क्या 24 जनवरी 1950 ने भारत के लोकतांत्रिक इतिहास को नया आयाम दिया?

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क्या 24 जनवरी 1950 ने भारत के लोकतांत्रिक इतिहास को नया आयाम दिया?

सारांश

क्या आपको पता है कि 24 जनवरी 1950 को भारत ने अपने लोकतांत्रिक इतिहास में एक बड़ा कदम उठाया? इसी दिन देश ने 'जन गण मन' को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को पहला राष्ट्रपति चुना। जानें इस ऐतिहासिक दिन की अहमियत।

Key Takeaways

  • 24 जनवरी 1950 को 'जन गण मन' को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया गया।
  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति बने।
  • यह दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
  • राष्ट्रगान में भारत की विविधता का उल्लेख है।
  • यह दिन आज़ादी के संघर्ष की गूंज को दर्शाता है।

नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कुछ विशेष तिथियाँ केवल कैलेंडर के पन्नों पर अंकित अंक नहीं होतीं, बल्कि वे एक देश के लिए महत्वपूर्ण मील के पत्थर का काम करती हैं। 24 जनवरी 1950 की यह तिथि भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण तारीख है, जब स्वतंत्र भारत ने अपने लोकतांत्रिक सफर को एक स्थायी प्रतीक और सशक्त नेतृत्व के साथ आगे बढ़ाया। इस दिन देश ने जन गण मन को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्वतंत्र भारत का पहला राष्ट्रपति बनाने का गौरव प्राप्त किया।

स्वतंत्रता आंदोलन की आग में तपकर निकला जन गण मन पहले से ही भारतीयों के दिलों में देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित कर चुका था। यह गीत, जिसे 1911 में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने बांग्ला भाषा में लिखा था, भारतीय आत्मसम्मान और एकता का प्रतीक बन गया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, इस गीत ने लोगों में देश के प्रति गर्व और समर्पण की भावना को और प्रबल किया।

संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसके हिंदी संस्करण को भारत के राष्ट्रगान के रूप में आधिकारिक रूप से अपनाया, जबकि इसकी गूंज पहले ही, 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता सत्र में सुनाई दी थी, जब इसे पहली बार सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत किया गया। जन गण मन केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की विविधता में एकता का प्रतीक बन गया।

राष्ट्रगान में देश के विभिन्न क्षेत्रों का उल्लेख इस एकता को और मजबूती प्रदान करता है। इसमें पंजाब, सिंधु (जो वर्तमान में पाकिस्तान का एक राज्य है), गुजरात, मराठा यानी महाराष्ट्र, द्राविड़ अर्थात दक्षिण भारत, उत्कल (वर्तमान में कलिंग) और बंग यानी बंगाल का उल्लेख है। यह उल्लेख भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोता है।

इसी ऐतिहासिक मौके पर भारत को उसका पहला संवैधानिक प्रमुख भी मिला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति बने। वे भारतीय इतिहास में ऐसे अद्वितीय नेता रहे हैं जिन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी निभाई। उनका राष्ट्रपति बनना लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने वाला कदम था, जिसने नवगठित गणराज्य को स्थिरता और गरिमा प्रदान की।

24 जनवरी 1950 का दिन इसलिए विशेष है, क्योंकि इसी समय भारत ने अपने गणतांत्रिक स्वरूप की नींव रखी। एक ओर राष्ट्रगान के रूप में देश की आत्मा को आवाज मिली, तो दूसरी ओर राष्ट्रपति के रूप में संविधान के संरक्षक का चयन हुआ। आज जब राष्ट्रगान की धुन गूंजती है और राष्ट्रपति पद की गरिमा दिखाई देती है, तो 24 जनवरी 1950 का वह ऐतिहासिक दिन याद आता है, जब स्वतंत्र भारत ने आत्म-परिचय किया और भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाया।

Point of View

मैं यह मानता हूं कि 24 जनवरी 1950 का दिन भारत के लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह न केवल हमारी संस्कृति और एकता का प्रतीक है, बल्कि यह हमें अपने संविधान और उसके मूल्यों को समझने का अवसर भी देता है।
NationPress
23/01/2026

Frequently Asked Questions

24 जनवरी 1950 का महत्व क्या है?
यह दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन 'जन गण मन' को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को पहला राष्ट्रपति बनाया गया।
'जन गण मन' का लेखक कौन है?
'जन गण मन' के लेखक रवींद्रनाथ टैगोर हैं, जिन्होंने इसे 1911 में बांग्ला भाषा में लिखा था।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कब राष्ट्रपति पद संभाला?
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1950 में स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला।
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