क्या एवरग्रीन स्टार प्रेम ने 39 फिल्मों में गिनीज रिकॉर्ड और एक प्रशंसक से मिली मौत?
सारांश
Key Takeaways
- प्रेम नजीर का करियर 39 वर्षों का था।
- उन्होंने मलयालम सिनेमा में कई गिनीज रिकॉर्ड बनाए।
- उनका जीवन प्रशंसा और संघर्षों से भरा था।
- उन्होंने 39 फिल्मों में एक ही वर्ष में काम किया।
- उनका निधन एक प्रशंसक से मिले संक्रमण के कारण हुआ।
नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक ऐसे अभिनेता जिन्होंने मलयालम फिल्म उद्योग को राष्ट्रीय पहचान दिलाई और अपने 39 साल के करियर में कई अद्भुत रिकॉर्ड स्थापित किए। उन्होंने सबसे ज्यादा फिल्में कीं, सबसे ज्यादा डबल रोल और ट्रिपल रोल निभाए, और एक ही अभिनेत्री के साथ 130 फिल्में कीं। उनका अभिनय इतना प्रभावशाली था कि वे हर फिल्म निर्माता की पहली पसंद बन गए। 1979 में, उनकी 39 फिल्में एक साथ रिलीज हुईं। इस मलयालम सिनेमा के दिग्गज का नाम है प्रेम नजीर।
7 अप्रैल 1927 को केरल में जन्मे प्रेम नजीर का असली नाम अब्दुल खादर था। अपने स्कूल के दिनों के बाद, कॉलेज में जाकर उनकी प्रतिभा निखरने लगी। उन्होंने थिएटर जॉइन किया और कई नाटकों में भाग लिया। उनके करियर की शुरुआत 'मर्चेंट ऑफ वेनिस' नाटक में शाइलॉक की भूमिका से हुई, जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला। इस तरह उन्होंने कॉलेज से एक अनुभवी अभिनेता के रूप में बाहर कदम रखा।
उन्हें फिल्म उद्योग में पहला अवसर एसके चारी द्वारा निर्देशित फिल्म 'मरुमकल' (1952) से मिला। उनकी दूसरी फिल्म 'विशप्पिंटे विली' ने उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया। इसी फिल्म के सेट पर प्रसिद्ध अभिनेता थिक्कुरिस्सी सुकुमारन नायर ने उनका नाम बदलकर प्रेम नजीर रख दिया। जल्दी ही वे मलयालम फिल्म जगत के एवरग्रीन एक्टर बन गए।
इसके बाद नजीर ने कई शानदार और असाधारण पुरस्कार और रिकॉर्ड अपने नाम किए। उनके अद्भुत करियर ने उन्हें चार गिनीज रिकॉर्ड दिलाए: लगभग 610 फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाने के लिए, 107 फिल्मों में एक ही हीरोइन के साथ काम करने के लिए, एक ही साल में रिलीज हुई 39 फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाने के लिए, और अंत में 80 हीरोइनों के साथ काम करने के लिए।
जब 16 जनवरी 1989 को उनका निधन हुआ, तब केवल एक सुपरस्टार नहीं गया, बल्कि मलयालम सिनेमा की आत्मा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हमेशा के लिए चुप हो गया। यह विडंबना है कि जिसे करोड़ों लोगों ने चाहा, उसी चाहत की एक कड़ी अंततः उनके जीवन पर भारी पड़ गई।
1980 के दशक के अंत में प्रेम नजीर की सेहत लगातार गिरती जा रही थी। मधुमेह से पीड़ित नजीर समाज सेवा और जरूरतमंदों की मदद में इतने डूबे रहते थे कि कई बार समय पर भोजन भी नहीं कर पाते थे। अनियमित खान-पान के कारण उन्हें पेप्टिक अल्सर हो गया और इलाज के लिए चेन्नई के विजया अस्पताल में भर्ती कराया गया।
लेकिन, अस्पताल भी उन्हें प्रशंसकों से दूर नहीं कर सका। जैसे ही उनकी भर्ती की खबर फैली, सैकड़ों लोग अपने प्रिय अभिनेता की एक झलक पाने अस्पताल पहुंचने लगे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि अस्पताल प्रशासन के लिए उसे संभालना लगभग असंभव हो गया। नजीर, जो जीवन भर लोगों को निराश न करने के लिए जाने जाते थे, बीमारी की हालत में भी मिलने आए प्रशंसकों को मना नहीं कर पाए।
कहा जाता है कि उन्हीं दिनों भीड़ में शामिल एक व्यक्ति खसरा से पीड़ित था। उसने हाल ही में स्नान किया था, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका और बढ़ गई। कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र से जूझ रहे प्रेम नजीर उस संक्रमण की चपेट में आ गए। साधारण परिस्थितियों में शायद यह बीमारी इतनी घातक न होती, लेकिन नजीर के लिए यह जानलेवा साबित हुई।
यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं था, बल्कि वास्तविक जीवन की सबसे दर्दनाक पटकथा थी। जिस अभिनेता ने परदे पर सैकड़ों बार मौत को मात दी, वह वास्तविक जीवन में अपने ही एक प्रशंसक से मिले संक्रमण से हार गया। उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। विदेश से दवाइयां मंगवाई गईं, हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अंततः, 16 जनवरी 1989 की सुबह, 62 वर्ष की आयु में प्रेम नजीर का निधन हो गया।