किम जोंग उन नए यालू नदी पुल से पहुंचे डांडोंग, चीनी PM ली छियांग से मुलाकात की खबर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन शनिवार, 24 अक्टूबर को चीन के सीमावर्ती शहर डांडोंग पहुंचे — एक साल से अधिक समय में उनका यह पहला ज्ञात विदेश दौरा बताया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई सूत्रों के अनुसार, किम ने नए अमनोक (यालू) नदी पुल को पार कर चीन के लियाओनिंग प्रांत में प्रवेश किया। कथित तौर पर चीन के प्रधानमंत्री ली छियांग भी डांडोंग पहुंचे और उन्होंने किम का स्वागत किया, हालांकि शनिवार शाम तक न तो बीजिंग और न ही प्योंगयांग ने इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि की थी।
यात्रा का मार्ग और नया पुल
दक्षिण कोरियाई समाचार स्रोतों के अनुसार, किम ने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से ट्रेन के जरिए सिनुइजू तक यात्रा की और वहाँ से नए पुल को पार कर डांडोंग पहुंचे। लगभग तीन किलोमीटर लंबा और चार लेन वाला यह नया यालू नदी पुल 15 अक्टूबर को खोला गया था। चीन ने इसका निर्माण 2014 में ही पूरा कर लिया था, लेकिन उत्तर कोरिया की ओर संपर्क सड़क और सीमा शुल्क सुविधाओं का काम अधूरा रहने के कारण इसे वर्षों तक इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका।
यह पुल डांडोंग और सिनुइजू को जोड़ता है और पुराने चीन-उत्तर कोरिया मैत्री पुल पर यातायात का दबाव कम करने में सहायक होगा। इससे दोनों देशों के बीच माल परिवहन, व्यापार और सीमा पार संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
दौरे की पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब चीन 25 अक्टूबर को 1950-53 के कोरियाई युद्ध में अपनी सेना की भागीदारी की वर्षगांठ मनाने की तैयारी में था। गौरतलब है कि चीन ने उस युद्ध में उत्तर कोरिया की ओर से अमेरिकी नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र सेना के खिलाफ अपनी सेना भेजी थी। 1953 में युद्धविराम के साथ लड़ाई थमी, लेकिन कोरियाई प्रायद्वीप में औपचारिक शांति समझौता आज तक नहीं हो पाया है।
इससे पहले किम ने सितंबर 2025 में चीन का दौरा किया था, जब उन्होंने बीजिंग में एक सैन्य परेड में भाग लिया था। उस अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी उपस्थित थे। इस बार का दौरा नए पुल के उद्घाटन के ठीक बाद हुआ है, जिसे दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
चीन-उत्तर कोरिया आर्थिक संबंध
चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रमुख आर्थिक सहयोगी रहा है। उत्तर कोरिया के बाहरी व्यापार का बड़ा हिस्सा चीन पर निर्भर है। नए पुल से व्यापारिक गतिविधियों को और गति मिलने की संभावना है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ी चुनौतियाँ व्यापार विस्तार की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।
रूस से बढ़ती नज़दीकी के बीच चीन से पुनर्संपर्क
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया ने रूस के साथ अपने सैन्य और आर्थिक संबंधों को व्यापक बनाया है। यूक्रेन युद्ध के दौरान प्योंगयांग और मॉस्को के बीच सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसी के साथ, चीन के साथ पारंपरिक संबंधों को फिर से प्रगाढ़ करने की कोशिशें भी जारी हैं। विश्लेषकों के अनुसार, किम का यह दौरा बीजिंग को यह संदेश देने का भी प्रयास हो सकता है कि प्योंगयांग अपनी कूटनीतिक साझेदारियों में संतुलन बनाए रखना चाहता है।
आगे क्या
दक्षिण कोरियाई सूत्रों के अनुसार, किम के शनिवार को ही उत्तर कोरिया लौटने की संभावना थी, हालांकि उनके प्रवास की अवधि स्पष्ट नहीं थी। दोनों देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार बना हुआ था। नए पुल के उद्घाटन और इस दौरे को मिलाकर देखें तो यह स्पष्ट है कि चीन-उत्तर कोरिया संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है, जिसकी दिशा आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगी।