17 अक्टूबर 2026 पंचांग: मां कालरात्रि पूजा, सूर्य का तुला राशि में प्रवेश और शुभ मुहूर्त
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 17 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को शारदीय नवरात्र का सातवाँ दिन है, जिस दिन मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। इसी दिन सूर्य देव कन्या राशि से तुला राशि में प्रवेश करेंगे — एक खगोलीय परिवर्तन जिसे ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व दिया जाता है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि इस दिन सुबह 5:54 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 8:28 बजे तक रहेगी।
तिथि, सूर्योदय और चंद्रमा की स्थिति
शनिवार को सूर्योदय सुबह 6:28 बजे और सूर्यास्त शाम 5:56 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 12:13 बजे और चंद्रास्त रात 10:55 बजे होगा। चंद्रमा सुबह 6:47 बजे तक वृश्चिक राशि में संचरण करेंगे, इसके बाद धनु राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष के अनुसार, धनु राशि देवगुरु बृहस्पति की राशि है, और इस स्थिति में मन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है तथा व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी मार्ग खोजने में सक्षम रहता है।
मां कालरात्रि: नवदुर्गा का सातवाँ रूप
मां कालरात्रि को देवी दुर्गा की सातवीं शक्ति और नवदुर्गा का सबसे भयंकर स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि के स्मरण मात्र से भूत, प्रेत, राक्षस और समस्त नकारात्मक ऊर्जाएँ, साथ ही ग्रह-बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना का विधान है।
इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है। इस संयोग से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा में वृद्धि होती है। नौकरीपेशा लोगों के कार्य की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना होने की संभावना रहती है, और प्रशासन या प्रबंधन से जुड़े लोगों को नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकता है।
सूर्य का तुला राशि में प्रवेश और त्रिग्रही योग
शनिवार को सूर्य देव कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुला राशि में सूर्य नीच के (कमज़ोर) माने जाते हैं, जिससे आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकता है। गौरतलब है कि तुला राशि में बुध और शुक्र की मौजूदगी से त्रिग्रही योग (बुधादित्य और शुक्रादित्य योग) का निर्माण होता है, जो कुछ राशियों और आर्थिक मामलों के लिए मिला-जुला असर देता है।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृतकाल
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों के सभी अशुभ प्रभाव स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
अमृतकाल शनिवार की रात 2:34 बजे से तड़के 4:22 बजे तक रहेगा। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल
राहुकाल सुबह 9:20 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई भी नया या शुभ कार्य प्रारंभ करना वर्जित माना जाता है, हालाँकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
यमगंड काल दोपहर 1:38 बजे से 3:04 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से संबद्ध माना जाता है। इस काल में नया कार्य, यात्रा और धन के लेन-देन से बचने की सलाह दी जाती है।
गुलिक काल सुबह 6:28 बजे से 7:54 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहते हैं। इस अवधि में बैंक में धन जमा करना, दान देना या निवेश करना शुभ माना जाता है, जबकि कोई नया कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
इसके अतिरिक्त शनिवार को रात 11:02 बजे तक अतिगंड योग रहेगा, जिसे ज्योतिष में संघर्षपूर्ण और अशुभ माना जाता है। इस योग में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा, इसलिए शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह है।
इस प्रकार 17 अक्टूबर 2026 का पंचांग ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति, शुभ मुहूर्तों और नवरात्र की पवित्र ऊर्जा का संगम है — मां कालरात्रि की उपासना के साथ यह दिन आस्था और ज्योतिष दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।