प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा: भारत-इजरायल संबंधों में नई गहराई की आशा
सारांश
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तेल अवीव, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की राजनीति और विदेश नीति के विशेषज्ञ लॉरेन डागन अमोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस यात्रा को लेकर इजरायल में गर्व, आभार और उत्साह का वातावरण बना हुआ है।
अमोस ने उल्लेख किया कि PM मोदी के दौरे के दौरान भारत की तेज आर्थिक प्रगति, डिजिटल परिवर्तन और कूटनीतिक मजबूती प्रमुख रूप से चर्चा में रहेंगी। उन्होंने राष्ट्र प्रेस को बताया कि लोग PM मोदी को देखने के लिए काफी उत्साहित हैं, क्योंकि वे हर विदेशी दौरे में भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़ते हैं, और यही जुड़ाव इस बार भी उत्साह का कारण है।
अमोस ने इस मुलाकात को विशेष बताते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है, लेकिन इस समय इसका महत्व कहीं अधिक है। इस यात्रा के दौरान दोनों देश आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक साझेदारी और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते कर सकते हैं।
भारत-इजरायल के ऐतिहासिक संबंधों पर बात करते हुए अमोस ने कहा कि पूर्ण राजनयिक संबंध जनवरी 1992 में स्थापित हुए थे, लेकिन वास्तविक बदलाव 2014 के बाद स्पष्ट रूप से देखा जाने लगा। पहले संबंध सीमित दायरे में और अपेक्षाकृत कम चर्चा में रहते थे, लेकिन अब यह रिश्ता खुलकर सामने आया है और अर्थव्यवस्था तथा संस्कृति तक विस्तृत हुआ है।
उन्होंने सुरक्षा सहयोग पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत और इजरायल समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और दोनों देश चरमपंथी कट्टरपंथ से निपटने में लगे हैं। हालिया सैन्य अभियानों के दौरान वायु रक्षा प्रणालियों का महत्व स्पष्ट हुआ है। उनके अनुसार, दोनों देश एक-दूसरे से सीख सकते हैं, और यह पारस्परिक सीख भविष्य में संबंधों को और गहरा और रणनीतिक बनाएगी।
अमोस ने यह भी बताया कि PM मोदी का यह दूसरा इजरायल दौरा ऐतिहासिक महत्व रखता है। 2017 से पहले कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री इजरायल नहीं आया था। पहले केवल पूर्व प्रधानमंत्री या पूर्व राष्ट्रपति स्तर की यात्राएं होती थीं। मौजूदा कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में PM मोदी का आना विशेष संदेश देता है।
भारत-इजरायल आर्थिक सहयोग पर अमोस ने कहा कि निवेश इस संबंध की बुनियाद है। औपचारिक संबंधों से पहले भी कृषि और जल प्रबंधन सहयोग के प्रमुख क्षेत्र रहे हैं। उन्होंने एक दिलचस्प प्रसंग साझा करते हुए बताया कि PM मोदी ने 2002 में जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने इजरायल का दौरा किया था और वहां की कंपनी नेटाफिम सहित विभिन्न निवेशों को देखा था। PM मोदी इन निवेशों को हमेशा याद रखते हैं और वास्तविक सहयोग की सराहना करते हैं।
उन्होंने भारत में चल रही संभावित समझौतों पर भी प्रतिक्रिया दी। अमोस ने कहा कि जिन सौदों की चर्चा हो रही है, उनमें से कई पहले ही हस्ताक्षरित हो चुके हैं। इस यात्रा में शायद बहुत बड़ा नया समझौता न हो, लेकिन यह यात्रा भविष्य के अनेक समझौतों के लिए रास्ता जरूर खोलेगी।
अमोस ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग मजबूत हुआ है। तीन महीने पहले भारत के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक स्तर की यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे।
अमोस ने आगे कहा कि दोनों देशों को केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विकास के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ानी चाहिए। इजरायली उद्योगों को भारत में और अधिक निवेश और तकनीकी सहयोग के अवसर तलाशने चाहिए, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।