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क्या पाकिस्तान में चर्च पर हमले ने ईसाइयों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया?

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क्या पाकिस्तान में चर्च पर हमले ने ईसाइयों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया?

सारांश

पाकिस्तान में चर्च पर हुए हमले ने ईसाई समुदाय में असुरक्षा की भावना को बढ़ा दिया है। धार्मिक नेता और समुदाय के प्रतिनिधि सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने स्थानीय लोगों में गहरा असर डाला है। क्या यह घटना धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठाती है?

मुख्य बातें

पाकिस्तान में चर्च पर हमला ईसाई समुदाय में भय धार्मिक नेताओं की सुरक्षा की मांग भेदभाव का सामना करने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक स्थानीय लोगों पर हमला का बुरा असर

इस्लामाबाद, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रायविंड क्षेत्र में एक चर्च पर हाल ही में हमला हुआ है। इस घटना ने पाकिस्तान में निवास करने वाले ईसाई समुदाय में भय पैदा कर दिया है। एक व्यक्ति ने चर्च में जबर्दस्ती घुसकर तोड़फोड़ की।

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि धार्मिक नेताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए कड़ी सुरक्षा और नफरत से प्रेरित कार्य करने वालों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (एफआईआर) के अनुसार, हमलावर ने गैर-कानूनी तरीके से चर्च में घुसकर बिल्डिंग को नुकसान पहुंचाया। इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न की रिपोर्ट के मुताबिक, कई खिड़कियां तोड़ी गईं, फर्नीचर को उलट दिया गया और पवित्र वस्तुएं जैसे बाइबिल और पूजा की किताबें फाड़कर फेंकी गईं

इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न ने कहा, "हमले के बाद चर्च की स्थिति देखकर स्पष्ट रूप से गुस्सा और नफरत दिखाई दे रही थी। स्थानीय ईसाईयों ने इसे दिल दहला देने वाला बताया। घटना के समय कोई मौजूद नहीं था, लेकिन इसका बुरा असर आसपास के लोगों पर पड़ा।"

इस मामले में प्रारंभ में अनजान व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जांच के बाद पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है, जो अब पुलिस कस्टडी में है और उससे पूछताछ की जा रही है।

इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न रिपोर्ट में कहा गया है, "ईसाई समुदाय के लिए, पवित्र वस्तुओं का तोड़ना सिर्फ संपत्ति का नुकसान नहीं है; यह उनके विश्वास, पहचान, और धर्म का पालन करने के अधिकार पर हमला है। खासकर नए साल की शुरुआत में, स्थानीय ईसाई अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।"

धार्मिक नेताओं और प्रतिनिधियों ने पूजा स्थलों की सुरक्षा और नफरत फैलाने वालों की जवाबदेही की मांग की है।

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है और उन्हें ईशनिंदा के झूठे आरोपों, भीड़ की हिंसा, लक्षित हत्याओं, और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन जैसे मामलों में फंसाया जाता है।

इससे पहले, 26 दिसंबर 2025 को, सिंध प्रांत से एक 15 साल की हिंदू लड़की के प्रेमी को किडनैप करने का मामला आया था। लड़की का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराकर उसे इस्लाम में परिवर्तित किया गया।

श्रीलंका गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, 6 दिसंबर 2025 को कराची के शेरशाह इलाके में हथियारबंद लोगों ने एक हिंदू महिला और उसकी नाबालिग बेटी को किडनैप कर लिया।

इसी तरह, 5 दिसंबर 2025 को पंजाब के गुजरांवाला में हथियारबंद लोगों ने एक पादरी को गोली मारकर हत्या कर दी।

10 अक्टूबर 2025 को पंजाब के चिनाब नगर में अहमदिया पूजा स्थल को निशाना बनाया गया, जिसमें कई नमाज पढ़ने वाले घायल हो गए।

अमेरिकी कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को सिस्टमेटिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति क्या है?
पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को भेदभाव, ईशनिंदा के झूठे आरोपों और लक्षित हत्याओं का सामना करना पड़ता है।
हालिया चर्च हमले का क्या कारण है?
यह हमला धार्मिक नफरत और असहिष्णुता का परिणाम है, जो पाकिस्तान में बढ़ती जा रही है।
ईसाई समुदाय ने सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
ईसाई समुदाय ने धार्मिक नेताओं के माध्यम से पूजा स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने और हमलावरों की जवाबदेही की मांग की है।
राष्ट्र प्रेस
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