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क्या कौशल क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, पश्चिमी यूपी के युवाओं को मिलेगा उद्योग-आधारित प्रशिक्षण?

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क्या कौशल क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, पश्चिमी यूपी के युवाओं को मिलेगा उद्योग-आधारित प्रशिक्षण?

सारांश

उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर और राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद के बीच यह समझौता कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण को नया आयाम देगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कौशल विकास की नई पहल।
नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर और राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद के बीच एमओयू ।
पश्चिमी यूपी के युवाओं के लिए 28 सेक्टरों में कौशल प्रशिक्षण।
70,000 अभ्यर्थियों को रोजगार की संभावना।
50 प्रतिशत प्रशिक्षार्थी महिलाएं होंगी।

लखनऊ, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी संदर्भ में जनपद गौतम बुद्ध नगर में स्थित नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (एनएईसी) और राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

यह एमओयू प्रदेश में कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और उद्यमशीलता को नई दिशा देने वाला साबित होगा।

इस एमओयू के अंतर्गत एनएईसी द्वारा पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 18 जनपदों के 128 विकास खंडों और 10,323 ग्रामों से जुड़े एक लाख अभ्यर्थियों को आगामी पांच वर्षों में 28 सेक्टरों में अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इनमें से 70,000 अभ्यर्थियों को औद्योगिक इकाइयों में प्रशिक्षण के बाद रोजगार प्राप्त होगा। खास बात यह है कि कुल प्रशिक्षणार्थियों में 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा।

देश के प्रमुख अपैरल निर्यात क्लस्टर के रूप में एनएईसी की सबसे बड़ी विशेषता गारमेंट उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना होगा। प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक की पूरी प्रक्रिया एनएईसी द्वारा अपने डिजिटल पोर्टल “कौशल गंगा” के माध्यम से प्रबंधित की जाएगी। इसके साथ ही 'कौशल आजीविका' और 'कौशल बाजार' पोर्टल भी प्रशिक्षणार्थियों को आजीविका और बाजार से जोड़ने में सहायक होंगे।

इस सहभागिता में राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद की अहम भूमिका होगी। एससीवीटी, जो भारत सरकार की राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद की मान्यता प्राप्त अवार्डिंग बॉडी है, सभी प्रशिक्षणार्थियों के मूल्यांकन और प्रमाणन का कार्य करेगी। एनएईसी द्वारा एससीवीटी को प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए प्रमाणन शुल्क के रूप में 1,200 रुपए दिए जाएंगे। एससीवीटी अपने स्तर से भी पाठ्यक्रम तैयार कर उन्हें राष्ट्रीय परिषद से अनुमोदित कराएगी।

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर युवा हुनरमंद बने और उसे रोजगार के लिए भटकना न पड़े। एनएईसी और एससीवीटी के बीच हुआ यह एमओयू उद्योग व शिक्षा के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेगा। इससे न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश देश का स्किल हब बनकर उभरेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह पहल न केवल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करती है बल्कि प्रदेश को एक स्किल हब के रूप में स्थापित करने का भी प्रयास है। महिला सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करना और कौशल विकास को प्रोत्साहित करना एक दूरदर्शी कदम है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
महिलाओं के लिए कितनी सीटें आरक्षित की गई हैं?
कुल प्रशिक्षणार्थियों में 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी।
कौशल प्रशिक्षण का लाभ कब तक मिलेगा?
आगामी पांच वर्षों में एक लाख अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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