यालू नदी पर चीन-डीपीआरके का नया पुल खुला, ली छ्यांग बोले — द्विपक्षीय मैत्री का नया प्रतीक
सारांश
मुख्य बातें
चीन और उत्तर कोरिया (डीपीआरके) के बीच यालू नदी पर बना बहुप्रतीक्षित नया सीमा-पार पुल गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रूप से यातायात के लिए खोल दिया गया। दोनों देशों ने इस पुल का संयुक्त उद्घाटन किया, जिसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह पुल पूर्वोत्तर चीन के ल्याओनिंग प्रांत के तानतोंग शहर को डीपीआरके के उत्तरी प्योंगान प्रांत के सिनुइजू शहर से जोड़ता है।
उद्घाटन समारोह और नेताओं के संबोधन
इस समारोह में चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने वीडियो के जरिए संबोधन किया। उन्होंने कहा कि यह पुल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव शी चिनफिंग और डीपीआरके की श्रमिक पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव किम जोंग-उन की साझा चिंता और प्रयासों से आगे बढ़ाई गई एक महत्वपूर्ण सीमा-पार बुनियादी ढाँचा परियोजना है। उन्होंने कहा कि यह पुल चीन-डीपीआरके की पारंपरिक मैत्री का नया प्रतीक बनेगा।
ली छ्यांग ने यह भी रेखांकित किया कि इस पुल के खुलने से दोनों देशों के आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग को बल मिलेगा, लोगों का आवागमन बढ़ेगा और दोनों देशों की जनता के बीच भावनात्मक संबंध और मजबूत होंगे। उन्होंने दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे सीमा शुल्क निकासी को लगातार अनुकूलित करें, कनेक्टिविटी का स्तर बढ़ाएँ और सीमावर्ती क्षेत्रों में सहयोग की क्षमता का दोहन करें। डीपीआरके के कैबिनेट प्रधानमंत्री पाक थे-सोंग ने भी वीडियो के माध्यम से समारोह को संबोधित किया।
पुल की संरचना और तकनीकी विशेषताएँ
यह एक केबल-स्टेड पुल है जिसमें डबल-पायलन और डबल-केबल-प्लेन डिज़ाइन अपनाया गया है। पुल के डेक की चौड़ाई 28.5 मीटर है और इसे चार लेन के साथ दो-तरफ़ा यातायात के लिए तैयार किया गया है। नौवहन के लिए 3,000 टन श्रेणी का मानक अपनाया गया है, जो पुराने पुल की तुलना में कहीं अधिक क्षमता प्रदान करता है।
पुराने पुल की सीमाएँ और नए पुल की जरूरत
इससे पहले यालू नदी पर जो पुल था — जिसे चीन-डीपीआरके मैत्री पुल भी कहा जाता है — वह एक संयुक्त सड़क-रेल पुल था। गौरतलब है कि वह पुराना पुल एकतरफ़ा सड़क यातायात के लिए केवल 20 टन से अधिक वज़न वाले ट्रकों को ही समायोजित कर सकता था, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक परिवहन पर गंभीर बाधाएँ थीं। इसी पृष्ठभूमि में 2010 में चीन और डीपीआरके ने पुराने पुल के नीचे की ओर एक नया सड़क पुल बनाने पर सहमति जताई थी।
रणनीतिक और द्विपक्षीय महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब चीन-डीपीआरके संबंध, दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में, एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं — ऐसा चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने स्वयं कहा। ली छ्यांग ने यह भी उल्लेख किया कि चीन, डीपीआरके के साथ मिलकर रणनीतिक संवाद मजबूत करने, राजनीतिक विश्वास सुदृढ़ करने, व्यावहारिक सहयोग विस्तार करने और बहुपक्षीय समन्वय घनिष्ठ बनाने की दिशा में काम जारी रखेगा। यह पुल केवल एक बुनियादी ढाँचा परियोजना नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से उत्तर-पूर्व एशिया में चीन की कनेक्टिविटी रणनीति का हिस्सा भी है। आने वाले महीनों में इस पुल के माध्यम से व्यापार और लोगों के आवागमन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।