ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने 48 घंटों में 12 देशों के समकक्षों से की बात, क्षेत्रीय सुरक्षा पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार और शुक्रवार के दौरान मात्र 48 घंटों में 12 देशों के अपने समकक्षों के साथ राजनयिक संपर्क स्थापित किया। इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक पोस्ट में अराघची ने इस राजनयिक संपर्क की जानकारी दी और बताया कि इन वार्ताओं में ईरान का 'मूल रुख' स्पष्ट किया गया।
किन देशों से हुई बातचीत
अराघची ने ओमान, मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब, कतर, साइप्रस, तुर्की, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, ट्यूनीशिया, इराक और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों और समकक्ष अधिकारियों से बातचीत की। तेहरान टाइम्स के अनुसार, गुरुवार को उन्होंने जॉर्डन के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अयमान सफादी, सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान, कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी, साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कॉम्बो, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान, कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार से संपर्क किया। शुक्रवार को उन्होंने इराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन और ट्यूनीशिया के विदेश मंत्री मोहम्मद अली नाफती से भी बातचीत की।
ईरान का मूल रुख और प्रमुख बिंदु
अराघची ने इन वार्ताओं में चार प्रमुख बिंदुओं पर ज़ोर दिया — देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान, हिंसा और धमकियों को रोकना, विनाशकारी विदेशी हस्तक्षेप से बचना और असुरक्षा को फैलने से रोकना। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि क्षेत्र में एक ऐसी सुरक्षा व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है जो क्षेत्र के बाहर की महाशक्तियों के हस्तक्षेप के बिना स्थापित हो सके।
पृष्ठभूमि: हूती हमले और सऊदी-ईरान तनाव
यह राजनयिक सक्रियता ऐसे समय में सामने आई है, जब मध्य-पूर्व में तनाव अपने उच्चतम बिंदु पर है। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, जुलाई में यमन में लड़ाई फिर से शुरू होने के बाद से ईरान समर्थित हूती सऊदी अरब के हवाई अड्डों, तेल सुविधाओं और बुनियादी ढाँचे पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले करते आए हैं। अक्टूबर में सऊदी हवाई अड्डों पर हुए हमलों में 20 लोग मारे गए और 350 से अधिक घायल हो गए।
गौरतलब है कि पिछले महीने सऊदी अधिकारियों ने ईरान पर हूती विद्रोहियों को उकसाने, हथियार मुहैया कराने, प्रशिक्षण देने और समर्थन देने का आरोप लगाया था। हालाँकि तेहरान ने इन हमलों में किसी भी संलिप्तता से इनकार किया है और कहा है कि हूती अपने सैन्य फैसले स्वयं लेते हैं।
राजनयिक प्रयासों का महत्व
इन वार्ताओं में क्षेत्र के ताज़ा घटनाक्रमों और तनाव कम करने तथा शांति व स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए राजनयिक प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद मध्य-पूर्व में नई शक्ति-समीकरण उभरने की संभावना है, और क्षेत्रीय देश अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं।
आगे की राह
इस व्यापक राजनयिक संपर्क के बाद अब नज़र इस बात पर टिकी है कि क्या ये वार्ताएँ ठोस राजनयिक परिणामों में बदलती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी-ईरान और हूती-यमन संघर्ष में स्थायी शांति के लिए बहुपक्षीय प्रारूप में अधिक ठोस प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता होगी।