मध्य-पूर्व में युद्ध का खतरा: अमेरिकी दूतावासों ने 10 देशों में नागरिकों को तत्काल सतर्कता की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी दूतावासों ने 2 अगस्त को मध्य-पूर्व के लगभग 10 देशों में अपने नागरिकों के लिए आपातकालीन सुरक्षा अलर्ट जारी किए, जिनमें क्षेत्र में तनाव बढ़ने की स्थिति में तत्काल प्रस्थान पर विचार करने या जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच हवाई हमलों का सिलसिला कुछ दिनों के विराम के बाद फिर से शुरू हो गया है।
किन देशों में जारी हुआ अलर्ट
इजरायल, जॉर्डन, इराक, मिस्र, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब सहित कई देशों में स्थित अमेरिकी दूतावासों ने अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर एक समान सुरक्षा अलर्ट प्रकाशित किए हैं। दूतावासों ने नागरिकों को उड़ानों के रद्द होने, हवाई क्षेत्र के अस्थायी बंद होने और यात्रा में संभावित व्यवधानों के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से तैयार रहने को कहा है।
मध्य-पूर्व से बाहर रह रहे अमेरिकी नागरिकों को भी इस क्षेत्र की यात्रा करने या यहाँ से होकर गुजरने की अपनी योजनाओं पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की सलाह दी गई है।
ईरान की जवाबी रणनीति
इसी दिन ईरान की अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने बताया कि ईरान ने अपने बुनियादी ढाँचे पर संभावित हमलों के जवाब में एक व्यापक रणनीतिक योजना तैयार कर ली है। तस्नीम के अनुसार, एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी मीडिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी बुनियादी ढाँचे पर संभावित हमलों की रिपोर्टों के मद्देनज़र यह योजना बनाई गई है।
कथित तौर पर इस रणनीति में इजरायल के महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे और मध्य-पूर्व में अमेरिकी ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की तैयारी शामिल है। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान समेत ईरान के अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिकों की मौत हो गई थी।
इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों तथा परिसंपत्तियों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाईं। साथ ही, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपनी निगरानी और नियंत्रण भी कड़ा कर दिया — जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है।
लाल सागर में नया मोर्चा
गौरतलब है कि इस व्यापक संघर्ष के बीच यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब से जुड़े घटनाक्रमों ने लाल सागर क्षेत्र में तनाव का एक नया मोर्चा खोल दिया है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक शिपिंग मार्ग पहले से ही दबाव में हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्रीय युद्ध के और विस्तार को लेकर गहरी चिंता में है।
आगे क्या
फ़िलहाल स्थिति अत्यंत अस्थिर बनी हुई है। अमेरिकी दूतावासों की एक साथ जारी चेतावनी इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन को निकट भविष्य में स्थिति के और बिगड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान के बढ़ते नियंत्रण का असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर भी पड़ सकता है।