क्या पाकिस्तान में ऐतिहासिक सिख तीर्थ स्थल की हालत चिंताजनक है?

Click to start listening
क्या पाकिस्तान में ऐतिहासिक सिख तीर्थ स्थल की हालत चिंताजनक है?

सारांश

इस्लामाबाद में एक नई रिपोर्ट में पाकिस्तान में हिंदू और सिख धार्मिक स्थलों की खराब स्थिति की ओर इशारा किया गया है। क्या पाकिस्तान में सिख धरोहर सुरक्षित है? जानिए इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट में।

Key Takeaways

  • 1947 के विभाजन के बाद कई धार्मिक स्थल जर्जर हो गए हैं।
  • गुरुद्वारा शहीद गंज अब अवैध कब्जे में है।
  • सिखों की पहचान और स्मृति पर गंभीर खतरा है।

इस्लामाबाद, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान में शामिल हुए कई हिंदू और सिख धार्मिक स्थल अत्यंत खराब स्थिति में हैं। शुक्रवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कई हिंदू और सिख धार्मिक स्थल जर्जर हो चुके हैं और कुछ तो पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं। लाहौर में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा शहीद गंज भाई तारू सिंह भी इस स्थिति का शिकार हुआ है।

लगभग 250 साल पहले स्थापित यह पवित्र सिख तीर्थ अब बंद पड़ा है और लाहौर के एक व्यस्त बाजार में दुकानों और दीवारों के पीछे छिपा हुआ है। गुरुद्वारे की अधिकांश भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "भाई तारू सिंह की शहादत को विशेष रूप से याद किया जाता है। जब उन्होंने अपने धर्म पर अडिग रहते हुए अपने बाल कटवाने से इनकार किया, तो क्रूर मुगल शासन ने उनके सिर को काटने का आदेश दिया। मुगल शासन के दौरान उनकी दृढ़ भक्ति के लिए उन्हें क्रूर यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने अपनी आस्था से समझौता करने के बजाय मृत्यु को चुना।"

इस गुरुद्वारे को उनकी शहादत स्थली पर बनाया गया था, जहाँ दुनिया भर के सिख प्रार्थना, चिंतन और उनकी कुर्बानी से प्रेरणा लेने आते हैं।

रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि सिख अब इस पवित्र स्थल के केवल एक छोटे हिस्से तक ही पहुँच पाते हैं, क्योंकि इसका अधिकांश हिस्सा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। दुकानों ने गुरुद्वारे के मैदान पर कब्जा कर लिया है, दीवारें श्रद्धालुओं के रास्ते में बाधा बन रही हैं और स्थल को ऐसी संरचनाओं से घेर लिया गया है, जिनका सिख समुदाय से कोई संबंध नहीं है।

यह न केवल पाकिस्तान में सिख धरोहर पर हमला है, बल्कि विश्व भर में सिखों की सामूहिक स्मृति, सम्मान और आध्यात्मिक पहचान पर भी आघात है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अफसोस की बात है कि विदेशों में बैठे खालिस्तानी इस मुद्दे को नहीं देखते या शायद जानबूझकर अनदेखा करते हैं। यदि वे इस अपवित्रीकरण के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तो पाकिस्तान से मिलने वाली वित्तीय सहायता बंद हो जाएगी, जो उनके तथाकथित 'आंदोलन' को जीवित रखती है।

Point of View

बल्कि यह हमारे समाज की विविधता और सहिष्णुता पर भी सवाल उठाती है। हमें अपने ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

क्या पाकिस्तान में सिख धार्मिक स्थल सुरक्षित हैं?
नहीं, रिपोर्ट के अनुसार, कई सिख धार्मिक स्थल जर्जर हालत में हैं और अवैध रूप से कब्जा कर लिए गए हैं।
गुरुद्वारा शहीद गंज भाई तारू सिंह का क्या हुआ?
यह गुरुद्वारा अब बंद पड़ा है और इसकी अधिकांश भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है।
रिपोर्ट में सिखों की पहचान पर क्या असर बताया गया है?
रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति सिखों की सामूहिक स्मृति और आध्यात्मिक पहचान पर आघात कर रही है।