पुतिन-पेजेश्कियन में ताज़ा संपर्क: यूएस-इजरायल हमले के बाद रूस ने ईरान को दिया पूरा समर्थन

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पुतिन-पेजेश्कियन में ताज़ा संपर्क: यूएस-इजरायल हमले के बाद रूस ने ईरान को दिया पूरा समर्थन

सारांश

यूएस-इजरायल हमलों के बीच रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन 28 फरवरी से तीन बार फोन पर बात कर चुके हैं। ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण का दावा किया और ईरान पर आर्थिक दबाव की रणनीति स्पष्ट की। रूस ने शांति प्रयासों में मदद का संकल्प जताया।

Key Takeaways

  • पुतिन और पेजेश्कियन के बीच 28 फरवरी से अब तक तीन बार फोन वार्ता हो चुकी है।
  • सबसे हालिया बातचीत 12 अप्रैल को हुई थी — यह जानकारी ईरानी राजदूत काजम जलाली ने दी।
  • रूस ने पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा जताई है।
  • ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा किया और कहा — ईरान को रोजाना 50 करोड़ डॉलर की कमाई से रोकना उनका लक्ष्य है।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत समुद्री तेल गुजरता है — इस पर रुकावट का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा।
  • दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच भी मजबूत संपर्क बना हुआ है।

मॉस्को, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच लगातार उच्चस्तरीय संवाद जारी है। रूस में ईरान के राजदूत काजम जलाली ने शुक्रवार को पुष्टि की कि 28 फरवरी से अब तक दोनों नेताओं के बीच तीन बार फोन पर बातचीत हो चुकी है और मॉस्को क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों में सहयोग देने को पूरी तरह तैयार है।

राजदूत जलाली का बयान — रूस-ईरान संबंध कितने मजबूत?

राजदूत काजम जलाली ने कहा, "पुतिन और पेजेश्कियन ने 28 फरवरी से तीन बार फोन पर बात की है। हमारे राष्ट्रपति बहुत अच्छे संपर्क में रहते हैं। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच भी बेहद मजबूत संबंध हैं।" दोनों नेताओं के बीच सबसे हालिया बातचीत 12 अप्रैल को हुई थी।

जलाली ने यह भी कहा कि "हम रूस को इस समर्थन और आवाज़ के लिए धन्यवाद देते हैं, जो हमारे दोनों देशों के बीच गहरे और मजबूत रिश्तों को दर्शाता है।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश ईरान पर प्रतिबंधों और सैन्य दबाव की नीति को और कड़ा कर रहे हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ट्रंप का दांव — तेल बाजार पर खतरे की घंटी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक ईरान कोई ठोस समझौता नहीं करता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण बना रहेगा। ट्रंप ने कहा, "इस पर हमारा पूरा नियंत्रण है। यह रास्ता तभी खुलेगा जब वे कोई समझौता करेंगे या कोई सकारात्मक स्थिति बनेगी।"

ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि इस रणनीति का सीधा उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना है। उन्होंने कहा कि यदि यह मार्ग खोल दिया जाए तो ईरान प्रतिदिन लगभग 50 करोड़ डॉलर (500 मिलियन डॉलर) कमाएगा — जो उन्हें मंजूर नहीं। ईंधन कीमतों पर असर के सवाल पर ट्रंप ने माना, "थोड़े समय के लिए असर होगा।"

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रणनीतिक महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक अत्यंत संकरा समुद्री मार्ग है जो ओमान की खाड़ी को फारस की खाड़ी से जोड़ता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इराक और ईरान — सभी प्रमुख तेल उत्पादक देश इसी मार्ग पर निर्भर हैं।

इस जलमार्ग में किसी भी रुकावट का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। भारत, जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इस तनाव से अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकता है।

रूस की भूमिका — मध्यस्थ या रणनीतिक साझेदार?

रूस और ईरान के बीच यह घनिष्ठ संपर्क केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं है। यूक्रेन युद्ध के बाद से दोनों देश पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना एक साथ कर रहे हैं। ईरान ने रूस को ड्रोन और सैन्य उपकरण आपूर्ति के आरोपों का सामना किया है, जबकि रूस ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान के पक्ष में कई बार वीटो का इस्तेमाल किया है।

विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन इस संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर वैश्विक मंच पर अपनी प्रासंगिकता साबित करना चाहते हैं — खासकर तब जब पश्चिम उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश में लगा है। यह कूटनीतिक सक्रियता रूस के लिए रणनीतिक लाभ का अवसर भी है।

आगे क्या होगा?

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत की संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण और ईरान पर सैन्य दबाव इन वार्ताओं को जटिल बना रहा है। रूस की सक्रिय कूटनीति इस समीकरण में एक नया आयाम जोड़ती है। आने वाले हफ्तों में पुतिन-पेजेश्कियन के बीच एक और उच्चस्तरीय बैठक या फोन वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Point of View

भारत समेत तमाम तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। विडंबना यह है कि जो अमेरिका 'मुक्त व्यापार' का झंडाबरदार रहा है, वही आज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को बंधक बनाने की बात कर रहा है। मुख्यधारा की मीडिया इस खबर को केवल कूटनीतिक बयानबाजी के रूप में पेश कर रही है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ रहा है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

पुतिन और पेजेश्कियन के बीच कितनी बार बातचीत हुई है?
28 फरवरी से अब तक पुतिन और पेजेश्कियन के बीच तीन बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। सबसे हालिया वार्ता 12 अप्रैल को हुई थी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का नियंत्रण क्यों महत्वपूर्ण है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार गुजरता है। इस पर नियंत्रण से ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनता है और वैश्विक तेल कीमतें प्रभावित होती हैं।
रूस ईरान के साथ क्यों खड़ा है?
रूस और ईरान दोनों पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं और रणनीतिक साझेदार हैं। रूसी राजदूत जलाली के अनुसार, रूस क्षेत्र में स्थायी शांति लाने के प्रयासों में सहयोग देने को तैयार है।
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने कहा कि जब तक ईरान कोई समझौता नहीं करता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा। उन्होंने माना कि इससे तेल की कीमतों पर "थोड़े समय के लिए" असर पड़ सकता है।
ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमले का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।
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