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ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने 48 घंटों में 12 देशों के समकक्षों से की बात, क्षेत्रीय सुरक्षा पर बनी सहमति

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ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने 48 घंटों में 12 देशों के समकक्षों से की बात, क्षेत्रीय सुरक्षा पर बनी सहमति

सारांश

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने 48 घंटों में 12 देशों के समकक्षों से बात की — हूती हमलों और सऊदी-ईरान तनाव के बीच तेहरान ने क्षेत्रीय सुरक्षा का अपना खाका पेश करते हुए बाहरी हस्तक्षेप के बिना शांति-व्यवस्था बनाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार-शुक्रवार के 48 घंटों में 12 देशों के समकक्षों से संपर्क किया।
वार्ताओं में राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान, विदेशी हस्तक्षेप रोकने और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था बनाने पर ज़ोर दिया गया।
जिन देशों से बात हुई उनमें सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान, कतर, इराक और अन्य शामिल हैं।
अक्टूबर में हूती हमलों में सऊदी हवाई अड्डों पर 20 लोग मारे गए , 350 से अधिक घायल हुए।
सऊदी अरब ने ईरान पर हूतियों को हथियार और प्रशिक्षण देने का आरोप लगाया; ईरान ने संलिप्तता से इनकार किया।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार और शुक्रवार के दौरान मात्र 48 घंटों में 12 देशों के अपने समकक्षों के साथ राजनयिक संपर्क स्थापित किया। इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक पोस्ट में अराघची ने इस राजनयिक संपर्क की जानकारी दी और बताया कि इन वार्ताओं में ईरान का 'मूल रुख' स्पष्ट किया गया।

किन देशों से हुई बातचीत

अराघची ने ओमान, मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब, कतर, साइप्रस, तुर्की, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, ट्यूनीशिया, इराक और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों और समकक्ष अधिकारियों से बातचीत की। तेहरान टाइम्स के अनुसार, गुरुवार को उन्होंने जॉर्डन के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अयमान सफादी, सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान, कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी, साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कॉम्बो, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान, कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबा और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार से संपर्क किया। शुक्रवार को उन्होंने इराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन और ट्यूनीशिया के विदेश मंत्री मोहम्मद अली नाफती से भी बातचीत की।

ईरान का मूल रुख और प्रमुख बिंदु

अराघची ने इन वार्ताओं में चार प्रमुख बिंदुओं पर ज़ोर दिया — देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान, हिंसा और धमकियों को रोकना, विनाशकारी विदेशी हस्तक्षेप से बचना और असुरक्षा को फैलने से रोकना। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि क्षेत्र में एक ऐसी सुरक्षा व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है जो क्षेत्र के बाहर की महाशक्तियों के हस्तक्षेप के बिना स्थापित हो सके।

पृष्ठभूमि: हूती हमले और सऊदी-ईरान तनाव

यह राजनयिक सक्रियता ऐसे समय में सामने आई है, जब मध्य-पूर्व में तनाव अपने उच्चतम बिंदु पर है। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, जुलाई में यमन में लड़ाई फिर से शुरू होने के बाद से ईरान समर्थित हूती सऊदी अरब के हवाई अड्डों, तेल सुविधाओं और बुनियादी ढाँचे पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले करते आए हैं। अक्टूबर में सऊदी हवाई अड्डों पर हुए हमलों में 20 लोग मारे गए और 350 से अधिक घायल हो गए।

गौरतलब है कि पिछले महीने सऊदी अधिकारियों ने ईरान पर हूती विद्रोहियों को उकसाने, हथियार मुहैया कराने, प्रशिक्षण देने और समर्थन देने का आरोप लगाया था। हालाँकि तेहरान ने इन हमलों में किसी भी संलिप्तता से इनकार किया है और कहा है कि हूती अपने सैन्य फैसले स्वयं लेते हैं।

राजनयिक प्रयासों का महत्व

इन वार्ताओं में क्षेत्र के ताज़ा घटनाक्रमों और तनाव कम करने तथा शांति व स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए राजनयिक प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद मध्य-पूर्व में नई शक्ति-समीकरण उभरने की संभावना है, और क्षेत्रीय देश अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं।

आगे की राह

इस व्यापक राजनयिक संपर्क के बाद अब नज़र इस बात पर टिकी है कि क्या ये वार्ताएँ ठोस राजनयिक परिणामों में बदलती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी-ईरान और हूती-यमन संघर्ष में स्थायी शांति के लिए बहुपक्षीय प्रारूप में अधिक ठोस प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर हूती हमले उसी दौर में तेज़ हुए हैं — और सऊदी, ईरान की भूमिका को सीधे ज़िम्मेदार मानते हैं। इन वार्ताओं का असर तभी दिखेगा जब ईरान हूती कार्रवाइयों पर वास्तविक संयम लागू करे, न केवल उनसे दूरी बनाने का बयान दे।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने 48 घंटों में किन-किन देशों से बात की?
अराघची ने ओमान, मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब, कतर, साइप्रस, तुर्की, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, ट्यूनीशिया, इराक और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों या समकक्ष अधिकारियों से बातचीत की। यह संपर्क गुरुवार और शुक्रवार को किया गया।
इन वार्ताओं में ईरान का मुख्य रुख क्या था?
अराघची ने राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान, हिंसा और धमकियों को रोकने, विनाशकारी विदेशी हस्तक्षेप से बचने और असुरक्षा को फैलने से रोकने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने क्षेत्र के बाहर की महाशक्तियों के हस्तक्षेप के बिना एक क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था बनाने का आह्वान किया।
सऊदी अरब और ईरान के बीच मौजूदा तनाव का कारण क्या है?
जुलाई में यमन में लड़ाई फिर से शुरू होने के बाद से ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों और तेल सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज़ कर दिए हैं। अक्टूबर में इन हमलों में 20 लोग मारे गए और 350 से अधिक घायल हुए; सऊदी अरब ने ईरान को सीधा ज़िम्मेदार ठहराया है।
ईरान ने हूती हमलों में अपनी भूमिका के आरोपों पर क्या कहा?
तेहरान ने सऊदी अरब पर हुए हमलों में किसी भी संलिप्तता से इनकार किया है। ईरान का कहना है कि हूती विद्रोही अपने सैन्य फैसले स्वतंत्र रूप से लेते हैं।
इन राजनयिक वार्ताओं का मध्य-पूर्व की स्थिति पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अराघची की इस व्यापक राजनयिक पहल से तनाव कम करने की दिशा में संवाद का रास्ता खुल सकता है। हालाँकि स्थायी शांति के लिए बहुपक्षीय प्रारूप में ठोस प्रतिबद्धताओं और हूती कार्रवाइयों पर वास्तविक नियंत्रण की आवश्यकता होगी।
राष्ट्र प्रेस
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