भारत-इजरायल सहयोग से पाकिस्तान में घबराहट, सीनेट का प्रस्ताव एक संकेत
सारांश
Key Takeaways
- भारत-इजरायल संबंधों में बढ़ती मजबूती
- पाकिस्तान की चिंता और घबराहट
- नेतन्याहू का हेक्सागन अलायंस का ऐलान
- रक्षा सहयोग का महत्व
- भारत का सुरक्षा पर जोर
नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्तमान में इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जहां उन्हें इजरायल का सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया है। इस यात्रा के दौरान भारत-इजरायल के संबंध और अधिक मजबूत हुए हैं, जिससे पाकिस्तान को एक बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की घबराहट उनके हालिया प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस दौरे के दौरान भारत और अन्य देशों के साथ एक क्षेत्रीय गठबंधन बनाने का उल्लेख किया, जिसे हेक्सागन अलायंस कहा जाएगा। यह बयान पाकिस्तान को चुभ रहा है, जिसके कारण उन्होंने नेतन्याहू के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है।
भारत और इजरायल के बीच रक्षा, व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। दोनों देशों ने एक सुरक्षा एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जो कि भारत में हथियारों के विकास पर केंद्रित है। इस समझौते के तहत आयरन डोम को भारत में इजरायल के सहयोग से विकसित किया जाएगा।
जुलाई 2017 में पीएम मोदी के इजरायल के पहले दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचा दिया गया था। हालिया दौरे से द्विपक्षीय संबंध और भी मजबूत हुए हैं। पीएम मोदी और पीएम नेतन्याहू के बीच भरोसे ने इस सहयोग को और भी मज़बूत किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-इजरायल संबंधों में मजबूती पाकिस्तान को परेशान कर रही है। 17 जून, 1999मिराज-2000 ने पाकिस्तान के घुसपैठियों को निशाना बनाया था।
लेजर गाइडेड बमों का उपयोग करके लक्ष्यों को भेदने के लिए भारतीय मिराज पर इजरायली लाइटनिंग पॉड्स का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा, बालाकोट में ऑपरेशन बंदर और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की मजबूती देखी गई।
भारत ने पाकिस्तान के आतंकी कैंपों को नष्ट करने के लिए इजरायली लोइटरिंग एम्युनिशन, लेजर गाइडेड बम और गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। कारगिल युद्ध के समय से, भारत हेरॉन-टीओ और सर्चर मार्क 11 जैसे इजरायली ड्रोन का उपयोग कर रहा है।
दोनों देशों द्वारा मिलकर हथियार प्रणाली विकसित करने के लिए हस्ताक्षरित नए एमओयू ने पाकिस्तान को चिंतित कर दिया है। इसके कारण ही नेतन्याहू के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ है।
इस प्रस्ताव में भारत-इजरायल और अन्य देशों के बीच तालमेल को क्षेत्र की शांति और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बताया गया है। इजरायल पर आरोप लगाया गया है कि वह मुस्लिम-बहुल देशों को अलग-थलग करने के लिए एक गुट बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत-इजरायल के निकटता ने न केवल पाकिस्तान के संसद में, बल्कि वहां की मीडिया के प्राइम टाइम में भी चर्चा का विषय बना दिया है। प्राइम टाइम की बहस भारत-इजरायल साझेदारी पर केंद्रित थी।
शो में शामिल मेहमान, पाकिस्तान-चीन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन मुशाहिद हुसैन सैयद और पूर्व डिप्लोमैट मलीहा लोधी ने इस साझेदारी की आलोचना की। उनका कहना है कि इस गठबंधन का उद्देश्य चीन और पाकिस्तान को तोड़ना है। इसके अलावा, यह भी कहा गया कि भारत-इजरायल साझेदारी मुस्लिम विरोधी और पाकिस्तान विरोधी है।
पाकिस्तान में भारत-इजरायल की साझेदारी को लेकर हुई हलचल पर एक अधिकारी ने कहा कि यह पाकिस्तान के दोगलेपन को दर्शाता है। एक तरफ यह भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी की आलोचना करता है, वहीं दूसरी तरफ हमास
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इससे पाकिस्तान का दोगलापन उजागर होता है। भारत की इज़रायल और रूस जैसे देशों के साथ डिफेंस पार्टनरशिप है, लेकिन उसने कभी भी हथियारों या तकनीक का उपयोग आक्रमणकारी के रूप में नहीं किया है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि रणनीतिक रक्षा साझेदारी का उद्देश्य पाकिस्तान के अस्थिर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अन्य देशों के साथ अपनी रक्षा साझेदारी का उपयोग आक्रमणकारी भूमिका निभाने के लिए किया है।
एक अधिकारी ने कहा कि इजरायल में पीएम मोदी का स्वागत और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों से पाकिस्तान चिंतित है, क्योंकि वह पश्चिम एशिया में बड़े वैश्विक राजनीतिक परिवर्तन को लेकर चिंतित हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की असहमति की मुख्य वजह यह है कि इजरायल भारत का मुख्य डिफेंस सप्लायर बनकर उभर रहा है।
भारत ने हमेशा कहा है कि इजरायल के साथ उसका रिश्ता राष्ट्रीय सुरक्षा और आपसी लाभ पर आधारित है। नई दिल्ली ने कहा है कि यह संबंध किसी देश के खिलाफ नहीं है।