19 अक्टूबर 2026
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IKAA सम्मेलन में दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम हे-क्युंग की प्रवासी कोरियाई बच्चों से भावुक अपील

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IKAA सम्मेलन में दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम हे-क्युंग की प्रवासी कोरियाई बच्चों से भावुक अपील

सारांश

सोल में IKAA सम्मेलन के मंच से दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम हे-क्युंग ने प्रवासी कोरियाई अडॉप्टी को मातृभूमि से जोड़ने का भावुक न्योता दिया — वहीं प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने उत्तर कोरिया के साथ बातचीत फिर शुरू करने का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम हे-क्युंग ने 19 अक्टूबर 2026 को सोल में IKAA सम्मेलन के उद्घाटन में भाग लिया।
उन्होंने प्रवासी कोरियाई अडॉप्टी से मातृभूमि के करीब आने और सार्थक यादें सँजोने की अपील की।
IKAA अध्यक्ष टॉमी जेंटजेल ने सरकार से अडॉप्टी को जैविक परिवार खोजने के लिए डीएनए परीक्षण सहित संसाधन देने की माँग की।
प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने 18 अक्टूबर को सोल और प्योंगयांग के बीच बातचीत पुनः आरंभ करने और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संकल्प व्यक्त किया।
हान ने कोरियाई विभाजन को 'हकीकत' मानते हुए बिछड़े परिवारों का दर्द अभी भी बरकरार होने की बात कही।

दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम हे-क्युंग ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को सोल में आयोजित इंटरनेशनल कोरियन अडॉप्टी एसोसिएशन (IKAA) सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में विदेशों में गोद लिए गए कोरियाई मूल के लोगों से अपनी मातृभूमि के और निकट आने तथा उससे जुड़ी सार्थक यादें सँजोने का आग्रह किया। यह सम्मेलन दुनिया के विभिन्न कोनों से आए कोरियाई अडॉप्टी को एकजुट करने और एक सामूहिक पहचान बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

प्रथम महिला का संदेश

फर्स्ट लेडी किम हे-क्युंग ने अपने संबोधन में कहा, 'आप में से हर कोई दक्षिण कोरिया को अलग नज़रिए से देख सकता है। कुछ लोगों के लिए यह विदेश हो सकता है, तो कुछ के लिए यह वह मातृभूमि हो सकती है, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था।' उन्होंने आगे जोड़ा कि कई लोग अपनी जड़ों और पहचान की तलाश में अनेक सवाल लेकर यहाँ पहुँचे हैं।

किम ने उम्मीद जताई कि उपस्थित लोग दक्षिण कोरिया के पतझड़ के मौसम, यहाँ के खान-पान और अन्य आकर्षणों का स्वयं अनुभव करेंगे। उन्होंने कहा, 'आप चाहे जैसे भी यहाँ आए हों, मुझे उम्मीद है कि इस अवसर पर आप अपनी मातृभूमि के और करीब आ पाएंगे और नए, सार्थक रिश्ते बना पाएंगे।' उनकी अंतिम कामना यह थी कि मातृभूमि का माहौल, आकर्षण और सुंदरता दीर्घकाल तक इन लोगों की स्मृतियों में बनी रहे।

IKAA अध्यक्ष का आह्वान

IKAA के अध्यक्ष टॉमी जेंटजेल ने इस बात पर बल दिया कि गोद लिए गए कोरियाई लोगों और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों में असीम संभावनाएँ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन संभावनाओं को साकार करने के लिए इन लोगों के दुखों को समझना और सुलह की दिशा में ठोस कदम उठाना अनिवार्य है।

जेंटजेल ने दक्षिण कोरिया की सरकार और संबंधित संस्थाओं से आग्रह किया कि गोद लिए गए कोरियाई लोगों को अपने जैविक परिवारों की खोज के लिए आवश्यक संसाधन और सहायता दी जाए, जिसमें डीएनए परीक्षण की सुविधा भी शामिल हो।

उत्तर-दक्षिण संबंधों पर प्रधानमंत्री का बयान

इसी पृष्ठभूमि में, रविवार, 18 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने सोल में विस्थापित उत्तर कोरियाई निवासियों के लिए आयोजित एक खेल प्रतियोगिता में कहा कि सरकार सोल और प्योंगयांग के बीच बातचीत पुनः आरंभ करने के लिए आधार तैयार करेगी। उन्होंने कहा, 'दक्षिण और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत के रास्ते खोलने और शांति तथा साझा समृद्धि पर चर्चा करने के प्रयास किए जाएंगे।'

प्रधानमंत्री हान ने दोनों देशों के विभाजन को एक 'हकीकत' स्वीकार करते हुए यह भी रेखांकित किया कि विस्थापित निवासियों और बिछड़े परिवारों का दर्द आज भी बरकरार है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि 'दक्षिण और उत्तर कोरिया के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता खोलने के हमारे प्रयास रुक नहीं सकते।'

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया दशकों से विश्व के सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण देशों में रहा है। हज़ारों कोरियाई बच्चे यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में गोद लिए गए, और उनकी पहचान तथा जड़ों से जुड़ने की चाहत एक संवेदनशील मानवाधिकार विषय बन चुकी है। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब दक्षिण कोरिया की सरकार अंतर-कोरियाई संवाद और अपनी वैश्विक पहचान — दोनों मोर्चों पर सक्रिय दिखने की कोशिश कर रही है। IKAA जैसे मंच इस दिशा में जैविक परिवारों से पुनर्मिलन और सांस्कृतिक पुनः-जुड़ाव के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली प्रश्न यह है कि दक्षिण कोरिया की सरकार अडॉप्टी समुदाय की ठोस माँगों — जैसे डीएनए डेटाबेस, जैविक परिवारों से पुनर्मिलन के कानूनी रास्ते और अतीत की दत्तक-ग्रहण प्रणाली में हुई कथित अनियमितताओं की जाँच — पर क्या कदम उठाती है। टॉमी जेंटजेल का 'सुलह' का आग्रह इस बात का संकेत है कि अडॉप्टी समुदाय केवल सांस्कृतिक पुनः-जुड़ाव से संतुष्ट नहीं; वे जवाबदेही भी चाहते हैं। प्रधानमंत्री हान का उत्तर-दक्षिण संवाद का संकल्प दोहराना अपनी जगह महत्वपूर्ण है, किंतु जब तक प्योंगयांग की ओर से सकारात्मक संकेत नहीं आते, ये घोषणाएँ राजनयिक शब्दजाल से अधिक नहीं रहेंगी।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IKAA सम्मेलन क्या है और यह क्यों आयोजित होता है?
इंटरनेशनल कोरियन अडॉप्टी एसोसिएशन (IKAA) का सम्मेलन विश्व भर में विभिन्न देशों में गोद लिए गए कोरियाई मूल के लोगों को एक मंच पर एकजुट करता है। इसका उद्देश्य इन लोगों को आपस में जोड़ना, उनकी कोरियाई पहचान को सुदृढ़ करना और जैविक परिवारों की खोज के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है।
दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम हे-क्युंग ने IKAA सम्मेलन में क्या कहा?
किम हे-क्युंग ने 19 अक्टूबर 2026 को सोल में आयोजित IKAA सम्मेलन के उद्घाटन में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि गोद लिए गए कोरियाई लोग अपनी मातृभूमि के करीब आएंगे, नए सार्थक रिश्ते बनाएंगे और यहाँ की सुंदरता व आकर्षण को दीर्घकाल तक याद रखेंगे।
IKAA अध्यक्ष टॉमी जेंटजेल ने सरकार से क्या माँग की?
IKAA अध्यक्ष टॉमी जेंटजेल ने दक्षिण कोरिया की सरकार और संबंधित संस्थाओं से आग्रह किया कि गोद लिए गए कोरियाई लोगों को उनके जैविक परिवारों को खोजने के लिए आवश्यक संसाधन, सहायता और डीएनए परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने सुलह की दिशा में ठोस कदम उठाने पर भी जोर दिया।
दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने उत्तर कोरिया के बारे में क्या बयान दिया?
प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने 18 अक्टूबर को कहा कि सरकार सोल और प्योंगयांग के बीच बातचीत फिर शुरू करने के लिए आधार तैयार करेगी और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में प्रयास जारी रखेगी। उन्होंने कोरियाई विभाजन को 'हकीकत' स्वीकार करते हुए बिछड़े परिवारों के दर्द को रेखांकित किया।
दक्षिण कोरिया में अंतर्राष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण का इतिहास क्या है?
दक्षिण कोरिया दशकों तक विश्व के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय दत्तक-ग्रहण देशों में रहा, जहाँ से हज़ारों बच्चे यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में गोद लिए गए। बाद में इस प्रणाली में कथित अनियमितताओं के सवाल उठे, जिससे यह विषय एक संवेदनशील मानवाधिकार मुद्दा बन गया।
राष्ट्र प्रेस
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