क्या राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पीएम मोदी से बात की? बोले, बिना शर्त हो इस युद्ध का अंत

सारांश
Key Takeaways
- यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और पीएम मोदी के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई।
- युद्ध का अंत बिना शर्त करने पर जोर दिया गया।
- भारत ने शांति के लिए अपने प्रयासों का आश्वासन दिया।
- जब तक संघर्ष जारी है, तब तक ठोस शांति चर्चा असंभव है।
- बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई।
कीव, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक की जानकारी साझा की।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "मैंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। मैंने उन्हें वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ यूरोपीय नेताओं की बातचीत के बारे में बताया। यह एक महत्वपूर्ण और उपयोगी चर्चा थी, जिसमें साझेदार देशों के बीच वास्तविक शांति कैसे स्थापित की जाए, इस पर एक साझा दृष्टिकोण था। यूक्रेन ने रूस
उन्होंने आगे कहा, "लगभग दो हफ्ते बीत चुके हैं। इस दौरान जब रूस को कूटनीति की तैयारी करनी चाहिए थी, तब मास्को ने कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया है। मास्को ने सिर्फ नागरिक ठिकानों पर निंदनीय हमले किए हैं और हमारे दर्जनों लोगों को मार डाला है। मृतकों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद।"
जेलेंस्की ने कहा कि हमने शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन से पहले अपनी स्थिति का समन्वय किया। इस युद्ध का अंत बिना शर्त होना चाहिए। जब हमारे शहर और समुदाय लगातार गोलाबारी की चपेट में हैं, तो शांति पर ठोस चर्चा करना असंभव है। भारत आवश्यक प्रयास करने और शिखर सम्मेलन से इतर बैठकों के दौरान रूस और अन्य नेताओं को उचित संकेत देने के लिए तैयार है। इसके लिए धन्यवाद।
उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों, आदान-प्रदान यात्राओं की तैयारियों और संयुक्त अंतर-सरकारी आयोग की बैठक के आयोजन पर भी चर्चा की। इसमें ऐसी संभावनाएं हैं जिन्हें हम साकार कर सकते हैं। मुझे निकट भविष्य में प्रधानमंत्री से मिलकर खुशी होगी।
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति जेलेंस्की से बातचीत की जानकारी देते हुए कहा, "मैंने राष्ट्रपति जेलेंस्की को आज फोन पर बात करने के लिए धन्यवाद किया। हमने चल रहे संघर्ष, उसके मानवीय पहलू और शांति एवं स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। भारत इस दिशा में सभी प्रयासों को पूर्ण समर्थन देता है।"