ईरान-सऊदी विदेश मंत्रियों की फोन वार्ता, होर्मुज तनाव और अमेरिका-ईरान मध्यस्थता पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फोन पर बातचीत की, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता और तनाव कम करने की कूटनीतिक पहलों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। यह संवाद तेहरान से 3 जून को सामने आया, ऐसे समय जब होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा और अमेरिका-ईरान मध्यस्थता के प्रयास अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में हैं।
मुख्य घटनाक्रम
ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने क्षेत्रीय हालात और तनाव कम करने के लिए चल रही पहलों पर अपनी राय साझा की। बातचीत का केंद्र मुख्यतः खाड़ी क्षेत्र में स्थायित्व बहाल करने और कूटनीतिक चैनलों को सक्रिय रखने पर रहा।
कतर की भूमिका और चेतावनी
इससे पहले कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल-थानी ने भी अराघची से फोन पर बात की थी। रिपोर्टों के अनुसार दोनों नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों, तथा लेबनान की ताज़ा स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया।
अल-थानी ने कहा कि कतर इस संकट के समाधान के लिए एक व्यापक समझौते का समर्थन करता है, और सभी पक्षों से अपील की कि वे मध्यस्थता की कोशिशों में सकारात्मक रुख अपनाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता एक बुनियादी सिद्धांत है, जिससे समझौता नहीं किया जा सकता।
कतरी मंत्री ने चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना या उसे दबाव के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना क्षेत्रीय स्थिति को और गंभीर बना सकता है तथा क्षेत्र के देशों के महत्वपूर्ण हितों को नुकसान पहुँचा सकता है।
पृष्ठभूमि: 40 दिन का संघर्ष
गौरतलब है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। यह संघर्ष 40 दिनों तक चला और 7 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद रोक दिया गया।
हालाँकि, बाद में अमेरिका पर इस युद्धविराम के उल्लंघन के आरोप लगे और होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी के बाद ईरान से जुड़े जहाज़ों पर कथित तौर पर हमला किया गया। यही पृष्ठभूमि वर्तमान कूटनीतिक सक्रियता का आधार बनी है।
क्यों मायने रखती है यह बातचीत
ईरान और सऊदी अरब, जिनके बीच 2023 में चीन की मध्यस्थता से संबंध बहाल हुए थे, क्षेत्रीय शिया-सुन्नी ध्रुवीकरण के दो प्रमुख केंद्र रहे हैं। दोनों के बीच सीधी मंत्री-स्तरीय बातचीत यह संकेत देती है कि रियाद-तेहरान चैनल अभी भी सक्रिय है।
होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल आपूर्ति गुज़रती है, इसलिए इस मार्ग पर कोई भी व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए तत्काल चिंता का विषय बन जाता है।
आगे क्या
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान मध्यस्थता को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब की भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि वे होर्मुज में समुद्री सुरक्षा और व्यापक युद्धविराम ढाँचे पर कितनी तेज़ी से सहमति बना पाते हैं।