फ्रांस हिंसा पर ईरानी विदेश मंत्री अराघची का मैक्रों पर हमला, बोले — 'भविष्य की आवाज सुनिए'
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 19 अक्टूबर 2026 को फ्रांस में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर तीखा हमला बोला और कहा कि फ्रांस की जनता बड़े स्तर पर बदलाव चाहती है। अराघची ने आरोप लगाया कि यह संकट मैक्रों की अपनी नीतियों की देन है।
अराघची का एक्स पोस्ट — सीधा संदेश
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मैक्रों ने खुद ही यह स्थिति पैदा की थी, जब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को भरोसा दिलाया कि उन्हें ईरानियों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर कोई आपत्ति नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'अब उस युद्ध के लिए दूसरों को दोष देने में बहुत देर हो चुकी है, जिसे उनके जैसे लोगों ने पैदा करने में मदद की थी।' ईरानी मंत्री ने अपनी पोस्ट का अंत इन शब्दों से किया — 'फ्रांस की जनता बड़े स्तर पर बदलाव चाहती है, जिसमें शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अपनी बात रखने की आजादी भी शामिल है। मिस्टर राष्ट्रपति, फ्रांस के भविष्य की आवाज को सुनिए।'
फ्रांस में प्रदर्शनों की स्थिति
अराघची का यह बयान ऐसे समय में आया है जब फ्रांस के कई शहरों में व्यापक प्रदर्शन, हिंसा और झड़पों से माहौल गरम है। शनिवार को पूरे फ्रांस में करीब साढ़े पाँच लाख लोग सड़कों पर उतरे और कई जगहों पर स्थिति हिंसक हो गई।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, इन घटनाओं में 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 997 पुलिसकर्मी और सुरक्षाबल के सदस्य घायल हुए, जिनमें से सात की हालत गंभीर बताई गई है।
प्रदर्शनों के पीछे के कारण
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन प्रदर्शनों में किसान, जलवायु कार्यकर्ता, ट्रेड यूनियन सदस्य और छात्र शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से ईंधन की बढ़ती कीमतें, महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए। गौरतलब है कि फ्रांस में सामाजिक असंतोष की यह लहर कोई नई नहीं है — 'येलो वेस्ट' आंदोलन से लेकर पेंशन सुधारों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन तक, मैक्रों को अपने पूरे कार्यकाल में इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
मैक्रों की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि सरकार नागरिकों की क्रय शक्ति बढ़ाने और आम लोगों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। हालाँकि, विरोध प्रदर्शनों की व्यापकता यह दर्शाती है कि बड़े तबके ने इन आश्वासनों को अभी तक पर्याप्त नहीं माना है।
कूटनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है। आलोचकों का कहना है कि अराघची का यह बयान पश्चिमी सरकारों पर ईरान के व्यापक दबाव अभियान का हिस्सा है। फ्रांस में स्थिरता और जन-असंतोष को लेकर आने वाले दिनों में मैक्रों की नीतिगत प्रतिक्रिया ही यह तय करेगी कि यह संकट और गहरा होता है या शांत होता है।