेज़ कर दिए हैं।
हूती समूह का दावा है कि सना, ताइज़, सादा, अल-जौफ, मारिब और अमरान में कुल 156 हवाई और मिसाइल हमले किए गए। यह आँकड़ा रिपोर्टों पर आधारित है और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि हाल की यह हिंसा 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के बाद सबसे बड़े तनाव के रूप में देखी जा रही है। उस संघर्षविराम के बाद युद्धग्रस्त यमन में बड़े पैमाने पर लड़ाई काफी हद तक थम गई थी, किंतु ताज़ा घटनाक्रम दर्शाता है कि टकराव फिर तेज़ हो रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में व्यापक भू-राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। भारत की यह तीखी प्रतिक्रिया उसकी 'नागरिकों की सुरक्षा' और 'आतंकवाद के विरुद्ध शून्य-सहिष्णुता' की स्थापित विदेश नीति के अनुरूप है।
आगे क्या होगा
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बात पर हैं कि क्या संयुक्त राष्ट्र एक बार फिर सक्रिय मध्यस्थता की भूमिका निभाएगा। भारत समेत कई देशों की निंदा के बाद कूटनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है, हालाँकि ज़मीनी संघर्ष में शीघ्र शांति की उम्मीद फिलहाल कम दिख रही है।