श्रीलंका ने ईरानी तेल टैंकर के 27 बीमार नाविकों को चिकित्सा सहायता दी, गाले बंदरगाह से कोलंबो पहुँचाया
सारांश
मुख्य बातें
श्रीलंका के गाले बंदरगाह के पास खड़े ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर सवार 27 चालक दल सदस्य अचानक बीमार पड़ गए, जिसके बाद 25 अक्टूबर 2026 को श्रीलंकाई अधिकारियों ने उन्हें समुद्री रास्ते किनारे लाकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद श्रीलंकाई नौसेना ने दो नौकाएँ तैनात कर बीमार नाविकों को गाले बंदरगाह तक पहुँचाया और फिर उन्हें कोलंबो के एक निजी अस्पताल में भेजा गया।
मुख्य घटनाक्रम
दक्षिणी प्रांत के वरिष्ठ उप पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय ने पुष्टि की कि श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास लंगर डाले ईरानी टैंकरों पर 27 नाविक बीमार पड़े थे। शनिवार दोपहर उन्हें जहाजों से निकालकर राजधानी कोलंबो से लगभग 115 किलोमीटर दक्षिण में स्थित गाले के रास्ते किनारे लाया गया।
इसके बाद सभी बीमार नाविकों को आगे के उपचार के लिए कोलंबो के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। अधिकारियों ने इस कदम को मानवीय दायित्व करार दिया।
भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरानी तेल व्यापार और समुद्री परिवहन पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बनी हुई है। गाले बंदरगाह के पास ईरान के लगभग एक दर्जन खाली टैंकर खड़े हैं — एक ऐसी स्थिति जो अमेरिका के 'सेकेंडरी प्रतिबंधों' के जोखिम के कारण अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बनी हुई है।
गौरतलब है कि इससे पहले श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में फंसे ईरानी जहाजों की मदद करने से इनकार किया था, क्योंकि उसे अमेरिकी 'सेकेंडरी प्रतिबंधों' का खतरा था। इस बार चिकित्सा सहायता को अपवाद के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
मार्च की घटना से संबंध
यह ऐसे समय में हुआ है जब इस वर्ष मार्च में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत 'आईआरआईएस डेना' को डुबो दिया था, जिसमें 104 नाविक मारे गए थे। उस हमले के बाद श्रीलंकाई नौसेना ने उस युद्धपोत से 32 ईरानी नाविकों को बचाया था।
इसके अलावा ईरान का एक और नौसैनिक जहाज द्वीप के उत्तर-पूर्व में स्थित त्रिंकोमाली बंदरगाह पर सुरक्षित आश्रय की तलाश में पहुँचा था। इस प्रकार श्रीलंका अब ईरानी नौसैनिक और व्यापारिक बेड़े दोनों के लिए एक महत्त्वपूर्ण मानवीय पड़ाव बनता जा रहा है।
आम जनता और क्षेत्रीय प्रभाव
हिंद महासागर में ईरानी जहाजों की बढ़ती उपस्थिति और उनसे जुड़ी घटनाएँ क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर असर डाल रही हैं। आलोचकों का कहना है कि श्रीलंका की यह 'मानवीय' नीति उसे अमेरिकी और ईरानी दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक दबाव में डाल सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि श्रीलंका इन टैंकरों और उनके चालक दल को लेकर क्या दीर्घकालिक नीति अपनाता है, और क्या अमेरिका इस 'मानवीय' हस्तक्षेप पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देता है।