क्या केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एनवीडिया के साथ भारत में जीपीयू निर्माण पर चर्चा की?
सारांश
Key Takeaways
- भारत में जीपीयू निर्माण की संभावनाएँ बढ़ रही हैं।
- एनवीडिया के साथ साझेदारी से तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
- एज डिवाइस डेटा को तेजी से प्रोसेस करने में मदद करेंगे।
- सरकार ने 12 अरब डॉलर की फंडिंग की घोषणा की है।
- डीप-टेक स्टार्टअप्स को निवेश प्राप्त करना आसान होगा।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विश्व की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया की टीम से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने देश में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) बनाने और डीजीएक्स स्पार्क जैसे एज डिवाइस विकसित करने पर चर्चा की।
एज डिवाइस वे हार्डवेयर उपकरण हैं, जैसे कि सेंसर, कैमरे और राउटर, जिन्हें नेटवर्क में डेटा उत्पन्न करने के स्थान के निकट स्थापित किया जाता है। ये उपकरण जानकारी को वहीं प्रोसेस करते हैं और आवश्यकतानुसार क्लाउड या डेटा सेंटर तक भेजते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत में विकसित होने वाले ये उपकरण तेज गति से कार्य करने में सक्षम होंगे। ये डिवाइस 200 अरब पैरामीटर तक के बड़े मॉडल पर सुरक्षित रूप से काम करने की क्षमताएँ रखेंगे और इन्हें इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि ये छोटे और शक्तिशाली जीपीयू रेलवे, शिपिंग, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा और दूरदराज के क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोगी सिद्ध होंगे।
एनवीडिया ने पहले ही भारतीय और अमेरिकी निवेशकों के साथ मिलकर भारत के डीप-टेक क्षेत्र को समर्थन देने की योजना की घोषणा की थी। इसके तहत इंडिया डीप टेक एलायंस ने 850 मिलियन डॉलर से अधिक की नई पूंजी जुटाने की जानकारी दी।
यह एलायंस सितंबर में 1 अरब डॉलर के प्रारंभिक फंड के साथ स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर, एआई, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में कार्यरत स्टार्टअप्स की सहायता करना है।
भारत सरकार ने भी उन्नत तकनीक से जुड़े अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करने के लिए 12 अरब डॉलर की फंडिंग की घोषणा की है। इससे भारत धीरे-धीरे सेवाओं पर आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर निर्माण और नवाचार का केंद्र बन रहा है।
इससे डीप-टेक स्टार्टअप्स को निवेश प्राप्त करना सरल हो रहा है, जिससे उनके लंबे शोध और लाभ को लेकर चिंताएँ कम हो रही हैं।
अश्विनी वैष्णव ने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले 12 भारतीय स्टार्टअप्स के साथ एक बैठक की, जो जिम्मेदार, समावेशी और वैश्विक स्तर पर एआई तकनीक पर कार्य कर रहे हैं।
ये स्टार्टअप्स ई-कॉमर्स, मार्केटिंग, इंजीनियरिंग, सामग्री अनुसंधान, स्वास्थ्य और चिकित्सा शोध जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नई तकनीक विकसित कर रहे हैं।