20 अक्टूबर 2026
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जयशंकर-रुबियो मुलाकात: भारत-अमेरिका साझेदारी में व्यापार, तकनीक और हिंद-प्रशांत पर नई एकजुटता

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जयशंकर-रुबियो मुलाकात: भारत-अमेरिका साझेदारी में व्यापार, तकनीक और हिंद-प्रशांत पर नई एकजुटता

सारांश

मुंबई में अमेरिकी आज़ादी की 250वीं सालगिरह के मौके पर जयशंकर ने रुबियो के सामने भारत-अमेरिका रिश्ते का पूरा कैनवास खींचा — बर्फ के व्यापार से लेकर क्वाड तक, और 26/11 के जख्म से लेकर तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण तक। साझा हित, साझा भविष्य का यह संदेश बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की रणनीतिक स्थिति को रेखांकित करता है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उपस्थिति में भारत-अमेरिका साझेदारी पर विस्तृत संबोधन दिया।
जयशंकर ने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा को द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताया।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को दोनों देशों के साझा हित के रूप में रेखांकित किया।
26/11 मुंबई हमले में 6 अमेरिकी नागरिकों की मौत का उल्लेख; रुबियो द्वारा ताज होटल स्मारक पर श्रद्धांजलि की सराहना।
तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण के अमेरिकी फैसले का स्वागत; आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर।
क्वाड, मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज पहल को बढ़ती साझेदारी के ठोस उदाहरण बताया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत-अमेरिका संबंधों को और गहरा करने का एकमात्र मार्ग साझा हितों का विस्तार है। यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान मुंबई में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित स्वागत समारोह में आया।

मुंबई में कार्यक्रम का संदर्भ

जयशंकर ने इस अवसर पर अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो, उनकी पत्नी, अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल और अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने मुंबई को भारत की वित्तीय राजधानी के साथ-साथ शिक्षा, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, सिनेमा, खेल और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि यह शहर दुनिया के लिए भारत का प्रवेश द्वार है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक वर्षगांठ का मुंबई में आयोजन विशेष महत्व रखता है।

ऐतिहासिक संबंधों की पड़ताल

जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों की जड़ें उजागर करते हुए कहा कि मुंबई और अमेरिका के बीच व्यापारिक संपर्क कभी बर्फ के व्यापार से शुरू हुआ था, जो आज वित्तीय, वाणिज्यिक और प्रौद्योगिकी सहयोग के केंद्र में आ गया है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद की शिकागो यात्रा, जनरल इलेक्ट्रिक के रिएक्टरों के माध्यम से शहर की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने, स्टारबक्स का पहला भारतीय आउटलेट मुंबई में खुलने और अमेरिकी क्रिकेटर सौरभ नेत्रवलकर के मुंबई से जुड़ाव जैसे उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई अमेरिकियों ने समर्थन दिया था और आज़ादी के बाद बुनियादी ढाँचे, खाद्य, कृषि व तकनीक में अमेरिकी साझेदारी ने भारत के विकास में अहम भूमिका निभाई।

26/11 और आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता

विदेश मंत्री ने 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमले का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस हमले में छह अमेरिकी नागरिकों की भी जान गई थी। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो द्वारा मुंबई के ताज होटल स्थित 26/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने की सराहना की। जयशंकर ने तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण के अमेरिकी फैसले का भी स्वागत करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा के अधिकार को लेकर बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत के सभी साझेदार आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएंगे।

सहयोग के नए आयाम

जयशंकर ने क्वाड, मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज पहल को बढ़ती द्विपक्षीय साझेदारी के प्रमुख उदाहरण बताया। उन्होंने ऊर्जा, रक्षा और नागरिक उड्डयन क्षेत्रों में हुई प्रगति को उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में दोनों देशों का साझा हित है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद रहे हैं, विशेषकर वैश्विक चुनौतियों से निपटने के तरीकों को लेकर, फिर भी संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं।

आगे की राह

जयशंकर ने रुबियो की भारत यात्रा और दिन में हुई चर्चाओं को महत्वपूर्ण बताया तथा कहा कि व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा में सहयोग के नए अवसर मौजूद हैं। अंत में उन्होंने अमेरिका को उसकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ की शुभकामनाएं दीं और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यवस्था पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है और दोनों लोकतांत्रिक देशों की सामरिक निकटता नई परीक्षाओं के बीच और अधिक प्रासंगिक होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हितों की भाषा में परिभाषित करती है। तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को सार्वजनिक स्वागत देना इस संदेश को पाकिस्तान तक भेजने की सोची-समझी चाल लगती है। साथ ही यह उल्लेखनीय है कि जयशंकर ने मतभेदों को स्वीकार करते हुए भी संबंधों की मज़बूती का दावा किया — यह संतुलन भारत की 'स्वायत्त रणनीतिक स्वायत्तता' के सिद्धांत की झलक है। असली परीक्षा यह होगी कि व्यापार और प्रौद्योगिकी में घोषित 'नए अवसर' ठोस समझौतों में बदलते हैं या वक्तव्यों तक सीमित रहते हैं।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने मुंबई में अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस समारोह में क्या कहा?
विदेश मंत्री जयशंकर ने 20 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारत और अमेरिका को अपने संबंधों को गहरा करने के लिए व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा में साझा हितों का विस्तार करना होगा। उन्होंने हिंद-प्रशांत में स्थिरता, 26/11 न्याय और तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण जैसे विषयों पर भी अपनी बात रखी।
मार्को रुबियो की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या था?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत यात्रा पर आए और उन्होंने मुंबई में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में भाग लिया। जयशंकर ने इस यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों की पहचान की गई।
तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण पर भारत की क्या प्रतिक्रिया है?
विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी प्रशासन के तहव्वुर हुसैन राणा को भारत प्रत्यर्पित करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा के अधिकार को लेकर स्पष्ट है और उम्मीद जताई कि सभी साझेदार देश जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएंगे।
भारत-अमेरिका संबंधों में क्वाड और अन्य पहलों की क्या भूमिका है?
जयशंकर ने क्वाड, मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज पहल को दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के ठोस उदाहरण बताया। उन्होंने ऊर्जा, रक्षा और नागरिक उड्डयन क्षेत्रों में हुई प्रगति को भी उल्लेखनीय करार दिया।
मुंबई और अमेरिका के ऐतिहासिक संबंधों के बारे में जयशंकर ने क्या बताया?
जयशंकर ने बताया कि मुंबई और अमेरिका के बीच संपर्क कभी बर्फ के व्यापार से शुरू हुआ था और आज यह वित्तीय, वाणिज्यिक और तकनीकी सहयोग का केंद्र बन चुका है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद की शिकागो यात्रा, जनरल इलेक्ट्रिक, स्टारबक्स के पहले भारतीय आउटलेट और क्रिकेटर सौरभ नेत्रवलकर जैसे उदाहरणों से इस रिश्ते की गहराई दर्शाई।
राष्ट्र प्रेस
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