पर्वतासन: हड्डियों से मानसिक शांति तक, आयुष मंत्रालय ने बताए इस एक आसन के चमत्कारी फायदे
सारांश
Key Takeaways
- पर्वतासन को आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने सरल और प्रभावी योगासन के रूप में मान्यता दी है।
- रोजाना केवल 5 से 10 मिनट के अभ्यास से हड्डियां, रीढ़ और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
- पाचन तंत्र में सुधार होता है क्योंकि आसन के दौरान पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य के लिए यह आसन तनाव, चिंता कम करता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
- गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या या हालिया सर्जरी वाले लोगों को यह आसन करने से बचना चाहिए।
- 2015 से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना के बाद से वैश्विक योग अभ्यासकर्ताओं की संख्या में 300%25 से अधिक वृद्धि हुई है।
नई दिल्ली: आधुनिक जीवन की भागदौड़ में शरीर और मन दोनों थके हुए हैं — ऐसे में पर्वतासन एक ऐसा प्राचीन भारतीय योगासन है जो रोजाना केवल 5 से 10 मिनट के अभ्यास से हड्डियों को मजबूती, रीढ़ को लचीलापन और मन को गहरी शांति देता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे विशेष रूप से सरल, सुरक्षित और प्रभावी योगासन के रूप में मान्यता दी है।
पर्वतासन क्या है और इसका महत्व
पर्वतासन दो संस्कृत शब्दों से बना है — 'पर्वत' अर्थात पहाड़ और 'आसन' अर्थात मुद्रा। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति एक ऊंचे, स्थिर और दृढ़ पहाड़ जैसी बन जाती है। यह आसन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए भी बेहद सरल है और इसे किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।
गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के करीब आते ही योग को लेकर जागरूकता देशभर में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित यह आसन आम नागरिकों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाता है।
शारीरिक स्वास्थ्य पर पर्वतासन के लाभ
आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, पर्वतासन के नियमित अभ्यास से पैरों, जांघों, पीठ और कंधों की मांसपेशियां सक्रिय और मजबूत होती हैं। रीढ़ की हड्डी सीधी और लचीली बनती है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए अत्यंत जरूरी है।
इस आसन के दौरान पेट की मांसपेशियों पर प्राकृतिक दबाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र में सुधार होता है और गैस, अपच जैसी समस्याएं कम होती हैं। नियमित अभ्यास से शरीर की मुद्रा सुधरती है और व्यक्ति का कद भी दिखने में अधिक लंबा और आत्मविश्वासपूर्ण लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑफिस वर्कर्स और स्क्रीन टाइम अधिक रहने वाले लोगों में 'टेक नेक' और 'स्लाउचिंग पोस्चर' की समस्या तेजी से बढ़ रही है — पर्वतासन इस समस्या का एक प्राकृतिक और निःशुल्क समाधान है।
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
पर्वतासन केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि यह शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्राचीन माध्यम है। इसके नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है, तनाव और चिंता में उल्लेखनीय कमी आती है और मन को स्थिरता मिलती है।
छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि यह निर्णय लेने की क्षमता को तेज करता है और मानसिक थकान को दूर करता है। WHO की रिपोर्टों के अनुसार भारत में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं — ऐसे में योग-आधारित समाधान और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।
सावधानियां और किसे बचना चाहिए
यद्यपि पर्वतासन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, फिर भी जिन्हें गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या हो या जिनकी हाल ही में कोई सर्जरी हुई हो, उन्हें यह आसन करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान भी इसे किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना उचित है। आयुष मंत्रालय की सलाह है कि आसन सुबह खाली पेट करने पर सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं।
व्यापक परिप्रेक्ष्य: योग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति
यह ध्यान देने योग्य है कि भारत सरकार ने पिछले एक दशक में योग को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का अभिन्न हिस्सा बनाया है। 2015 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना के बाद से वैश्विक स्तर पर योग अभ्यासकर्ताओं की संख्या में 300%25 से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
आने वाले समय में आयुष मंत्रालय देशभर के सरकारी स्कूलों और कार्यालयों में योग को अनिवार्य बनाने की दिशा में काम कर रहा है। रोजाना पर्वतासन का अभ्यास इस राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्य में हर नागरिक की व्यक्तिगत भागीदारी का सबसे सरल तरीका है।