फ्रांस हिंसा पर ईरान का पलटवार: बाघेई ने मैक्रों को जनवरी वाले 'प्रदर्शन के अधिकार' के बयान की दिलाई याद
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 19 अक्टूबर 2026 को फ्रांस के कई शहरों में फैली अशांति, प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर तीखा कटाक्ष करते हुए उन्हें उनके अपने पुराने बयान की याद दिलाई। बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मैक्रों को संबोधित करते हुए पूछा कि ईरान और फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग पैमाना क्यों अपनाया जा रहा है।
दोहरे मानदंड का आरोप
बाघेई के अनुसार, जनवरी 2026 में जब ईरान में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तब मैक्रों ने 'बिना किसी डर और सजा के शांतिपूर्ण प्रदर्शन' का समर्थन किया था। ईरानी प्रवक्ता का दावा है कि उस दौरान प्रदर्शनकारी विदेशी उकसावे पर ईरानी पुलिस केंद्रों और सरकारी संस्थानों पर हमले कर रहे थे, फिर भी मैक्रों ने उनके प्रदर्शन के अधिकार का बचाव किया था।
अब जब फ्रांस खुद अशांति की आग में झुलस रहा है, तो मैक्रों का रुख बदल गया — उन्होंने कथित तौर पर कहा है कि सरकारी संस्थानों पर हमले और तोड़फोड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को जल्द सजा दी जाएगी। यही विरोधाभास बाघेई के निशाने पर है।
ईरान-विरोधी अभियान का संदर्भ
बाघेई ने यह भी आरोप लगाया कि मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को संदेश भेजकर कहा था कि 'हम ईरान के मामले में बड़े काम कर सकते हैं।' ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, इसका अर्थ यह निकला कि फ्रांस उन कदमों के साथ खड़ा था जिन्हें ईरान अपने खिलाफ एक आक्रामक अभियान मानता है। बाघेई ने आरोप लगाया कि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ा।
गौरतलब है कि ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक तनाव लंबे समय से चला आ रहा है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाते रहे हैं।
अमेरिका में 'नो किंग्स' का उल्लेख
बाघेई ने अपने बयान में अमेरिका में उठ रहे 'नो किंग्स' जैसे नारों का भी संदर्भ दिया और कहा कि जब संकट की लहर फ्रांस के अपने दरवाजे तक पहुँच गई है और इस तरह के नारे अमेरिका में भी गूंज रहे हैं, तो मैक्रों को इतिहास से सबक लेना चाहिए। उनका इशारा था कि पश्चिमी लोकतंत्रों में भी जनाक्रोश की लहरें उठ रही हैं।
ऐतिहासिक उद्धरण से चेतावनी
अपने संदेश में बाघेई ने लिखा, 'इतिहास सिर्फ खिड़की से खड़े होकर दुनिया को जलते हुए नहीं देखता। कभी-कभी वही आग उन लोगों के घर तक भी पहुँच जाती है जिन्होंने उसे भड़काने में भूमिका निभाई होती है।'
अपने संदेश के अंत में उन्होंने प्रसिद्ध फ्रांसीसी लेखक जीन डी ला फॉन्टेन का एक कथन उद्धृत किया: 'बहुत चालाकी से बनाई गई कोई तरकीब कभी-कभी उसी व्यक्ति के खिलाफ चली जाती है जिसने उसे बनाया हो, और विश्वासघात अक्सर अपने मालिक के पास लौटकर आता है।' यह तंज ईरान-फ्रांस संबंधों के मौजूदा तनाव की पृष्ठभूमि में और भी गहरा हो जाता है।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब फ्रांस में प्रदर्शन और हिंसा की खबरें वैश्विक सुर्खियाँ बन रही हैं, और ईरान ने कूटनीतिक मंच का उपयोग करते हुए पश्चिमी देशों के दोहरे मानदंडों पर सवाल खड़े किए हैं।