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पाकिस्तान: प्राइवेट स्कूलों ने कमजोर वर्ग के छात्रों से किया वादा तोड़ा, स्कॉलरशिप कोटा का उल्लंघन

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पाकिस्तान: प्राइवेट स्कूलों ने कमजोर वर्ग के छात्रों से किया वादा तोड़ा, स्कॉलरशिप कोटा का उल्लंघन

सारांश

इस्लामाबाद में प्राइवेट स्कूलों द्वारा 10 प्रतिशत स्कॉलरशिप कोटा की अनदेखी ने गंभीर चिंता पैदा की है। इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है, जो निशुल्क शिक्षा के अधिकार पर आधारित है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और इसके संभावित परिणाम।

मुख्य बातें

पाकिस्तान में 10 प्रतिशत स्कॉलरशिप कोटा का उल्लंघन किया जा रहा है।
प्राइवेट स्कूलों ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को वंचित किया है।
इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है।
पाकिस्तान में शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।
साक्षरता दर में लैंगिक असमानता स्पष्ट है।

इस्लामाबाद, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्राइवेट स्कूलों ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत स्कॉलरशिप कोटा को अनदेखा किया है। इस मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि यह देश में लागू 'निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार एक्ट, 2012' के तहत आवश्यक है।

विशेषज्ञों की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये शैक्षणिक संस्थान हर वर्ष लगभग 5 से 6 अरब पाकिस्तानी रुपये (पीकेआर) का लाभ गैर-कानूनी तरीके से कमा रहे हैं।

पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के संपादकीय में स्कूलों की मनमानी की पूरी कहानी दर्शाई गई है। इसमें बताया गया कि स्कॉलरशिप कोटा की स्थापना का उद्देश्य कमजोर तबकों के प्रतिभाशाली छात्रों को लाभ पहुंचाना था ताकि उनकी भविष्य की जिंदगी में सुधार हो सके।

संपादकीय में कहा गया है, "एक अनुमान के अनुसार, अब तक लगभग 38,900 छात्र इस अधिकार से वंचित रह गए हैं। (तंज कसा) अगर इन प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई इसी गति से जारी रही, तो यह संख्या बढ़ने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, केवल स्कॉलरशिप कोटा इस नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। इन प्राइवेट संस्थानों को अवैध तरीके से अर्जित सभी धनराशि वापस करने और उन छात्रों को मुआवजा देने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए, जिन्होंने शिक्षा के महत्वपूर्ण अवसर गंवाए हैं।"

पिछले महीने एक रिपोर्ट में पाकिस्तान की दयनीय शैक्षिक स्थिति का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया कि 5 से 16 वर्ष के लगभग 28 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। चिंताजनक बात यह है कि लड़कियों की अनुपात अधिक है; 22 प्रतिशत लड़कों के मुकाबले 34 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जा पाती हैं। यह स्थिति पाकिस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलती है, जहां लैंगिक असमानता स्पष्ट रूप से नजर आती है।

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने गैलप पाकिस्तान के एचआईईएस सर्वे का संदर्भ देते हुए बताया कि 10 वर्ष और उससे अधिक उम्र के दो-तिहाई पाकिस्तानी कभी न कभी स्कूल गए हैं, लेकिन शिक्षा का स्तर असमान बना हुआ है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय साक्षरता दर 63 प्रतिशत है, जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 73 प्रतिशत और महिलाओं की 52 प्रतिशत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान में शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। प्राइवेट स्कूलों द्वारा स्कॉलरशिप कोटा का उल्लंघन न केवल कानूनी है, बल्कि यह आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के भविष्य को भी प्रभावित करता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या प्राइवेट स्कूलों पर कोई कानूनी कार्रवाई हुई है?
हाँ, इस मुद्दे पर इस्लामाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
स्कॉलरशिप कोटा का उद्देश्य क्या है?
स्कॉलरशिप कोटा का उद्देश्य कमजोर वर्ग के छात्रों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना है।
पाकिस्तान में शिक्षा की वर्तमान स्थिति क्या है?
पाकिस्तान में 5 से 16 वर्ष के लगभग 28 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं।
लड़कियों की स्कूल जाने की दर क्या है?
पाकिस्तान में 34 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जा पाती हैं, जो चिंताजनक है।
पाकिस्तान की साक्षरता दर क्या है?
पाकिस्तान की राष्ट्रीय साक्षरता दर 63 प्रतिशत है।
राष्ट्र प्रेस
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