मार्को रुबियो की भारत यात्रा की संभावना, विक्रम मिसरी से हुई महत्वपूर्ण बैठक
सारांश
Key Takeaways
- मार्को रुबियो की भारत यात्रा की संभावना बढ़ी।
- विक्रम मिसरी और रुबियो के बीच बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
- भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिली।
- बैठक में रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
वाशिंगटन, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले महीने भारत के दौरे की योजना बना रहे हैं। इस बात का संकेत तब मिला जब उन्होंने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ व्हाइट हाउस में एक सकारात्मक चर्चा की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने की बात हुई।
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस जानकारी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किया। उन्होंने कहा कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना था। विशेष रूप से व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा सहयोग और क्वाड जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने यह भी कहा, "सेक्रेटरी रुबियो अगले महीने भारत आने के लिए उत्साहित हैं।"
विक्रम मिसरी की वाशिंगटन यात्रा में रुबियो के साथ यह मुलाकात अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इससे भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी के लगातार मजबूत होते संबंधों की झलक भी मिली।
इस दौरान अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने भी विक्रम मिसरी से मुलाकात की। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी को फिर से दोहराया और पर्शियन गल्फ सहित वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की।
इसके अतिरिक्त, विक्रम मिसरी ने राजनीतिक मामलों की अंडर सेक्रेटरी एलिसन हुकर से भी बातचीत की। इस दौरान पिछले साल दिसंबर में हुई विदेश कार्यालय परामर्श बैठक के बाद द्विपक्षीय एजेंडे की प्रगति की समीक्षा की गई।
आर्थिक और तकनीकी सहयोग भी इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा। विक्रम मिसरी ने आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग से मुलाकात की, जिसमें एआई, क्रिटिकल मिनरल्स और 'पैक्स सिलिका' जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
अपनी यात्रा के दौरान विक्रम मिसरी ने वाशिंगटन के थिंक टैंक्स और रणनीतिक विशेषज्ञों से भी चर्चा की। इन चर्चाओं में भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य, वैश्विक चुनौतियों और बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्यों पर विस्तार से विचार किया गया।