ईरान की कड़ी चेतावनी: अमेरिका का साथ देने वाले देशों को माना जाएगा 'शत्रु', ट्रंप ने भी दिए नए सैन्य कार्रवाई के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की संसदीय सुरक्षा समिति ने 23 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य में फिर से सैन्य संघर्ष छिड़ता है, तो वाशिंगटन का समर्थन करने वाले किसी भी क्षेत्रीय देश को तेहरान के विरुद्ध शत्रुतापूर्ण कदम उठाने वाला देश माना जाएगा। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ भविष्य में और सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।
ईरान की सीधी चेतावनी
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य फदा हुसैन मलिकी ने एक इंटरव्यू में कहा कि यदि सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होती है तो ईरान यह पहचानने में सक्षम होगा कि कौन-कौन से क्षेत्रीय देश अमेरिकी सेना का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।
मलिकी ने कहा, 'ऐसी स्थिति में ईरान के फैसले केवल उन देशों में मौजूद सैन्य ठिकानों पर हमले तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन देशों को भी शत्रु देश की श्रेणी में रखा जा सकता है।' यह बयान मध्य-पूर्व के उन देशों के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है जो अमेरिकी सैन्य अड्डों की मेज़बानी करते हैं।
अराघची का अमेरिका-इज़राइल संबंध पर तीखा बयान
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया कि अमेरिका ने पिछले तीन वर्षों में इज़राइल की मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए अपने करदाताओं के 11 अरब डॉलर खर्च किए हैं।
अराघची ने कहा, 'अमेरिका ने इज़राइल की रक्षा में इज़राइल से भी ज़्यादा इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी हैं। यह दोनों देशों के बीच परस्पर सहयोग वाला संबंध नहीं है, बल्कि एकतरफा निर्भरता वाला संबंध है।' उनके इस बयान को व्यापक रूप से अमेरिका-इज़राइल गठजोड़ पर ईरानी कूटनीतिक आक्रमण की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप के संकेत: और सैन्य कार्रवाई संभव
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ आगे भी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि इसका राजनीतिक असर आगामी संसदीय चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।
ट्रंप ने कहा, 'एक तरफ लोग इसका समर्थन करते हैं, क्योंकि मैं वह कर रहा हूँ जो पहले के राष्ट्रपतियों को करना चाहिए था, लेकिन दूसरी तरफ कुछ लोग इससे सहमत नहीं भी हो सकते हैं।' उन्होंने यह भी कहा, 'मुझे पता था कि इस फैसले की एक कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते।'
गौरतलब है कि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या वह किसी नए सैन्य अभियान पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं, संभावित लक्ष्य क्या हो सकते हैं या ऐसी कार्रवाई कब की जा सकती है।
ईरान का परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रुख और क्षेत्रीय तनाव
यह तनाव ऐसे समय में बढ़ रहा है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता बनी हुई है। ट्रंप ने कहा, 'ईरान के साथ युद्ध में हमने उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया है और हो सकता है कि हम इसे थोड़ा और आगे बढ़ाएं।' विश्लेषकों के अनुसार, मलिकी का बयान मध्य-पूर्व के सहयोगी देशों को अमेरिकी छत्रछाया से दूर रखने की ईरानी रणनीति का हिस्सा है।
यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी देश पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश में लगे हैं। ईरान की इस कड़ी चेतावनी से क्षेत्र में कूटनीतिक दबाव और बढ़ने की आशंका है।
आगे क्या होगा
फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से बातचीत के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। ट्रंप के बयानों की अनिश्चितता और ईरान की धमकियों के बीच मध्य-पूर्व में तनाव का नया दौर शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक रास्ता अभी भी खुला है।