क्या सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला सोना चोरी मामले में याचिकाकर्ता को फटकार लगाई?

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क्या सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला सोना चोरी मामले में याचिकाकर्ता को फटकार लगाई?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले में केपी शंकर दास को फटकार लगाई। कोर्ट ने उनकी याचिका को ठुकराते हुए कहा कि भगवान को भी नहीं छोड़ा गया। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की।
  • भगवान को नहीं छोड़ा गया - कोर्ट की टिप्पणी।
  • केरल हाईकोर्ट ने साजिश की पुष्टि की।
  • बोर्ड के सदस्यों की जिम्मेदारी है।
  • जांच में कई गिरफ्तारियाँ हुईं।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी से जुड़े मामले में देवास्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य केपी शंकर दास को एक महत्वपूर्ण झटका दिया है। अदालत ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने केरल हाईकोर्ट के आदेश में उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी।

जस्टिस दीपांकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आपने भगवान को भी नहीं छोड़ा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि देवास्वोम बोर्ड के सदस्य के रूप में शंकर दास की जिम्मेदारी बनती है और वे चोरी के मामले में अपनी भूमिका से बच नहीं सकते। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में शंकर दास की उम्र और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए नरमी बरती थी।

शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की टिप्पणियों को उचित ठहराते हुए उन्हें हटाने से इनकार कर दिया।

वास्तव में, केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले में केपी शंकर दास और के विजयकुमार आपराधिक साजिश से नहीं बच सकते। शंकर दास ने इस टिप्पणी को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को अस्वीकार करते हुए अपील खारिज कर दी।

सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर से कई किलो सोने की चोरी और कुछ कीमती सामानों के गायब होने की खबर एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन कर उभरी। यह सोना 1998-99 में यूबी ग्रुप के चेयरमैन विजय माल्या द्वारा दान की गई द्वारपाल मूर्तियों पर लगी परत का हिस्सा था। केरल हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एक उच्चस्तरीय जांच शुरू की गई।

जांच के बाद एन. वासु और ए. पद्मकुमार को गिरफ्तार किया गया, जो त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी के वरिष्ठ नेता हैं। इन गिरफ्तारियों ने विपक्ष के इस रुख को पुष्ट किया कि मंदिर प्रशासन का उपयोग सत्ता केंद्रों के करीबी व्यक्तियों द्वारा व्यक्तिगत लाभ के लिए किया जा रहा था, जिससे व्यापक साजिश की सीबीआई जांच की मांग उठी। सबरीमाला सोने की चोरी मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने अब तक वासु और पद्मकुमार सहित कई व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।

Point of View

क्योंकि यह धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न है। हमें यह समझना होगा कि न्यायालय की भूमिका केवल कानून के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज में नैतिकता के मानकों को भी स्थापित करता है।
NationPress
06/01/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने केपी शंकर दास की याचिका क्यों खारिज की?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शंकर दास ने भगवान को भी नहीं छोड़ा और उनकी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
क्या है सबरीमाला सोने की चोरी का मामला?
यह मामला 1998-99 में दान किए गए सोने की चोरी से संबंधित है, जिसमें कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
केरल हाईकोर्ट का इस मामले में क्या कहना था?
केरल हाईकोर्ट ने कहा था कि शंकर दास और विजयकुमार आपराधिक साजिश से नहीं बच सकते।
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