27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूएस ने ईरान पर कसा शिकंजा, विफल वार्ता के बाद पोर्ट्स पर समुद्री नाकाबंदी लागू

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूएस ने ईरान पर कसा शिकंजा, विफल वार्ता के बाद पोर्ट्स पर समुद्री नाकाबंदी लागू

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में असफलता के बाद, अमेरिका ने ईरान के पोर्ट्स पर समुद्री नाकाबंदी लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम तनाव को और बढ़ा सकता है। जानिए क्या है इस नाकाबंदी का उद्देश्य और इसके संभावित प्रभाव।

मुख्य बातें

अमेरिका ने ईरान के पोर्ट्स पर समुद्री नाकाबंदी लागू की है।
यह कदम न्यूक्लियर प्रोग्राम पर दबाव बनाने के लिए है।
नाकाबंदी सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी।
ईरान ने इसका विरोध किया है।
ग्लोबल शिपिंग पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

वाशिंगटन, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत निष्फल रही है, जिसके कारण तनाव और बढ़ गया है। इसी संदर्भ में, अमेरिका १३ अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले सभी जहाजों पर समुद्री नाकाबंदी लागू करने का निर्णय लिया है।

यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने यह कदम राष्ट्रपति के आदेश के बाद उठाया है और यह नाकाबंदी ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक को प्रभावित करेगी, जिसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे के पोर्ट्स भी शामिल हैं।

सीईएनटीसीओएम ने कहा, "यह ब्लॉकेड सभी देशों के जहाजों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाएगा। अमेरिकी सेना होर्मुज स्ट्रेट से गैर-ईरानी पोर्ट्स से आने-जाने वाले जहाजों को नहीं रोकेगी।" सीईएनटीसीओएम की एक रिलीज के मुताबिक, यह नाकाबंदी सोमवार को शाम ७.३० बजे आईएसटी से शुरू होगी।

कमर्शियल नाविकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक नेविगेशन चेतावनियों पर ध्यान दें और इस क्षेत्र में काम करते समय अमेरिकी नेवी फोर्स के संपर्क में रहें।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अन्य मोर्चों पर प्रगति के बावजूद, ईरान के साथ बातचीत इसके न्यूक्लियर लक्ष्यों को लेकर रुक गई है। ट्रंप के इस बयान के कुछ घंटे बाद ही सीईएनटीसीओएम का यह रिलीज सामने आया है।

ट्रंप ने कहा, "ज्यादातर मुद्दों पर सहमति हो गई थी, लेकिन एकमात्र बात जो वास्तव में मायने रखती थी, वह थी न्यूक्लियर और उस पर कोई सहमति नहीं बनी। यूएस नेवी होर्मुज स्ट्रेट में आने या जाने की कोशिश करने वाले सभी जहाजों को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।"

उन्होंने ईरान पर स्ट्रेट में नेवल माइंस की धमकियों का फायदा उठाकर वैश्विक एक्सटॉर्शन करने का आरोप लगाया। बता दें, होर्मुज स्ट्रेट एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा कॉरिडोर है। इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "जो कोई भी गैर-कानूनी टोल देता है, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। अमेरिकी सेना स्ट्रेट्स में ईरानियों द्वारा बिछाई गई माइंस को भी खत्म करना शुरू कर देगी।"

हालांकि, ईरान ने इसका कड़ा विरोध किया है, जिससे पता चलता है कि नाकाबंदी के कारण लगभग अंतिम बातचीत पटरी से उतर गई।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अच्छी नीयत से काम किया था और नाकाबंदी का सामना करने से पहले वह एक समझौते से बस कुछ इंच दूर था।

उन्होंने कहा, “अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है। दुश्मनी से दुश्मनी उत्पन्न होती है।”

इस विवाद पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि यह झगड़ा ईरान के होर्मुज स्ट्रेट में नेवल माइंस के आस-पास की अनिश्चितता का उपयोग करके वैश्विक शिपिंग पर दबाव डालने का प्रयास है।

इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, ईरान द्वारा कुछ प्रमुख समुद्री मार्गों को “खतरनाक क्षेत्र” घोषित करने के बाद जहाजों को अपनी सामान्य और सुरक्षित शिपिंग लेन छोड़नी पड़ी। परिणामस्वरूप, उन्हें मजबूरन ईरान के नियंत्रण वाले जलक्षेत्र में प्रवेश करना पड़ा। इसके बाद इन जहाजों पर प्रोटेक्शन फीस भी लगाई गई।

समूह ने कहा, “यह प्रोटेक्शन फीस समुद्री कानून के तहत गैर-कानूनी है। स्ट्रेट से सटे कोई भी राज्य इंटरनेशनल कन्वेंशन के तहत आने-जाने पर रोक नहीं लगा सकता या फीस नहीं ले सकता।”

विश्लेषकों ने कहा कि माइंस के खतरे ने तेल की कीमतों और शिपिंग इंश्योरेंस की लागत बढ़ा दी है, भले ही सीधे हमले न हुए हों। यूएस नेवी ने उस स्ट्रेटेजी का मुकाबला करने के लिए ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं।

यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी जैसे डिस्ट्रॉयर ने सुरक्षित मार्ग दिखाने और माइन-क्लियरिंग की कोशिशें शुरू करने के लिए स्ट्रेट को पार किया है। सीईएनटीसीओएम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि सुरक्षित मार्ग को जितनी जल्दी हो सके सिविलियन शिपिंग के साथ साझा किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान पर समुद्री नाकाबंदी का उद्देश्य क्या है?
ईरान पर समुद्री नाकाबंदी का उद्देश्य ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर दबाव बनाना है।
क्या सभी देशों के जहाजों पर यह नाकाबंदी लागू होगी?
जी हां, यह नाकाबंदी सभी देशों के जहाजों पर बिना किसी भेदभाव के लागू होगी।
यह नाकाबंदी कब से लागू होगी?
यह नाकाबंदी १३ अप्रैल से लागू होगी।
ईरान ने इस नाकाबंदी पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
ईरान ने इस नाकाबंदी का कड़ा विरोध किया है और इसे बातचीत के समाप्त होने का संकेत माना है।
इस नाकाबंदी का वैश्विक शिपिंग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस नाकाबंदी से वैश्विक शिपिंग पर काफी गहरा असर पड़ सकता है, जिससे तेल की कीमतें और शिपिंग इंश्योरेंस की लागत में वृद्धि हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले