तेल की कीमतों में बढ़ोतरी: अमेरिका-इजरायल और ईरान की स्थिति का प्रभाव, नेपाल-बांग्लादेश में बदलाव

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तेल की कीमतों में बढ़ोतरी: अमेरिका-इजरायल और ईरान की स्थिति का प्रभाव, नेपाल-बांग्लादेश में बदलाव

सारांश

काठमांडू, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव का असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों ने कीमतों में वृद्धि की है और राशनिंग शुरू कर दी है। जानिए, तेल की कीमतों में हो रहे बदलाव और इससे प्रभावित देशों के बारे में।

Key Takeaways

  • तेल की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव है।
  • नेपाल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।
  • बांग्लादेश में जेट फ्यूल की कीमत 80%25 बढ़ी है।
  • पेट्रोल स्टेशनों पर राशनिंग प्रक्रिया लागू की गई है।
  • पाकिस्तान और यूरोपीय देशों में भी तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है।

काठमांडू, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके चलते कई देशों ने तेल की कीमतें बढ़ा दी हैं और पेट्रोल स्टेशनों पर राशनिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वहां जेट फ्यूल की कीमतों में 80%25 की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (एनओसी) ने भी पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में इजाफा करने की जानकारी दी है।

एनओसी के अनुसार, नेपाल में पेट्रोल, केरोसीन, और डीजल की कीमतें प्रति लीटर 15 रुपए बढ़ाई गई हैं, जो कि आज आधी रात से लागू होंगी। पिछली बार कीमतों में परिवर्तन 15 मार्च को किया गया था। नए संशोधन के बाद, पेट्रोल की कीमतें अब पहली श्रेणी में 184.50 रुपए प्रति लीटर, दूसरी श्रेणी में 186 रुपए, और तीसरी श्रेणी में 187 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं।

इसी प्रकार, डीजल और केरोसीन की कीमतें पहली श्रेणी में 164.50 रुपए प्रति लीटर, दूसरी श्रेणी में 166 रुपए प्रति लीटर, और तीसरी श्रेणी में 167 रुपए प्रति लीटर निर्धारित की गई हैं। पहली श्रेणी में चराली, विराटनगर, जनकपुर, अमलेखगंज, भालबाड़ी, नेपालगंज, और बीरगंज शामिल हैं। सुर्खेत और डांग दूसरी श्रेणी में आते हैं, जबकि काठमांडू, पोखरा, और दीपायल तीसरी श्रेणी में हैं।

एनओसी ने यह स्पष्ट किया कि घरेलू पेट्रोलियम कीमतों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालिया बढ़ोतरी के अनुसार समायोजित करने के लिए यह वृद्धि आवश्यक थी।

दूसरी ओर, बांग्लादेशी समाचार पत्र द डेली स्टार के अनुसार, बांग्लादेश एनर्जी रेगुलेटरी कमीशन ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल संघर्ष के चलते वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव की वजह से कंज्यूमर स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में 80%25 की भारी बढ़ोतरी की है।

बांग्लादेश में घरेलू उड़ानों के लिए जेट फ्यूल की कीमत 112.41 टका से बढ़कर 202.29 टका प्रति लीटर हो गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट फ्यूल की कीमत 0.738 डॉलर (90.58 टका) प्रति लीटर से बढ़कर 1.3216 डॉलर (162.21 टका) प्रति लीटर हो गई है। अमेरिका में भी तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20-25%25 तक की वृद्धि हुई है। इसके अलावा, यूरोपीय देशों, विशेषकर जर्मनी में गैस और पेट्रोल की कीमतें 10-15%25 तक बढ़ गई हैं, और थाईलैंड में पेट्रोल स्टेशनों पर राशनिंग शुरू की गई है।

पेट्रोल स्टेशनों पर राशनिंग का अर्थ है कि ईंधन की बिक्री पर सीमाएँ निर्धारित करना। जब किसी देश में तेल की भारी कमी हो जाती है या कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती हैं, तो सरकार या पेट्रोल पंप मालिक यह नियम लागू करते हैं कि एक व्यक्ति एक बार में कितना तेल खरीद सकता है।

Point of View

बल्कि यह आम जनता की जिंदगी को भी प्रभावित कर रही है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई में इजाफा होगा, जो पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे देशों के लिए एक चुनौती है।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

तेल की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
तेल की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ बढ़ते तनाव का प्रभाव है।
नेपाल में पेट्रोल की नई कीमतें क्या हैं?
नेपाल में पेट्रोल की कीमतें पहली श्रेणी में 184.50 रुपए प्रति लीटर, दूसरी श्रेणी में 186 रुपए, और तीसरी श्रेणी में 187 रुपए हो गई हैं।
बांग्लादेश में जेट फ्यूल की कीमतों में कितनी वृद्धि हुई है?
बांग्लादेश में जेट फ्यूल की कीमतों में 80%25 की वृद्धि हुई है।
पेट्रोल स्टेशनों पर राशनिंग का क्या मतलब है?
पेट्रोल स्टेशनों पर राशनिंग का मतलब है कि ईंधन की बिक्री पर सीमाएँ निर्धारित करना।
क्या यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगी?
हाँ, यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है, खासकर उन देशों में जो तेल पर निर्भर हैं।
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