दिल्ली विधानसभा में हंगामा: क्या भाजपा ने स्पीकर से आतिशी की शिकायत की?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली विधानसभा में विवादास्पद बयान ने हलचल मचाई।
- भाजपा ने कार्रवाई की मांग की।
- सिख समाज की भावनाएं आहत हुईं।
- सीएम ने निंदा की और उचित कार्रवाई की अपील की।
- इस मामले का राजनीतिक असर पड़ सकता है।
नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी के विवादास्पद बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। भाजपा विधायक और दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आतिशी के बयान के संबंध में दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को पत्र लिखा है और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
असल में, आप नेता आतिशी का बयान गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी साल के अवसर पर दिल्ली विधानसभा में हुई विशेष चर्चा से जुड़ा है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि आतिशी ने सिखों के नौवें गुरु का अपमान किया है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को लिखे गए पत्र में कहा गया कि दिल्ली विधानसभा के सदन के अंदर मंगलवार को गुरु तेग बहादुर जी के महान शहादत के सम्मान में नियम 270 के अंतर्गत एक विशेष चर्चा चल रही थी और उसमें सत्ता पक्ष के सदस्य, मंत्री एवं मुख्यमंत्री शामिल थे। इस अवसर पर प्रतिपक्ष की नेत्री डॉ. आतिशी ने अपनी सीट से खड़े होकर गुरु तेग बहादुर जी के बारे में जो वक्तव्य दिया, वह इतना अभद्र, शर्मनाक, और मर्यादाहीन था कि इसे हम लिखकर नहीं दे सकते हैं।
उन्होंने लिखा कि देश की आजादी से लेकर अब तक किसी भी सदन में किसी भी सदस्य द्वारा किसी भी गुरु के संबंध में इस प्रकार की अभद्रता नहीं देखी गई है। ऐसे मामलों में डॉ. आतिशी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा सदन में श्री गुरु तेग बहादुर जी पर की गई अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी से वह आहत हैं और इसकी कड़ी निंदा करती हैं।
इस शर्मनाक और मर्यादाहीन टिप्पणी से सिख समाज के साथ-साथ देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं।
उन्होंने कहा कि आज विधानसभा में साथी मंत्रियों, विधायकगणों, समाज के प्रबुद्धजनों और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने मुझसे मुलाकात कर नेता प्रतिपक्ष के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह करती हूं कि इस मामले का संज्ञान लेते हुए उचित निर्णय लें और सदन की गरिमा, संवैधानिक मूल्यों एवं जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उचित कार्रवाई की जाए।