शी चिनफिंग का बुजुर्गों पर फोकस: चीन में 32 करोड़ से अधिक वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रपति एवं सीपीसी केंद्रीय समिति के महासचिव शी चिनफिंग दशकों से बुजुर्गों की देखभाल को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानते आए हैं। 7 दिसंबर 1984 को, जब वे हपेई प्रांत के तत्कालीन पार्टी सचिव थे, उन्होंने एक लेख प्रकाशित किया था जिसका शीर्षक था — युवा और मध्यम आयु वर्ग के अधिकारियों को 'बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए।' आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत तक चीन में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के बुजुर्गों की संख्या 32 करोड़ 33 लाख 80 हजार हो चुकी है, जो देश की कुल जनसंख्या का 23 प्रतिशत है।
चार दशकों से बरकरार प्रतिबद्धता
शी चिनफिंग का यह सरोकार महज राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि चार दशकों की सतत नीतिगत प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है। वे अपने भाषणों और दौरों में बार-बार इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बुजुर्गों का सम्मान और आदर करना चीनी राष्ट्र का पारंपरिक गुण है। उनके अनुसार, बुजुर्गों की देखभाल केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
निरीक्षण दौरों में बुजुर्गों से सीधा संवाद
चीन के विभिन्न क्षेत्रों के दौरों के दौरान शी चिनफिंग ने बार-बार गाँव, रिहायशी क्षेत्र, वृद्ध देखभाल संस्थान और बुजुर्ग देखभाल सेवा केंद्रों का दौरा किया है। इन यात्राओं में उन्होंने बुजुर्गों से स्नेहपूर्ण बातचीत की और संबंधित कर्मचारियों को उनका अधिक ध्यान रखने के निर्देश दिए। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब चीन तेज़ी से बढ़ती वृद्ध आबादी की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है।
वृद्धावस्था: एक राष्ट्रीय नीति प्रश्न
शी चिनफिंग ने स्पष्ट किया है कि बड़ी संख्या में बुजुर्ग लोगों की अलग-अलग ज़रूरतों को पूरा करना और वृद्धापन से उत्पन्न सामाजिक मुद्दों का उचित समाधान करना देश के समग्र विकास और जनकल्याण से सीधे जुड़ा है। उनके अनुसार इस दिशा में भरसक प्रयास अनिवार्य हैं।
व्यवस्था में सुधार की दिशा
सिलसिलेवार नीतिगत कदमों के कार्यान्वयन से चीन में बुजुर्ग देखभाल सेवा व्यवस्था में उत्तरोत्तर सुधार हो रहा है। बुजुर्गों का सम्मान करने और उनकी देखभाल करने की परंपरा को पूरे समाज में सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। गौरतलब है कि चीन की जनसांख्यिकीय संरचना अगले दो दशकों में और अधिक बुजुर्ग-बहुल होने की ओर अग्रसर है, जिससे यह नीतिगत प्राथमिकता आने वाले वर्षों में और अधिक निर्णायक बन जाएगी।