क्या ताइवान ने बीजिंग पर क्षेत्रीय शांति भंग करने का आरोप लगाया है?
सारांश
Key Takeaways
- ताइवान ने चीनी ड्रोन की घुसपैठ का आरोप लगाया।
- रक्षा मंत्रालय ने इसे उकसावे वाला बताया।
- चीनी सैन्य गतिविधियों की ताइवान द्वारा लगातार निगरानी की जाती है।
- ताइवान की सेना ने हाई अलर्ट पर रहने का फैसला किया।
- भविष्य में तनाव बढ़ने की संभावना है।
ताइपे, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ताइवान ने शनिवार को चीनी जासूसी ड्रोन के द्वारा उसके क्षेत्र में घुसपैठ करने का आरोप लगाया। रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) ने अपने बयान में कहा कि एक चीनी जासूसी ड्रोन कुछ समय के लिए दक्षिण चीन सागर के उत्तरी छोर पर ताइवान के नियंत्रण वाले प्रातास द्वीपों के ऊपर से उड़ा, जो कि एक उकसावे और गैर-जिम्मेदाराना कदम था।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, शनिवार सुबह 5:44 बजे ताइवान के नियंत्रण वाले डोंगशा द्वीप (जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतास द्वीप के नाम से जाना जाता है) के एयरस्पेस में चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का एक मिलिट्री ड्रोन देखा गया, और चार मिनट बाद वह वहां से चला गया।
एमएनडी ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि सर्विलांस और टोही ड्रोन को सुबह-सुबह देखा गया था, जब वह डोंगशा द्वीप के क्षेत्रीय एयरस्पेस में घुस रहा था। यह द्वीप दक्षिण चीन सागर में स्थित है और ताइवान के दक्षिणी शहर काओशुंग से लगभग 444 किलोमीटर दूर है।
एमएनडी ने कहा कि ताइवान की सेना द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय चैनल के जरिए चेतावनी प्रसारित करने के बाद, ड्रोन शनिवार सुबह 5:48 बजे वहां से चला गया।
मंत्रालय ने पीएलए की कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे बेहद उकसाने वाला और गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता कमजोर हुई है और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।
मंत्रालय ने कहा कि ताइवान की सेना हाई अलर्ट पर रहेगी और 'रेगुलर कॉम्बैट रेडिनेस पीरियड' के दौरान आकस्मिक स्थितियों से निपटने के अपने नियमों के अनुसार जवाब देगी।
लोकतांत्रिक तरीके से शासित ताइवान, जिसे चीन अपना इलाका बताता है, लगभग रोजाना अपने आसपास चीनी सैन्य गतिविधियों की रिपोर्ट करता है, जिसमें ड्रोन भी शामिल हैं, हालांकि वे बहुत कम ही ताइवानी एयरस्पेस में घुसते हैं।
पिछले कुछ महीनों से जापानी पीएम साने ताकाइची के एक बयान के बाद से ही बीजिंग नाराज है। दरअसल, साने ताकाइची ने 7 नवंबर 2025 को कहा था कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो जापान मदद के लिए अपनी सेना भेजेगा। इस पर चीन ने सख्त ऐतराज जताया था और मामला यूएन तक भी पहुंचा था।